फैशन शो, पहनावा एवं जीवनशैली

1-2 दिसंबर को दिल्ली में कोत्योर रनवे वीक का आयोजन होने जा रहा है. शो में देश के हर कोने से आ रहे डिजाइनरों ने अच्छा कलेक्शन तैयार किया है, जो कि फैशन जगत को कुछ नया देगा. इस आयोजन के बहाने आज के फैशन पर एक दृष्टि…

रिपोर्ट ¦ मीनाक्षी पोद्दार

फैशन शब्द सुनते ही दिमाग में कुछ नयापन का भाव संचारित होने लगता है. यह नया वस्त्र, आभूषण, जूते- चप्पल या फिर बालों एवं आकर्षक लगने हेतु शरीर पर किये गये कृत्रिम परिवर्तन के रूप में हो सकता है. यदि हम अपने सामाजिक व्यवहार पर गौर करें तो पाएंगे कि हमारा अधिकांश व्यवहार फैशन पर ही आधारित है. चाहे यह व्यवहार केश सज्जा के संबंध में हो या जेवर, वेशभूषा, फर्नीचर, जूते-चप्पल, मकान बनाने या कमरे सजाने से संबंधित हो, हम सभी मामलों में फैशन से ही प्रभावित रहते हैं.
किम्बल यंग नामक मनोवैज्ञानिक के अनुसार, ‘फैशन एक प्रचलन, तरीका, कार्य करने का ढंग, अभिव्यक्ति की विशेषता या सांस्कृतिक लक्षणों को प्रस्तुत करने की विधि है जिसे बदलने की आज्ञा स्वयं प्रथा देती है. यदि हम प्रथा को सामाजिक व्यवहार का एक स्थिर और स्थायी पहलू मानते हैं तो फैशन की इस सामान्य स्वीकृति के अंदर होने वाले परिवर्तन के रूप में कल्पना कर सकते हैं.’
फैशन को सर्वाधिक आयाम देने वाला हिस्सा पहनावे का है. फैशन को नित नए प्रयोगों द्वारा आकर्षक बना प्रभावित करने का एक उद्योग चल रहा है. फैशन को जनता तक पहुंचाने हेतु ये उद्यमी शो आयोजित करते हैं. आजकल देश का हर कोना फैशन शो के बारे में जानने सुनने लगा है. यहां तक कि डिजाइनर इन आयोजनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा भी लेने लगे हैं. ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि फैशन शो के बिना फैशन इंडस्ट्री की कल्पना करना मुश्किल है. फैशन में होने वाले परिवर्तन ने उद्योग जगत से लेकर इसके शौकीनों के सामने एक चुनौती उत्पन्न की है. परिवर्तन के साथ ग्राह्यता और स्वीकार्यता की चुनौती बढ़ती जा रही है. यह बहुत ही गतिशील होता है और पलक झपकते ही अपना रंग बदल लेता है. फैशन जगत में उभरते डिजाइनरों के लिए यह और मुश्किल है. इसी मुश्किल को आसान बनाने का काम कर रहे हैं फैशन शो. फैशन शो नए डिजाइनरों के लिए प्लेटफार्म तलाशने का काम करते हैं, जहां वे अपने डिजाइन लोगों के सामने पेश कर सके और उन्हें मान्यता दिला सकें.
हालांकि भारत में फैशन उद्योग को नया माना जाता है, पर भारत में कपड़ों का इतिहास बहुत पुराना है. भारत में पहनावा संस्कृति बहुत पुरानी है और इसका प्रमाण प्राचीनतम माने जाने वाली सैन्धव सभ्यता से भी मिलता है. भारतीय फैशन का एक रूप पश्चिमी संस्कृति से निकलता है. आजादी के बाद भारत में फैशन का एक नया दौर शुरू हुआ. अब सिलाई अलग धागे पैटर्न से की जाने लगी जिसमें कढ़ाई पश्चिमी कपड़े प्रभाव को दर्शाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा को शामिल करने के लिए विभिन्न कपड़े, स्कर्ट, शर्ट और पैंट आदि बनने लगे. नए-नए डिजाइनरों का आगमन हुआ और भारतीय कपड़े को पश्चिमी रंग से रंगा जाने लगा. बहुतों ने फैशन जगत को अपने प्रयासों से ने ऊंचाई देने का काम भी किया. इनमें एक प्रमुख नाम है रितु कुमार का, जिन्होंने बुटीक उद्योग को एक नई दिशा दी. भारतीय फैशन को सिनेमा ने भी काफी प्रभावित किया. भानु अथैया जैसे डिजाइनरों ने 1960 के दशक में फिल्म के साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया था.
फैशन को प्रशिक्षण देने एवं नए प्रयोगों को व्यवस्थित ढंग से नई पीढ़ी तक पहुंचाने हेतु शैक्षिक संस्थानों की आवश्यकता को समझते हुए 1986 में भारत सरकार ने न्यूयॉर्क की मदद से दिल्ली में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) खोला. आज सैकड़ों संस्थान नई प्रतिभाओं को तराश रहे हैं. दिल्ली स्थित तत्यम स्कूल ऑफ डिजाइन की निदेशक रजनी राठी के अनुसार, ‘देश में युवाओं का एक बड़ा वर्ग फैशन को अपना करियर बनाना चाहता है. यह एक अच्छा संकेत है. भारत के कपड़े भारत ही नहीं, विदेशों में भी पसंद किये जाते हैं इसलिए फैशन जगत में अपार संभावनाएं हैं. आवश्यकता है कि युवा प्रोफेशनल ट्रेनिंग लें और अपने हुनर को नई ऊंचाई दें. हां, शुरुआती दिनों में कुछ कठिनाइयां जरूर आती हैं, पर ये तो प्रत्येक फील्ड में आती हैं.’
देश में डिजाइनरों ने काफी अच्छा काम किया है. इन्होंने न सिर्फ अपने डिजाइन से लोगों का दिल जीता है बल्कि भारतीय पारंपरिक पहनावे को एक नई ऊंचाई देने का काम भी किया है. भारतीय पारंपरिक फैशन को प्रोत्साहन देने वाले गोटा पट्टी के काम के लिए मशहूर डिजाइनर तनय पारीक आगामी माह दिसंबर में दिल्ली में अपने डिजाइन शो करने जा रहे हैं. तनय का मानना है, ‘भारत विश्व का दार्शनिक एवं सांस्कृतिक गुरु रहा है. भारत की एक सांस्कृतिक विरासत है जिसने पूरी दुनिया को आकर्षित किया है. ऐसे में हम दूसरे देश की संस्कृति पहनावे के माध्यम से अपने देश में प्रसारित करने की जगह अपनी संस्कृति को पूरी दुनिया में प्रसारित करें. मैं अपने डिजाइन में हमेशा वही खुशबू रखने की कोशिश करता हूं जिसने हजारों सदैव दुनिया को लुभाया है. इसमें नयापन है, भावनात्मक अपील भी और सबसे बढ़कर गर्व का एहसास है.’
सिनेमा ने फैशन को हमेशा से प्रभावित किया है और एक नई दृष्टि दी है. मुंबई की डिजाइनर सौम्या शर्मा प्लस साइज के डिजाइन पर काम कर रही हैं और अपना डिजाइन फैशन शो में प्रदर्शित करती रहती हैं. इनका आगामी शो दिल्ली में होने जा रहा है. सौम्या कहती हैं, ‘ऐसा नहीं कि केवल स्लिम लोगों पर ही ड्रेस अच्छे लगते हैं. ड्रेस की डिजाइन अच्छी हो तो हेल्दी लोगों को भी आकर्षक लुक दिया जा सकता है और अगर डिजाइन खराब हो तो स्लिम लोगों का लुक अच्छा नहीं लगता. दरअसल हम पहले ही मान लेते हैं कि अमुक ड्रेस अमुक पर अच्छा लगेगा. हमें अपनी इस भ्रांति को तोड़ने की जरूरत है. मैंने इस एरिया में काफी विमर्श किया और पाया कि प्लस साइज के लिए किसी ने ध्यान नहीं दिया है.’
इन प्रतिभाओं को प्लेटफार्म देने हेतु समय-समय पर फैशन शो का आयोजन होता रहता है. आगामी 1-2 दिसंबर को दिल्ली में कोत्योर रनवे वीक का आयोजन होने जा रहा है. शो डायरेक्टर आरती तिवारी का मानना है, ‘इस शो में ज्यादातर नई प्रतिभाओं को अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है. शो में देश के हर कोने से आ रहे डिजाइनरों ने अच्छा कलेक्शन तैयार किया है, जो कि फैशन जगत को कुछ नया देगा.’
मानव की भौतिक उपस्थिति के अन्य पहलुओं की तरह वस्त्रों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है. वस्त्रों का व मानव की भौतिक उपस्थिति के अन्य पहलुओं की तरह वस्त्रों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है. व्यक्ति का व्यक्तित्व बनाने में वस्त्रों की अहम भूमिका होती है. कपड़े के महत्व को दर्शाते हुए मार्क ट्विन ने यहां तक कहा था कि ‘कपड़े प्रकट होने पर विनम्रता की मृत्यु हो गई.’ फैशन की परिवर्तनशीलता पर आॅस्कर वाइल्ड ने कहा था कि ‘फैशन ऐसी असहनीय विविधता है जो आपको हर छह महीने में बदलना है.’
फैशन जगत नित नए मुकाम हासिल कर रहा है और नए लोगों को व्यवसाय के अवसर प्रदान कर रहा है. बस थोड़ा-सा ध्यान देने की जरूरत है कि पहनावा आकर्षित कर सकता है, पर व्यक्तित्व आकर्षण को स्थायित्व दे सकता है.

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