रावण की पत्रकार वार्ता

समाज और देश रावणों से भरा पड़ा है. राम के इस राष्ट्र में सत्ताओं पर उसके ही अनुयायी काबिज हैं. फिर रावण कैसे जल सकता है? रावण अभी जिंदा हैं!

कटाक्ष ¦ ललित शौर्य

रावण यमलोक में बैठे-बैठे बड़ा बोरिंग फील कर रहे था. वो कई सौ सालों से यमलोक में ही है. उसे यहां बिलकुल मजा नहीं आता, क्योंकि न यहां सोने की लंका है और न ही सुरा-सुंदरी. रावण को यहां खुलकर अट्टहास करने की भी छूट नहीं है. उसके दस के दस सिर हमेशा झुके ही रहते हैं. उनमें पहले वाली रौनक नहीं है. इधर एन्जॉय के नाम पर सब कुछ सिफर है. रावण हर साल यमराज के यहां एप्लीकेशन लगाता है कि उसको कुछ दिन एन्जॉय करने के लिए धरती पर भेज दिया जाए, पर रावण का पुराना रिकॉर्ड देखकर उसकी लीव कभी सैंक्शन नहीं हो पाती. वो बेचारा हमेशा उदास रहता, बीसों आंखों से आंसू बहाता. इस बार दशहरा के टाइम यमराज का मूड कुछ ठीक-ठाक था. उन्होंने अपना टारगेट लगभग समय रहते अचीव कर लिया था. रावण ने फिर एप्लीकेशन लगाई और चित्रगुप्त के थ्रो सिफारिश भी लगवाई. फलत: रावण को इस बार दशहरे वाले दिन एक दिन के लिए धरती पर जाने की परमीशन मिल गई. रावण खुश बहुत हुआ और तुरंत की ओर प्रस्थान किया. यहां आकर उसने देखा कि उसके बड़े-बड़े पुतले बनाए गए हैं. लोग कौतूहल से पुतलों के आस-पास चक्कर लगा रहे हैं. वो बड़ा खुश हुआ और जोर-जोर से अट्टहास करने लगा. मन ही मन सोचने लगा कि इतने सौ सालों बाद भी उसका क्रेज बिलकुल भी कम नहीं हुआ है.
इसी बीच रावण के धरती पर आने की खबर मीडिया वालों को लग गई. सबसे तेज, सबसे पहले, कल तक, परसों तक, अभी अभी, कभी-कभी जितने भी चैनल व अखबार वाले थे, सब रावण का इंटरव्यू लेने पहुंच गए. वो सब रावण को घेर कर खड़े हो गए और तमाम तरह के प्रश्न करने लगे.
उनके प्रश्नों को अनसुना कर रावण ने पहला प्रश्न दागा- ‘कौन हो तुम सब? हा… हा… हा…’
रावण की ओर देखकर एक पत्रकार झल्ला कर बोला- ‘हम सब आपके जमाने के पत्रकार नारद जी की अघोषित संताने हैं, और हंसने की क्या बात है इतनी जोर से, क्या तुमने हंसने की परमीशन ली हुई है. नॉइज पॉल्यूशन के मामले में तुम अंदर भी हो सकते हो.’
पत्रकार की बात सुनकर रावण क्रोध में भरकर बोला- ‘हम लंकेश हैं…’
ये सुनते ही ‘कल तक’ का पत्रकार लपककर बोला- ‘तुम लंकेश हो तो क्या हुआ, हम भी पत्रकार हैं. धरती पर आजकल सिर्फ पत्रकार ही बोलता है और सामने वाला सिर्फ मुंडी हिलाता है.’
रावण डर गया, उसने अपने दसों सिरों को एडजस्ट किया और विनम्रता से कहा- ‘पूछिये, आप लोगों को क्या पूछना है?’
पत्रकार- ‘आपको इतने सालों बाद धरती पर आकर कैसा फील हो रहा है?’
रावण- ‘अच्छा लग रहा है कि इतने सौ वर्षों बाद भी मेरा क्रेज बरकरार है. जगह-जगह अपने पुतले देखकर बड़ा एक्साइटेड हूं.’
पत्रकार- ‘आप अपने दस सिरों और बीस आंखों के साथ कैसे एडजस्ट कर लेते हैं?’
रावण- ‘हा… हा… हा… मुझे पता था कि आप लोग ये प्रश्न जरूर पूछेंगे, क्योंकि मैं देख रहा हूं कि आज धरती पर इंसान का एक सर और दो आंखें होने के बावजूद भी पचासों जगह पर निगाहें और हजारों जगह पर निशाना है. वो रावण के जैसा बन तो नहीं सकता, पर उसने रावण वाली कई क्वालिटी अपने अंदर उतार ली है. खैर, जहां तक हमारा सवाल है तो हम लंकेश हैं…’
पत्रकार- ‘आपको क्या लगता है, रावण ज्यादा फेमस है या राम?’
रावण- ‘ये प्रश्न आप खुद से पूछिये. आज घर-घर में रावण है. आये दिन अपहरण, लूट, उत्पात मच रहा है. नरसंहार हो रहा है. लोग एक-दूसरे से रावण की औलाद तक कह के संबोधित करते हैं. आपने किसी से सुना है वो तो राम जैसा है, नहीं न! आज धरती पर बस रावण ही रावण है…’
पत्रकार- ‘आपसे आखिरी सवाल… आपको ये देखकर बुरा नहीं लगता कि हर साल आपका पुतला जलाया जाता है?’
रावण- ‘रावण को जलाया नहीं जा रहा, उसे जगाया जा रहा है. आज रावण घर-घर में जाग रहा है. समाज और देश रावणों से भरा पड़ा है. राम के इस राष्ट्र में सत्ताओं पर मेरे ही अनुयायी काबिज हैं… फिर रावण कैसे जल सकता है… हम अभी जिंदा हैं…’
वार्ता पूरी होते ही रावण के धरती पर घूमने का टाइम ओवर हो गया, वो यमलोक की ओर प्रस्थान कर गया. इधर हफ्ते भर से 24 घंटे टीवी पर रावण ही छाया रहा. राम टीवी पर कहीं भी ढूढ़े नहीं मिले.

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