नई दिल्ली। नई दिल्ली में भारत की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड) ने देशव्यापी एकीकृत नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान का भव्य शुभारंभ किया। यह एक व्यापक एकीकृत राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है। यह लॉन्च कार्यक्रम इफको सदन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन इफको के माननीय अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने किया। इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने भी इस अवसर पर अपनी गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम को सुशोभित किया।
यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से आरंभ हुआ है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ के राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है। इस पहल को माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा का भी विशिष्ट समर्थन प्राप्त है।
भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके ग्रेन्युलर (20-10-10) की ऐतिहासिक अधिसूचना को भारत की कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया। उन्होंने आगे कहा कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब और ब्राजील में आगामी नैनो उर्वरक विनिर्माण संयंत्र ( जो जून 2026 तक चालू होने के लिए तैयार है) कृषि के लिए नैनोतकनीक में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रमाण हैं।
इस अवसर पर बोलते हुए इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि भारत आज उस ऐतिहासिक संगम पर खड़ा है, जहाँ परंपरा और तकनीक मिलती हैं। यही संगम भारतीय कृषि को एक नई दिशा दे रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समृद्धि गाँवों और किसानों से प्रवाहित होनी चाहिए और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तभी साकार हो सकता है जब किसान सशक्त और समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र, जिसके तहत सहकारी संस्थाएँ किसानों तक नई तकनीक और संसाधन पहुँचाने का माध्यम बन रही हैं, इस अभियान की भावना को पूर्णतः प्रतिबिंबित करता है और सही मायने में ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के सार को समाहित करता है।
दिलीप संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने स्मरण दिलाया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी ने व्यक्तिगत रूप से नैनो यूरिया और नैनो DAP को भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ और प्राकृतिक खेती की ओर एक मार्ग के रूप में समर्थन दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैनो यूरिया प्लस की एक 500 मिली की बोतल पारंपरिक यूरिया की तुलना में कहीं बेहतर पोषक तत्व दक्षता प्रदान करती है।
साथ ही मृदा स्वास्थ्य क्षरण, जल प्रदूषण और भारत की उर्वरक आयात निर्भरता की गंभीर चुनौतियों को भी संबोधित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नैनो उर्वरक कोई अस्थायी उपाय नहीं हैं। ये एक स्थायी, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधान हैं जो कम लागत, अधिक उत्पादकता, स्वस्थ मिट्टी और सार्थक पर्यावरण संरक्षण प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये उत्पाद सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करेंगे, जिसमें PACS और सहकारी नेटवर्क उनके वितरण और किसान शिक्षा में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने रेखांकित किया कि नैनो महा अभियान को एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन अभियान के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसके चार स्पष्ट उद्देश्य हैं: नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर का बड़े पैमाने पर प्रचार; किसानों को मुख्यतः फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही प्रयोग का प्रशिक्षण; पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना; और सहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित करना। उन्होंने माना कि कई किसान अभी भी नैनो उर्वरकों के सही उपयोग से अनजान हैं और भ्रम एवं हिचकिचाहट बनी हुई है। उन्होंने कहा, “हमें इसे गाँव-स्तर की जागरूकता अभियानों, हर PACS को मजबूत करने और क्षेत्र प्रदर्शनियों के माध्यम से दूर करना होगा। जब किसान परिणाम अपनी आँखों से देखेगा, तो विश्वास अपने आप आएगा।”
अपने संबोधन के समापन में संघाणी ने नैनो महा अभियान को एक सच्चे जन आंदोलन में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने पुष्टि की कि नैनो उर्वरक महज एक उत्पाद नहीं हैं; ये भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग हैं, हमारी मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प हैं और किसान आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी साधन हैं। उन्होंने कहा, “आइए सामूहिक रूप से संकल्प लें -कम लागत, ज़्यादा उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण, ‘हर खेत में नैनो फर्टिलाइजर’। यही नया भारत है। यही आत्मनिर्भर भारत है।”
इफको ने 218 लाख से अधिक बोतलें नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतलें नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की। इफको के नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों ने भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री दर्ज की। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं और नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जो देश के लिए रसद, ऊर्जा और आयात लागत में भारी बचत को दर्शाती हैं।
इफको नैनो उर्वरकों के बारे में
इफको की नैनो उर्वरक शृंखला, जिसमें नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक धरअमृत शामिल हैं, भारत के सटीक फसल पोषण उत्पादों का सबसे उन्नत पोर्टफोलियो है। इफको की स्वदेशी अनुसंधान टीमों द्वारा पूरी तरह से विकसित ये उत्पाद कोशिकीय स्तर पर अधिक दक्षता के साथ पोषक तत्व पहुँचाने के लिए नैनो तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे प्रति एकड़ आवश्यक उर्वरक की कुल मात्रा कम हो जाती है और किसानों की इनपुट लागत घटती है। इफको का अनोखा जैव-उत्तेजक धरअमृत (जो अमीनो एसिड, एल्गिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है), को इसके लॉन्च के बाद से कृषक समुदाय में जबरदस्त स्वीकृति मिली है।
इफको के बारे में
इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड) भारत की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था है, जो पूरी तरह सहकारी समितियों के स्वामित्व में है और भारतीय किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है। इफको ने वित्त वर्ष 2025-26 में 90.63 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उत्पादन किया, जिसमें 48.29 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 42.34 लाख मीट्रिक टन NPK/DAP/WSFs और विशेष उर्वरक शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के सर्वकालिक उच्चतम स्तर से अधिक होने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से, इफको भारत में कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है।