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एम्स पर सवाल: जगह-जगह सिक्यूरिटी, नर्स और डॉक्टर तैनात, फिर मरीज़ कैसे खिड़की का शीशा तोड़कर कूद जाता है?

एम्स पर सवाल: जगह-जगह सिक्यूरिटी, नर्स और डॉक्टर तैनात, फिर मरीज़ कैसे खिड़की का शीशा तोड़कर कूद जाता है?
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उदय सर्वोदय

नई दिल्ली: कोरोना वायरस से संक्रमित दिल्ली के पत्रकार तरुण सिसोदिया के आत्महत्या मामले में एम्स पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, जिनसे बच रहा है अस्पताल।

एम्स प्रशासन कीतरफ से तरुण की मौत को लेकर बयान जारी किया गया कि युवा पत्रकारमानसिक समस्या से गुजर रहे थे और अस्पतालकर्मियों ने उन्हें कूदने से रोकने कीकोशिश की थी। बावजूद इसके सवाल बने हुए हैं,जिसके जवाब के लिए एम्स और एम्स ट्रॉमा सेंटरप्रशासन से लगातार प्रयास किया गया, लेकिन उनकी चुप्पी बनी हुई है।

बता दें कि भजनपुरा निवासीतरुण सिसोदिया (37) को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल परकोविड-19 वार्ड में भर्ती करायागया था। उसने सोमवार करीब दो बजेचौथी मंजिल की छत से नीचे छलांग लगा दी थी। इस पर एम्स प्रशासन संदेह के घेरे मे है।

एम्स सूत्र भीबताते हैं कि कहीं न कहीं लापरवाही हुई है, यही वजह है कि परिवार और रिश्तेदार इस मामले में जांच कीमांग कर रहे हैं। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक कमिटीबनाई है और जांच रिपोर्ट 48 घंटे के भीतरदेने को कहा गया है।

सोशल मीडिया पर भी लोग एम्स पर सवाल उठा रहे हैं। संजय अग्रवालनाम के एक यूजर ने कहा कि ‘जगह-जगहसेक्यूरिटी, स्टाफ नर्स और दुनिया भरका स्टाफ, फिर मरीज़ कैसे पहली मंज़िल से भागकर 4 मंज़िल पर आकर शीशा तोड़कर कूद जाता है। यह तोआत्महत्या कम हत्या साफ लग रही है?

एम्स प्रशासन कीतरफ से बयान जारी कर बताया गया कि कोविड की वजह से तरुण को एम्स ट्रॉमा सेंटर में 24 जून को एडमिट किया गया था। वह फिलहाल टीसी-1 आईसीयू में था, जो पहली मंजिल पर है। तरुण की रिकवरी बेहतर थीऔर रूम एयर में सांस ले पा रहे थे। इसलिए सोमवार को तरुण को आईसीयू से वॉर्ड मेंशिफ्ट करने की योजना थी।

एम्स ने अपनेबयान में उनके ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी का भी जिक्र किया है और यह भी बताने कीकोशिश की है कि इसको लेकर न्यूरो और सायकायट्री के डॉक्टर को दिखाया गया था।

उनके फैमिलीमेंबर को लगातार तरुण की सेहत को लेकर जानकारी दी जा रही थी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह पूरी तरह से सच नहीं है,क्योंकि तरुण के परिवार के लोग उनके पत्रकार दोस्तों से फोन करके अपडेट लेते थे। एक दिनऑक्सीजन पाइप को लेकर दिक्कत आई थी तो उनके दोस्तों ने इसकी सूचना एम्स प्रशासन कोदी थी, तब जाकर उसे ठीक किया गयाथा।

सूत्रों का कहनाहै कि अगर अस्पताल की तरफ से जानकारी दी जा रही थी तो परिवार के लोग अस्पताल केबजाय दूसरे को फोन क्यों करते?

एम्स ने अपनेबयान में आगे लिखा कि दोपहर को तरुण आईसीयू सेनिकलकर भागे, बताया गया है किउनके पीछे हॉस्पिटल अटेंडेंट भी भागे। तरुण चौथी मंजिल पर पहुंच गए, वहां विंडो तोड़कर छलांग लगा दी, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में एडमिट किया गया,लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी बचा नहीं पाए।

हालांकि एम्स प्रशासन कीयह यह थ्योरी थोड़ी अटपटी लग रही है, क्योंकि एक मरीज, जो पिछले कईदिनों से कोविड संक्रमण की वजह से आईसीयू में एडमिट है, जिसे सांस लेने में दिक्कत है, वह पहली मंजिल से चौथी मंजिल तक भागकर पहुंच गया औरहॉस्पिटल अटेंडेंट उस तक पहुंच नहीं पाया। कहीं न कहीं सिक्योरिटी स्तर पर कमी दिख रही है।

सवाल कई हैं, जवाब फिलहाल कोई नहीं है।

Updated : 7 July 2020 5:17 AM GMT
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