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हुनरमंद होते होनहार

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रांची से ¦ राजीव रंजनकेंद्र सरकार ने कौशल विकास की योजना के साथ देश के युवाओं को हुनरमंद बनाने का जो संकल्प लिया है, उसमें झारखंड सरकार भी आगे बढ़ रही है. राज्य में कौशल विकास की संयुक्त संस्था के रूप में सोसाइटी को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत लगभग 14 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाना है.


जब लोग हुनरमंद होंगे तो वे न सिर्फ स्वरोजगार करेंगे, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देकर बेरोजगारी को दूर करने में सहायक बनेंगे. जिस तरह से आबादी बढ़ रही है, उससे बेरोजगारी भी एक समस्या बनकर उभरी है. कई तरह की जरूरतें भी बढ़ी हैं. कई तरह के कार्य के अवसर भी बढ़े हैं. ऐसे कार्योें को करने के लिए बड़े स्तर पर श्रमशक्ति की जरूरत होती है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए हुनरमंद लोगों की मांग होने लगी है, जिसे कौशल विकास के जरिये पूरा किया जा सकता है.केंद्र सरकार ने कौशल विकास की योजना के साथ देश के युवाओं को हुनरमंद बनाने का जो संकल्प लिया है, उसमें झारखंड सरकार भी आगे बढ़ रही है. यहां झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी नाम से पंजीयन कराकर विधिवत रूप से इस योजना की शुरुआत की गई थी. मैनेजमेंट सूचना प्रणाली के माध्यम से कौशल विकास के कार्यक्रमों का संचालन एवं अनुश्रवण करने के साथ ही झारखंड राज्य में कौशल विकास की संयुक्त संस्था के रूप में सोसाइटी को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. कई बार सरकार द्वारा आरंभ की गई योजनाओं के बारे में जानकारी एकत्र करना मुश्किल होता है. जानकारी के अभाव में योजनाएं खटाई में पड़ जाती हैं. इसलिए केंद्र सरकार ने डिजिटलाइजेशन के दौर में इसके लिए भी एक पोर्टल बनाकर योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की है. एक वेबसाइट तैयार की गई है, जहां प्रशिक्षु, प्रशिक्षणदाता और नियोक्ता समेत उन सभी के लिए सूचनाओं का मंच बनाया गया, जहां पर इसमें रुचि रखने वाले लोग आसानी से जानकारी एकत्र कर इससे जुड़ सकते हैं. इस योजना का उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्तीकरण कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. साथ ही पलायन को रोकना भी है, जो आज एक समस्या बन चुकी है. रोजगार के अभाव में एक राज्य से लोग दूसरे राज्य में पलायन करते हैं. घर से दूर उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जबकि वे अपने घर में ही काम करेंगे तो आय भी होगी और राज्य को भी फायदा होगा.दक्ष लोगों की जरूरतआज जिस तरह से छोटे-बड़े स्तर पर उद्योग का विस्तार हो रहा है और हर स्तर के उद्योग के लिए दक्ष लोगों की जरूरत पड़ रही है, उसे देखते हुए युवाओं को कौशलयुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. कौशल विकास योजनाओं के आरंभिक दौर में जागरुकता निर्माण और अधिसंरचना निर्माण पर जोर दिया गया, ताकि वे योजनाओं के लक्ष्य और नीति को बेहतर तरीके से समझ सकें. प्रदेश में कौशल विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है. विभागों की भागीदारी से स्किल कमिटियों का गठन किया गया है. उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में एसडीसी का गठन किया गया है. उद्योग की सहभागिता के लिए बैठकों का आयोजन करके नौकरी वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है. उन क्षेत्रों में ध्यान दिया गया है, जहां अधिक से अधिक मानव श्रम की जरूरत पड़ती है या आने वाले दिनों में पड़ सकती है.योजना के प्रति सजग सरकारप्रदेश की रघुवर सरकार आरंभ से ही इस योजना के प्रति सजग रही है. निजी और सरकारी संस्थाओं के साथ समझौते कर समन्वय स्थापित किया गया और कागजी प्रक्रिया आरंभ कर योजना को धरातल पर उतारने की कोशिश शुरू कर दी गई है. विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न स्टेक होल्डर्स तथा विभागों के साथ संवाद किया गया है. योजना के क्रियान्वयन से पहले कुछ प्रमुख बिंदुओं को निर्धारित किया गया. झारखंड कौशल विकास मिशन के तहत कृषि, वाहन, परिधान, सौंदर्य प्रसाधन, विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू कार्य, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, खुदरा, सुरक्षा और दूरसंचार जैसे विषयों का चुनाव किया गया. लगभग हर उस क्षेत्र को चुना गया, जहां पर कामगारों की जरूरत पड़ती है. जब क्षेत्र चुने गए तो विभागों का चयन भी किया गया. इसलिए कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य और मानव संसाधन समेत अन्य विभागों को भी जोड़ा गया. इसके अलावा भी हर उस विभाग को जोड़ा गया, जहां पर मिशन की मांग और नियम के अनुरूप प्रशिक्षुओं की नियुक्ति की जा सकती थी. प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के लिए उम्र 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है. इनमें महिला, अनुसूचित जाति/ जनजाति और दिव्यांग को प्राथमिकता दी जाती है.नियोजन की गारंटीप्रशिक्षण के बाद करीब आधा फीसदी प्रशिक्षणार्थियों को नियोजन की गारंटी दी गई. आवासीय और गैर-आवासीय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई. राष्ट्रीय स्तर की इस योजना को सफलतापूर्वक चलाने के लिए एक ठोस आधारभूत संरचना की व्यवस्था की जा रही है. राज्य के सभी जिलों में मेगा स्किल सेंटर स्थापित किए जाएंगे. व्यावसायिक मोटर वाहन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां पर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देकर कार्य करने के योग्य बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री ने अपने अधिकारियों को निर्देश देकर हर क्षेत्र को इस मिशन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की है. उन्हें इस मिशन को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने पर जोर देने को कहा है. निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस मिशन की सफलता के लिए अपना योगदान देना चाहिए. इसमें सरकार हर कदम पर उन्हें मदद करने के लिए तत्पर है.कंपनियों से हुए समझौतेप्रदेश में कई ऐसे संस्थान हैं, जहां राज्य या केंद्र स्तर पर समझौते कर कौशल विकास का काम किया जा रहा है. पिछले वर्ष एनटीपीसी ने दो महीने के अंतराल पर केंद्र सरकार के साथ समझौता कर प्रदेश में कौशल विकास के लिए काम करना शुरू किया था. एनटीपीसी ने एनएसडीसी के साथ दो समझौते किए थे. पहले समझौते में बीस से अधिक स्थानों को ध्यान में रखते हुए पांच हजार महिला-पुरुषों को दो वर्ष में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई थी. इसके लिए साढ़े छह करोड़ रुपए का बजट रखा गया था. इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यहां पर सत्तर से अधिक कौशल विकास कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जा रहे हैं. इस प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. इसका लाभ इलाके के युवाओं को होगा. एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज) मंत्रालय ने भी पिछले वर्ष प्रदेश में कौशल विकास का काम शुरू किया है. स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय को झारखंड के सभी जिलों से जोड़ने पर जोर दिया गया.राज्य में निवेश का प्रस्तावरघुवर सरकार ने प्रदेश को उद्योग हब बनाने के लिए देश और विदेश के दौरे कर उद्योगपतियों को निवेश के लिए जो प्रोत्साहित किया, उसका फायदा भी हुआ. वाहन से लेकर वस्त्र कंपनियों ने यहां निवेश की इच्छा जाहिर की. वस्त्र नीति जारी करने के बाद 1500 करोड़ रुपए के प्रस्ताव आए, जिससे लगभग डेढ़ हजार लोगों को नौकरी के अवसर मिलेंगे. सरकार ने कंपनियों को कारोबार के साथ ही कौशल विकास मिशन को आगे बढ़ाने पर जोर देने को कहा. बहरहाल, केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्ष में देशभर के लगभग पांच करोड़ युवाओं को कौशल विकास के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत झारखंड में लगभग 14 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाना है.

Updated : 11 Oct 2018 2:24 PM GMT
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