नई दिल्ली। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 के तीसरे दिन बिजली क्षेत्र को लेकर एक अहम् पहल सामने आयी। ‘पावर डिस्ट्रीब्यूशन के लिए मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाना’ विषय पर आधारित एक हाई-लेवल वेंडर डेवलपमेंट सेशन सफलतापूर्वक हुआ।
इस सत्र का आयोजन आरईसी लिमिटेड और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन ने मिलकर किया। जिसमें विद्युत मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटीज़, इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, ओईएम, वेंडर्स, सप्लायर्स और इंडस्ट्री एसोसिएशन्स के 150 से ज़्यादा सीनियर रिप्रेजेंटेटिव शामिल हुए। केपीएमजी ने सेशन के लिए नॉलेज पार्टनर के तौर पर काम किया।
सेशन की अध्यक्षता विद्युत मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी (डिस्ट्रीब्यूशन) शशांक मिश्रा ने की और इसकी शुरुआत आरईसी लिमिटेड के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स) टी.एस.सी. बोश के वेलकम रिमार्क्स से हुई, जिन्होंने बातचीत के लिए माहौल तैयार किया। IEEMA ने इंडस्ट्री के नज़रिए बताए, जिसके बाद SCADA इंडिजिनाइज़ेशन और पावर डिस्ट्रीब्यूशन में एआई/एमएल के इस्तेमाल सहित बेस्ट प्रैक्टिस पर लीडिंग डिस्कॉम से जानकारी ली गई।
सीनियर अधिकारियों प्रणव तायल (डायरेक्टर MoP), सौरव कुमार शाह (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर PFC), और प्रभात कुमार सिंह (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर REC) के साथ एक पैनल डिस्कशन में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भारत की तैयारी पर ज़ोर दिया गया।
डिस्कशन में कॉम्पैक्ट सबस्टेशन, GIS-बेस्ड फॉल्ट मैनेजमेंट के साथ प्लान्ड अंडरग्राउंड केबलिंग, SCADA–DMS–OMS इंटीग्रेशन, और RT-DAS जैसे प्रूवन DISCOM प्रैक्टिस को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया, साथ ही इंपोर्ट पर निर्भर मटीरियल में ज़रूरी कमियों को दूर किया गया। पैनल ने बड़े पैमाने पर रिलायबिलिटी और रेजिलिएंस पक्का करने के लिए स्टैंडर्ड, इंटरऑपरेबिलिटी और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
सेशन का समापन मिनिस्ट्री ऑफ़ पावर के डायरेक्टर (डिस्ट्रीब्यूशन) रवि धवन के सम्बोधन के साथ हुआ।
यह समिट सरकार, इंडस्ट्री और बिजली वितरण कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक बड़ा मंच बनकर उभरा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।