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सवालों के घेरे में रिवाइज्ड एस्टीमेट

सवालों के घेरे में रिवाइज्ड एस्टीमेट
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झारखंड से ¦ राजीव रंजन झा झारखंड की राजधानी रांची के रिम्स में 56.99 करोड़ की योजनाओं के लिए 25.88 करोड़ का रिवाइज्ड एस्टीमेट तैयार किया गया है। सवाल यह है कि जब योजना पूरी होने को आई तब 25 करोड़ लागत क्यों बढ़ा दी गई?


झारखंड की राजधानी रांची के रिम्स में कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन जब इनके पूरा होने का समय आया तो इंजीनियरों ने करोड़ों रुपये का रिवाइज्य इस्टीमेट पेश कर दिया। जानकारी के अनुसार, इंजीनियरों ने 56.99 करोड़ की योजनाओं के लिए 25.88 करोड़ का रिवाइज्ड एस्टीमेट तैयार किया। दूसरी ओर इन योजनाओं को इसी वर्ष जुलाई से अगस्त तक पूरा कर लिया जाना था। रिम्स गवर्निंग बॉडी ने इस पर आपत्ति की और इसकी जांच कराने के निर्देश दिए, लेकिन जांच की फाइल की गति जिस गति से चल रही है, उस पर सवाल उठते हैं। मई में ही जीबी ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन रिम्स प्रबंधन ने तीन माह बाद झारखंड भवन निर्माण निगम लिमिटेड के एमडी को जांच कमिटी गठित करने से संबंधित पत्र भेजा है।क्या है पूरा मामलाएस्टीमेट बढ़ाने को लेकर 19 मई 2016 को हुई शासी परिषद की बैठक में विचार किया गया। इसमें पांच योजनाओं के लिए करीब 25.88 करोड़ का एस्टीमेट बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया और जीबी के सदस्यों को ब्रीफ किया गया। इसके बावजूद जीबी एस्टीमेट बढ़ाने के प्रस्ताव को सही नहीं मान रही है। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अब इंजीनियरिंग सेल खत्म हो चुकी है। विभाग की अधिकांश योजनाएं अब झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड की ओर से संचालित की जानी है। ऐसे में रिम्स प्रबंधन योजना से संबंधित सभी कागजात निगम को भेज दे और निगम के एमडी इंजीनियरों की टीम गठित कर पुनरीक्षित प्राक्कलन की जांच करे। जांच के बाद ही इस मुद्दे को जीबी में रखा जाए तब इस पर निर्णय लिया जाए। इन बिंदुओं पर है आपत्ति
  • जब योजना के पूरा होने का समय आया तब क्यों दिया जा रहा है पुनरीक्षित प्राक्कलन?
  • योजनाओं में जो भी उपकरण लगाने की बात कही गई, उसे पहले ही शामिल क्यों नहीं किया गया?
  • योजना समय पर क्यों नहीं पूरी हुई?
  • जांच का आदेश मई में, पत्र भेजा गया अगस्त में
पुनरीक्षित प्राक्कलन देने पर गवर्निंग बॉडी ने असहमति जताते हुए इसकी जांच झारखंड राज्य भवन निर्माण लिमिटेड के इंजीनियरों की समिति से कराने का निर्देश दिया। जीबी की बैठक 19 मई 2016 को हुई थी, लेकिन करीब तीन माह बाद 13 अगस्त 2016 को रिम्स प्रबंधन की ओर से पत्र निगम के एमडी को भेजा गया है जिसमें प्राक्कलन की जांच जल्द कराने का आग्रह किया है। अब सवाल यह उठता है कि जांच के लिए तीन महीने देरी से पत्र क्यों भेजा गया?इस वित्तीय वर्ष में नहीं मिला पैसायोजनाओं के लिए इस वित्तीय वर्ष में पैसा नहीं मिला है। ऐसे में काम या तो बंद कर दिया या फिर धीमा पड़ा है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की इंजीनियरंग सेल से भवन निर्माण निगम में योजना ट्रांसफर होने के बाद अभी तक पैसा नहीं मिला है। ऐसे में संभावना है कि समय पर योजनाएं पूरी नहीं होगी और शत-प्रतिशत लागत भी बढ़ेगी।

Updated : 1 Oct 2016 2:56 PM GMT
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