देश की सेहत सुधारने में लगा एक युवा

पत्रकारिता से जुड़े आशुतोष कुमार सिंह पिछले 6 वर्ष से स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत देश में स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जागरूकता लाने का काम कर रहे हैं.

प्रेरक व्यक्तित्व ¦  विनायक राजहंस

महंगाई के इस दौर में लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है. स्वास्थ्य की समस्या राष्ट्र के विकास में बाधक है. देश स्वस्थ हो, इसके लिए

सरकारें तो प्रयास करती ही हैं, कुछ जुनूनी लोग भी जन कल्याण के इस काम में लगे हैं. ऐसी ही एक शख्सियत हैं आशुतोष कुमार सिंह, जिन्होंने भारत को स्वास्थ्य की राह पर लाने के लिए एक देशव्यापी अभियान चलाया हुआ है. ‘स्वस्थ भारत’ नाम का यह अभियान 22 जून, 2012 को शुरू किया गया. ‘स्वस्थ भारत’ समय-समय पर अल्पकालिक व दीर्घकालिक परियोजनाओं का संचालन करता रहता है. गतिविधि, रूपरेखा आदि में भिन्नता होते हुए भी इन परियोजनाओं का एकमात्र लक्ष्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना है. इसे दवा की अनियंत्रित कीमतों को काबू में करने हेतु एक जन-जागरूकता कैंपेन भी कहा जा सकता है. बहरहाल, स्वस्थ भारत अभियान के उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए 28 अप्रैल, 2015 को स्वस्थ भारत (न्यास) का गठन किया गया. यह संस्था भारत सरकार के नीति आयोग में पंजीकृत है. आशुतोष इस न्यास के चेयरमैन हैं.

दे रहे स्वस्थ भारत का संदेश: विगत 12 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े आशुतोष कुमार सिंह पिछले 6 वर्ष से ‘स्वस्थ भारत’ अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य चिंतन की धारा को बढ़ाने का काम कर रहे हैं. वह ‘कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिममरिटेलप्राइस’ कैंपेन, ‘नो योर मेडिसिन’ कैंपेन, ‘जेनरिक लाइए पैसा बचाइए’ कैंपेन एवं ‘तुलसी लगाइए रोग भगाइए’ जैसे जनसरोकारी कैंपेन के माध्यम से देश को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं. इसी कड़ी में 2017 में ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का संदेश लेकर स्वस्थ भारत यात्रा कर चुके हैं. 21 हजार किमी की देश-व्यापी इस यात्रा में 29 राज्यों की 1 लाख 50 हजार से ज्यादा बालिकाओं से प्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य चर्चा करने का मौका आशुतोष को मिला. देश भर के 150 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों में स्वास्थ्य संबंधी व्याख्यान देने वाले आशुतोष मूल रूप से बिहार के सीवान जिला के रजनपुरा गांव के रहने वाले हैं. वर्तमान में वह समाचार एवं विचार पोर्टल स्वस्थ भारत डॉट इन का संपादन भी कर रहे हैं.

एक वाकये ने दी प्रेरणा : बकौल आशुतोष, ‘22 जून 2012 का वो दिन आज भी याद है. उस दिन मैं मुंबई के सूचक अस्पताल में भर्ती अपने मित्र की पत्नी को देखने गया था. उन्होंने दवा लाने के लिए मुझे पर्ची थमा दी. दुकानदार ने आई.वी.सेट के 117 रुपये लिए, जबकि उसका होलसेल प्राइस 7 से 8 रुपये होता है. मैंने दुकानदार से कहा कि भाई कुछ कम कर दो, उसने एक न सुनी. तभी मैंने ठान लिया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्याप्त इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज मुखर करूंगा और इसे रोकने की कोशिश करूंगा.’

महंगी दवाइयों के खिलाफ आंदोलन: इसके बाद आशुतोष ने एक स्वास्थ्य आंदोलन की शुरुआत की, जिसकी नींव ही महंगी दवाइयों के खिलाफ पड़ी. दवाइयों की बढ़ी कीमतों को कम कराना आंदोलन का उद्देश्य था. इसी को ध्यान में रख कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस कैंपेन शुरू किया. इस आंदोलन का असर भी दिखा. सरकार सक्रि य हुई. नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइिसंग अथॉरिटी के कामों में तेजी आई. सैकड़ों दवा कंपनियों के खिलाफ ओवरचार्जिंग के मामले तय किए गए. आशुतोष का कहना है कि जेनरिक मेडिसिन यानी ब्रांड रहित दवा का प्रसार करना हमारा ध्येय है ताकि लोगों को सस्ती दवाइयां मिल सकें. इसे अभियान की उपलब्धि ही कही जाएगी कि फिलहाल सरकार ने देश में 4000 से ज्यादा जनऔषधि केंद्र खोल दिए हैं. लेकिन हमारा लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक पंचायत में एक जनऔषधि केंद्र खुले.

स्वस्थ भारत ने 2016 में एवरेस्ट विजेताओं की टीम के साथ गोवा स्थित समुद्र की तलहटी पर (अंडर वाटर) साइकिल चलाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को स्वास्थ्य एवं पर्यावरण जैसे मसलों के प्रति सजग करना था. इस आयोजन को यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त हुआ है.

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