गिलगित-बाल्टिस्तान में आजादी को लेकर प्रदर्शन

गिलिगित बाल्टिस्तान के हुंजा इलाके में भारी संख्या में लोगों ने मूलभूत और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ रैली निकाली। इस दौरान लोगों ने ‘जीना होगा मरना होगा, मरना होगा, करना होगा के नारे लगाए।’ सड़कों पर उतरे लोगों ने प्रदर्शन के दौरान सरकार से अपने हक और आजादी की मांग की।
ज्ञात हो कि भारत-पाकिस्तान के बीच सिर्फ जम्मू कश्मीर का भू-भाग ही नहीं बल्कि गिलगित बाल्टिस्तान का मुद्दा भी काफी संवेदनशील है। दोनों ही मुल्क गिलगित बाल्टिस्तान को अपना-अपना हिस्सा बताते हैं। हालांकि जब भी इस क्षेत्र में प्रदर्शन होता है तो स्थानीय लोग पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नजर आते हैं।
अप्रैल 1949 तक गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का हिस्सा माना जाता रहा। लेकिन 28 अप्रैल 1949 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार के बीच कराची समझौता हुआ, जिसके तहत गिलगित के मामलों को सीधे पाकिस्तान की केंद्र सरकार के मातहत कर दिया गया। खास बात ये है कि इस समझौते में इलाके का कोई भी नेता शामिल नहीं था।

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गौरतलब है कि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र मामले पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने औपचारिक बैठक बुलाई थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की ओर से गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत घोषित किया जा सकता है। वर्तमान समय में पाकिस्तान सरकार की ओर से गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के लीगल स्टेटस की समीक्षा के लिए एक कमिटी गठित की गई है। माना जा रहा है कि लीगल स्टेटस की समीक्षा होने के बाद पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत घोषित कर सकता है।

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