तोप के गोले से बन गया तालाब

राजस्थान के जयपुर स्थित जयगढ़ किले में एशिया की सबसे बड़ी तोप रखी हुई है. कहा जाता है कि यह तोप केवल एक ही बार चली और उसके गोले से तालाब बन गया, जिसमें आज भी पानी मौजूद है.


भारत के राजा-महाराजा अपनी विरासत और शानो-शौकत के लिए तो जाने ही जाते रहे हैं, अपने अस्त्र-शस्त्र को लेकर भी चर्चित रहते थे. चाहे महाराणा प्रताप की तलवार हो या टीपू सुल्तान की तोप, सबकी अपनी खासियत रही है. लेकिन हम बताने जा रहे हैं राजस्थान के जयपुर स्थित जयगढ़ के किले में रखी एशिया की सबसे बड़ी तोप के बारे में, जो केवल एक ही बार चली और उसके गोले से तालाब बन गया. जयगढ़ का यह किला अरावली की पहाड़ियों पर बना है और इसका निर्माण 1726 में हुआ था. किले और इस तोप का इतिहास आज भी वहां दर्ज है.

तालाब में आज भी है पानी

इस तोप का आकार इतना बड़ा है कि इसे जब एक बार चलाया गया तो इसके गोले से 35 किलोमीटर दूर एक गांव में तालाब बन गया. खास बात यह है कि इस तालाब में आज भी पानी मौजूद है और लोगों के लिए जल का अहम स्रोत बना हुआ है. जब तोप से गोला छूटा तो यह चाकसू नामक कस्बे में जा गिरा.

राजा जयसिंह ने बनवाया था किला

बता दें कि जयगढ़ किला महाराजा जय सिंह ने 18वीं सदी में बनवाया था. यह शानदार किला जयपुर में अरावली की पहाड़ियों पर चील का टीला पर स्थित है. विद्याधर नाम के वास्तुकार ने इसका डिजाइन तैयार किया था. इस किले के ऊंचाई पर स्थित होने के कारण इससे पूरे जयपुर शहर को देखा जा सकता है. यह मुख्य रूप से राजाओं की आवासीय इमारत थी, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल शस्त्रागार के तौर पर किया जाने लगा.

100 किलो गन पाउडर की जरूरत

जानकार कहते हैं कि 35 किलोमीटर तक वार करने के लिए इस तोप को 100 किलो गन पाउडर की जरूरत होती थी. वहीं इतिहासकार बताते हैं कि अधिक वजन होने के कारण इसे किले से बाहर नहीं ले जाया गया और न ही कभी युद्ध में इसका इस्तेमाल किया गया था.

50 टन वजन, 31 फीट लंबी

इस तोप का कुल वजन 50 टन है. यह तोप जयगढ़ किले के डूंगर दरवाजे पर रखी गई है. तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है. तोप में 8 मीटर लंबे बैरल रखने की सुविधा है. यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा चर्चित है.

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