Top
Home > Magazine > आचार्य बालकृष्ण रामदेव के गॉडफादर

आचार्य बालकृष्ण रामदेव के गॉडफादर

आचार्य बालकृष्ण रामदेव के गॉडफादर
X

विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘फोर्ब्स’ ने आचार्य बालकृष्ण का नाम टॉप-50 अरबपतियों की सूची में शामिल किया है। उन्होंने पतंजलि प्रोडक्ट्स को जिस तरह कंज्यूमर्स की पसंद बनाया, उससे वह एक नए ‘बिजनेस गुरु’ बनकर उभरे हैं। ‘शून्य’ से लेकर ‘शिखर’ तक के उनके सफर पर एक चर्चा...अकसर कहा जाता है कि व्यक्ति की सफलता के पीछे किसी न किसी स्त्री की भूमिका होती है, लेकिन बाबा रामदेव इसके अपवाद हैं। उनकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति के पीछे ‘बिजनेस गुरु ’ कहे जाने वाले आचार्य बालकृष्ण का हाथ है। ‘आज पतंजलि’ सबसे तेज रफ्तार वाली आयुर्वेद कंपनी बनी है तो इसकी सबसे बड़ी वजह बालकृष्ण ही हैं। आज बाबा रामदेव और पतंजलि एक-दूसरे के पर्याय से लगते हैं, लेकिन सब जानते हैं कि बाबा ने तो सिर्फ योग की पुनर्प्रतिष्ठा की थी, पतंजलि को ब्रांड बनाया बालकृष्ण ने। इसके पीछे इन्हीं का मैनेजमेंट काम कर रहा है। यही वजह है कि ‘फोर्ब्स’ ने हाल ही में अरबपतियों की सूची में बालकृष्ण का नाम शामिल किया है लेकिन यहां तक का सफर तय करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। आयुर्वेद को एक अलग मुकाम पर पहुंचाने वाले आचार्य बालकृष्ण की फैन फॉलोविंग बाबा से भी ज्यादा है। आज रामदेव से ज्यादा वे विदेशों में जाने जाते हैं।मास्टर माइंडबालकृष्ण की पहचान एक आयुर्वेदाचार्य के रूप में रही है। मूलत: वे हैं ही आचार्य, वो तो बाजार ने उन्हें ‘बिजनेस गुरु ’ बना दिया। वे अपनी घरेलू दवाएं, औषधि और आयुर्वेद के नुस्खों से लाखों लोगों को स्वस्थ रखने में मदद करते आए हैं। बस इन्हीं चीजों का उन्होंने बाजारीकरण कर दिया है। आज आर्युवेद का कारोबार अरबों का हो गया है। इसके पीछे बालकृष्ण का मास्टर माइंड है। यह अच्छी बात है और बड़प्पन वाली भी कि करीब 5 हजार करोड़ के कारोबार की सफलता का श्रेय बाबा रामदेव स्वयं नहीं लेते, बल्कि बालकृष्ण को देते हैं, वहीं बालकृष्ण अपनी सफलता का श्रेय बाबा को देते हैं। बालकृष्ण फोर्ब्स की 100 अरबपतियों की सूची में 48 नंबर पर हैं। आज वे 2.5 बिलियन डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े अगर देखें तो पतंजलि की ग्रोथ रेट करीब 150 फीसदी बढ़ी है। बालकृष्ण ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि पतंजलि का फिलहाल कारोबार 5 हजार करोड़ है और हमारी कोशिश इसे दोगुना करने की है। जब बालकृष्ण ने बाबा रामदेव के साथ पतंजलि की शुरु आत की थी, उस समय उनके पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी। मित्रों से कुछ हजार पैसे लेकर उन्होंने पतंजलि को पंजीकृत कराया लेकिन आज 20 साल बाद पतंजलि के कारोबार ने उन्हें अरबपतियों की सूची में ला दिया। आचार्य केवल एक आयुर्वेद विशेषज्ञ और पतंजलि में बाबा के सहयोगी ही नहीं हैं, बल्कि एफएमसीजी की जितनी भी बड़ी कंपनियां बाजार में मौजूद हैं, उन्हें टक्कर देने की रणनीति भी रचते हैं। यह बात काबिले-गौर है कि पतंजलि पिछले कुछ सालों में सबसे ज्यादा ग्रोथ करने वाले एफएमसीजी प्रोडक्ट वाली कंपनी बन गई है।बिजनेस एक्सपर्टबालकृष्ण बहुत शिक्षित नहीं हैं, लेकिन अपने थोड़े से ज्ञान और परिश्रम से उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गजों को बाजार में टक्कर दी है। वैदिक शिक्षा, प्रकृति से प्यार और आयुर्वेद के नायाब नुस्खों से बालकृष्ण यहां तक पहुंचे हैं। दिव्या फॉर्मेसी से शुरु आत करने वाले बालकृष्ण ने आज पतंजलि के साथ विदेश की उड़ान भर ली है।चरक की विरासत के वाहकबालकृष्ण आयुर्वेद के साथ-साथ योग, संस्कृत भाषा एवं व्याकरण और वेदों के भी विद्वान हैं। उन्होंने सांख्य योग, संस्कृत भाषा एवं व्याकरण, पाणनिी अष्टाध्यायी, वेद, उपनिषद एवं भारतीय दर्शन की शिक्षा आचार्य श्री बलदेव जी से हरियाणा के एक गुरुकुल में ली। इसके बाद स्नातकोत्तर की शिक्षा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्राप्त कर आचार्य बने। उनका जन्म 4 अगस्त, 1972 को हरिद्वार में हुआ लेकिन उस समय कौन जानता था कि यह छोटा-सा बालक आने वाले समय में पूरे विश्व में आयुर्वेद के क्षेत्र में एक अद्भुत क्र ांति का वाहक बनेगा।बालकृष्ण ने कई साल हिमालय की पहाड़ियों में दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर शोध किया। बाद में इन्होंने आयुर्वेद और योग को बढ़ावा देने के लिए स्वामी रामदेव के साथ पतंजलि योग पीठ की स्थापना की और फिर आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दिव्य फार्मेसी एवं ब्रह्मकल्प चिकित्सालय की स्थापना भी की। बालकृष्ण के अब तक के जीवन का अधिकतम समय आयुर्वेद एवं जड़ी-बूटियों पर शोध करने में ही बीता है। आयुर्वेद के क्षेत्र में बालकृष्ण ने एक अद्भुत क्रांति का आगाज किया है, तभी आज देश के जन-जन तक आयुर्वेद पहुंच पाया है। उनका जन्म दिवस पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से जुड़े लोग ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाते हैं। बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद केंद्र के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। उन्होंने आयुर्वेदिक औषिधयों से सम्बंधित कई पुस्तकें भी लिखी हैं। वह नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़े हैं।शोध पत्र प्रकाशनबालकृष्ण ने शोध के क्षेत्र में भी अपना अहम योगदान दिया है। वह अपने सह लेखकों के साथ अब तक 41 शोध पत्र लिख चुके हैं। उनके सभी शोध पत्र योग, आयुर्वेद और दवाइयों से संबंधित हैं। बालकृष्ण ने विभिन्न विद्यालयों के परिसर में मिलने वाले खाद्य पदार्थों के संबंध में अध्ययन किया और इनकी विश्वसनीयता जानने के लिए प्रयोगशालाओं में इसका परीक्षण भी किया।पुरस्कार और सम्मानबालकृष्ण को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रशंसा पत्र, ढाल, प्रमाण पत्र व अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। कुछ उल्लेखनीय सम्मान ये हैं:

  • राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित (23 अक्टूबर, 2004)
  • नेपाल के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति में योग, आयुर्वेद, संस्कृति और हिमालयी जड़ी-बूटी के छिपे ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए सम्मान (अक्टूबर 2007)
  • योग और औषधीय पौधों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए श्री वीरंजनया फाउंडेशन द्वारा सुजाना श्री पुरस्कार (2012)

Updated : 1 Oct 2016 2:33 PM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top