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गौरैया संरक्षण को देश का हर नागरिक आगे आए: डॉ. अरविन्द वर्मा

भारत में गौरैया की संख्या लगातार घटती ही जा रही है। घर आंगन में फुदकने वाली गौरैया आज विलुप्ति के कगार पर है।

गौरैया संरक्षण को देश का हर नागरिक आगे आए: डॉ. अरविन्द वर्मा
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एसके वर्मा

खगड़िया: भारत में गौरैया की संख्या लगातार घटती ही जा रही है। घर आंगन में फुदकने वाली गौरैया आज विलुप्ति के कगार पर है। घरों में चहकने वाली गौरैया अब दिखाई नहीं देती है। कीटनाशकों, पेड़ों के कटान के कारण लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई गौरैया। घरों के आंगन में अब नहीं फुदक रही हैं। गौरैया के चहकने की आवाजें घरों में नहीं सुनाई दे रही हैं।


उक्त बातें, बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ अरविन्द वर्मा ने विश्व गोरैया दिवस के अवसर पर मीडिया से कही। आगे उन्होंने कहा, 'मन को गौरैया का कलरव भाता रहे, इसके लिए देश के हर नागरिक को आगे आना होगा और इसके लिए पहल करना होगा। कच्चे घरों पर पड़ने वाले छप्पर की जगह पर पक्के घर बन गये, जिससे गौरैया के घोंसले छिन गये।'

उन्होंने कहा कि फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव, मोबाइल टावरों के रेडिएशन, पेड़ पौधों के अवैध कटान के चलते गौरैया के प्राकृतिक घरौंदे नष्ट हो गये हैं। गांवों में लकड़ी से बने घरौंदे बनाकर ग्रामीणों को गौरैया का संरक्षण किया जा सकता है। डॉ वर्मा ने कहा मार्च से जून तक होने वाले प्रजनन के सीजन में घोंसले में गौरैया 3 से 5 अंडे देती है। एक पखवाडे़ में अंडों से चूजे निकलते हैं।

Updated : 20 March 2021 10:29 AM GMT
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