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देश के एजेंडे में हर्बल खेती, बदल सकती है किसानों की किस्मत

देश के एजेंडे में हर्बल खेती, बदल सकती है किसानों की किस्मत
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राजाराम त्रिपाठी

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की तीसरीकिस्त के बारे में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंसमें जानकारी दी। इसमें उन्होने कृषि उपज केरखरखाव, परिवहन एवं विपणनसुविधाओं के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपए का कृषि ढांचागत सुविधा कोष, डेयरी उद्योग के लिए 15 हजार करोड़, पशुपालन के लिए 15 हजार करोड़,मछुआरों के लिए 20 हजार करोड़, मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ तथा देशमें दस लाख हेक्टेयर जमीन पर औषधीय पौधों की खेती यानि हर्बल खेती के लिए 4000 करोड़ की घोषणा की।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एलानों पर जैविक हर्बल कृषक और आईफा के राष्ट्रीय संयोजक राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि खेती-किसानी के लिए एक समग्र पैकेज की जरूरत थी, जिसे पूरा करने की कोशिश की गई। उन्होंने केंद्र सरकार की घोषणाओं का स्वागत किया। राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि 74 हजार 300 करोड़ रुपए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए प्रावधारित किया गया है। ये राशि क्या केंद्र की एजेंसियों के जरिए किसानों का उत्पादन खरीदेगी या राज्यों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करने के लिए देगी, इसे स्पष्ट होना बाकी है।

आईफा के राष्ट्रीय संयोजक राजाराम त्रिपाठी

त्रिपाठी ने येभी कहा कि छत्तीसगढ़ तथा अन्य जो भी मुख्य रूप से कृषि पर आधारित राज्य हैं, उन्हें भी ‌इसका फायदाजरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने आईफा के कई सुझावों पर काम किया है। पर हमें बड़े दुख केसाथ कहना पड़ रहा है कि, किसानों की जो खड़ी फसलें लाक डाऊन के कारणखराब हुई हैं, इन योजनाओं सेहमारे उन अन्नदाताओं को कोई सीधा फायदा नहीं होने वाला। इसलिए ऐसे किसानों कोतत्काल फायदा मिले, इस पर सरकार कोविचार करना चाहिए। पच्चीस प्रतिशत बढ़ाकर न्यूनतम खरीद मूल्यों पर किसानों केउत्पाद खरीदे जाएं।

केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में सुधार किया जाएगा। इस पर कृषि विशेषज्ञ राजारामत्रिपाठी ने कहा कि न्यूनतम खरीद मूल्य से कम दर पर अगर किसी किसान का उत्पाद किसीके भी द्वारा खरीदा जाए, तो इसके लिए दंडका प्रावधान होना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में हर्बल उत्पादों की खेती

हर्बल उत्पादोंकी खेती पर राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि 2001 में छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का हमारेकोंडागांव स्थित "मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म" पर आगमन हुआ था। उन्होंनेहर्बल की खेती को पूरी बारीकी से देखा समझा, इसके पश्चात अजीत जोगी की पहल पर छत्तीसगढ़ को विधानसभा में''हर्बल राज्य'' घोषित किया गया, पर संभवतः राजनीतिकविद्वेष वश आगे चलकर उस दिशा में कुछ भी कार्य नहीं किया गया। उन्होंने कहा किछत्तीसगढ़ में सरकारों को हर्बल की खेती पर जोर देना चाहिए।

राजाराम त्रिपाठी का कहना है कि 44 फीसदी जंगल जिस राज्य में हों, जहां के ज्यादातर जिले आदिवासी बहुल हों, वहां की सरकारों के पास अगर हर्बल की खेती का रोडमैप न हो तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यजनक कुछ नहीं हो सकता। क्लस्टर अभिधारणा को राजाराम त्रिपाठी ने बेहद अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर या सरगुजा में शुरुआत में कोई नया काम करने के लिए किसान तैयार नहीं होते, इसलिए शुरुआत में प्रगतिशील किसानों को इस योजना से जुड़ना चाहिए बाद में उनके नेतृत्व में क्लस्टर का निर्माण करके इस खेती को विस्तार दिया जा सकता है। इस अवधारणा का स्वागत है। यहां हल्दी, कालीमिर्च, मसाले, मूसली, स्टीविया, चाय और कॉफी की खेती की संभावनाएं हैं। यहां जैव विविधता और जलवायु विविधता दोनों बेहतरीन हैं।

देश के एजेंडे में हर्बल खेती

बस्तर के हर्बलकिसान राजाराम त्रिपाठी के 25 साल के एकल संघर्षने आखिरकार "हर्बल खेती" को देश के एजेंडे पर ला ही दिया। कम से कम लागतके जरिए जैविक पद्धति से हर्बल की खेती करके अधिक से अधिक लाभ लेने का सफल मॉडलदेखने-समझने के लिए देश-विदेश के किसान यहां प्रतिदिन आते रहते हैं। कोंडागांव स्थित मां दंतेश्वरी हर्बलफार्म का "उच्च लाभदायक बहुस्तरीय हर्बल खेती" का मॉडल पूरे देश मेंसर्वश्रेष्ठ रोल मॉडल माना गया है तथा इसके प्रणेता डॉ राजाराम त्रिपाठी कोसैकड़ों अवार्ड सहित देश के 'सर्वश्रेष्ठ कृषक' का लगातार तीनबार सम्मान भी प्राप्त हुआ है।

माना जाता है किइनके मॉडल से प्रभावित होकर ही केंद्र सरकार ने कुल 10 लाख हेक्टेयर जमीन परहर्बल की खेती के लिए 4000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस राशि में सेपर्याप्त हिस्सा इस प्रदेश को मिलना ही चाहिए तथा यहां की संभावनाओं को देखते हुए,हर्बल की खेती को यहां हर हाल में बढ़ावा दियाजाना चाहिए। वैसे इस पैकेज का अगर ईमानदारी से उपयोग किया गया तो हर्बल खेती किसानों की ही नहीं देश की भी किस्मत बदल सकती है।

गौठान योजना का स्वागत

राष्ट्रीय पैकेजमें पशुपालन के लिए 15000 करोड़ की प्रावधान राशि के संदर्भ में राजाराम त्रिपाठीने छत्तीसगढ़ की गौठान योजना का जिक्र करते हुए इस योजना का स्वागत किया है। उन्होंनेकहा कि आवारा पशुओं के कारण प्रदेश ही नहीं पूरे देश के किसान परेशान हैं। यह एकअच्छी सोच के साथ बनाई गई अच्छी योजना है, लेकिन इसके लिएभी सरकार को इसकी सक्षम कार्यान्वयन व सतत मॉनिटरिंग पर ध्यान देना होगा, नहीं तो अन्य सरकारी योजनाओं की तरह इसे भी नयाचरागाह समझ कर अधिकारी और भ्रष्ट नेता मिलकर चर जाएंगे।

पशुपालन मेंबुनियादी ढांचा सुधारने के लिए विकास फंड को इकाई बनाने का फैसला किया गया है। इस ढांचे के विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का फंड दिया जा रहा है,छत्तीसगढ़ को इससे भी काफी फंड मिलने की उम्मीदहै। कृषि विशेषज्ञ ने इसका भी स्वागत किया।

मछली और मधुमक्खी पालन पर ज़ोर

मछली पालन के लिए20 हजार करोड़ और मधुमक्खीपालन के लिए 500 करोड़ का प्रावधान कियागया है वित्त मंत्री की ओर से। इन घोषणाओं का भीराजाराम त्रिपाठी ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि छतीसगढ़ तालाबों, पोखरों, नदी-नालों काप्रदेश है। यहां बहुसंख्य मछुआरा समितियां बेहद सीमित साधनों में भी बहुत अच्छाकार्य कर रही हैं। उन्हें औरसशक्त बनाने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ से मछली निर्यात की बहुत बड़ी संभावनाएं हैं।

मधुमक्खी पालनकरने वाले किसानों के लिए 500 करोड़ रुपए के पैकेज पर उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन शहद काउपयोग करने वालों के लिए ही नहीं बल्कि किसानों की अनाज, फलों व सब्जियों के खेतों में समुचित परागण के लिए भी बेहदजरूरी है। शहद हमारे देश में बहुत बिकता है। पूरे भारत में गुणवत्ता के दृष्टिकोणसे सर्वश्रेष्ठ शहद छत्तीसगढ़ में मिलता है। बस्तर, सरगुजा, अमरकंटक के शहद काकोई जोड़ नहीं है। मधुमक्खी पालन तथा शहद के विकास हेतु आवंटित 500 करोड़ रुपए में से भी पर्याप्त राशि छत्तीसगढ़ को मिलनी चाहिए।

सरकार इस लॉक डाउन से हुए नुकसान से पीड़ित किसानों के दर्द को समझे, यही उम्मीद की जा रही है।

(लेखक जैविक हर्बल कृषकऔर अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक हैं)

Updated : 17 May 2020 9:48 AM GMT
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