बिहार सपा अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिया इस्तीफा, अखिलेश पर लगाया उपेक्षा का आरोप

रिपोर्ट ¦ संतोष कुमार

मधुबनी (बिहार):  झंझारपुर लोकसभा से  पूर्व सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बिहार समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है । इसके साथ ही बिहार में  सियासी सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है । इस्तीफे के बाद देवेन्द्र प्रसाद यादव का  झंझारपुर से  पहली बार  निर्दलीय चुनाव लड़ने का कयास लगाया जा रहा है।

देवेंद्र प्रसाद यादव झंझारपुर लोकसभा से 5 बार सांसद रह चुके हैं, और देवगौड़ा सरकार में केंद्रीय खाद आपूर्ति मंत्री भी रह चुके हैं। बिहार में वे  स्वच्छ छवि के नेता माने जाते हैं। देवेंद्र ने बिहार विधानसभा चुनाव 2015 के दौरान  समाजवादी पार्टी का हाथ थाम था। पार्टी में शामिल होते ही  प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी  इनको दी गई थी। राज्य में उनके कार्य को देखते हुए समर्थकों को उम्मीद थी कि महागठबंधन में सपा भी शामिल होगी लेकिन ऐसा न होने से समर्थकों को निराशा हाथ लगी। जिससे उनके समर्थकों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है।

देवेंद्र यादव के पुत्र व समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार यादव ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए फेसबुक पर एक पत्र जारी किया है। इसमें इस्तीफे देने के पांच कारण गिनाए हैं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के द्वारा बिहार  समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और समर्थकों के प्रति अनदेखी और अपमानित करने का आरोप लगाया है ।

ये रहे पांच कारण

  1. समाजवादी पार्टी की बिहार इकाई के प्रति राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का उदासीनता अर्थात किसी भी कार्यक्रम में कभी भी भाग न लेना ।
  2. राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा  पार्टी के समर्थकों  को कमतर आंकना और उनकी अनदेखी करना। 27 अगस्त 2018 को गांधी मैदान पटना में हुए “भाजपा भगाओ – देश बचाओ”  रैली में बिहार के सभी जिलों से  आए हजारों समाजवादी समर्थकों को धन्यवाद देने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला ।
  3. राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार में कई बार आए परंतु कार्यकर्ताओं से मिलकर उनका मनोबल बढ़ाने के लिए 1 मिनट के लिए भी पार्टी कार्यालय नहीं आए ।
  4. पार्टी पदाधिकारियों को निराश करना अर्थात विगत एक माह में दो बार 72 सदस्यों वाली पदाधिकारी का समूह एवं चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी उम्मीदवार लखनऊ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने गए परंतु 3 दिनों तक के लंबे इंतजार के बावजूद  भी एक  मिनट का भी   समय नहीं दिया ।
  5. बिहार में सपा को महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनाया गया साथ ही चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दिया गया जिसके कारण पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश है।

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