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हकीकत बयानी है ‘इनकी कार उसका फ्लैट’

हकीकत बयानी है ‘इनकी कार उसका फ्लैट’
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पुस्तक समीक्षा नित्यानंद तिवारीअगर ऐसा कहानी संग्रह हाथ लग जाए, जिसमें साधारण भाषा में रोजमर्रे की गुदगुदाने वाली बातें कहानी के रूप में प्रस्तुत की गई हों तो सोचिये कैसा लगेगा. ऐसा ही एक कहानी संग्रह ‘इनकी कार उसका फ्लैट’ वी एल मीडिया सोलुशंस द्वारा प्रकाशित हुआ है. 154 पृष्ठों में सिमटी दस कहानियां पढ़ने में सहज, मनोरंजक होने के साथ ही साथ समाज के मार्मिक उतार-चढ़ावों से साक्षात्कार कराती हैं. लेखिका (कुमकुम) ने कहानी के पात्रों को अपने बीच से चुना है, जिनसे हम रोज मिलते हैं लेकिन शायद ही उन बातों में रुचि दर्शाते हैं. लेखिका का यह अंदाज कहानियों को एक नई खुशबू देता है.‘इनकी कार उसका फ्लैट’ संग्रह की पहली कहानी है, जिसमें एक उच्चवर्गीय व्यक्ति और एक निम्नवर्गीय व्यक्ति के तुलनात्मक मनोभावों का विश्लेषण किया गया है बहुत ही आसान तरीके से, सहज भाषा में. कहानी में धनी परिवार से आयी पत्नी और गरीब परिवार के पति के नियमित वाणी संघर्ष एवं विचार भिन्नता को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करने में लेखिका सफल रही है. संग्रह की दूसरी कहानी है ‘प्रायश्चित’, जिसमें लेखिका ने रिश्तों को बखूबी दर्शाया है. तीसरी कहानी ‘एक चुटकी हल्दी’ एक घरेलू नौकरानी पर केंद्रित है. इस कहानी में नारी वातार्लाप और उसके व्यंग्यात्मक पहलुओं को लेखिका ने दर्शाया है- सरला जी का ये मानना था कि इन मेहनतकश लोगों से मोलभाव नहीं करना चाहिए. आखिर रिक्शे वाले, सब्जी वाले से मोलभाव करके हम चार-आठ रुपये की ही बचत कर पाते हैं, पर बड़े शोरूम में तो हम लोग कोई मोल भाव नहीं करते बल्कि वहां पूरा का पूरा दाम चुकाने में अपनी शान समझते हैं. कहानी में मनोरंजक पलों को भी कैद किया गया है- सरलापति पीने के साथ संगीत सुनने के बड़े शौकीन थे, पर इसमें भी उन्होंने कुछ नियम बना रखे थे जैसे व्हिस्की पीते समय वे फ्रेंकसिनाट्रा को सुनते, रम पीते समय जगजीत सिंह की गजलें सुनते और बीयर की चुस्की वे रफी जनाब के गानों के साथ लेते. जाहिर है कि बंगले के अंदर से आती संगीत लहरी से हम जैसे पड़ोसी एकदम ठीक-ठीक बता सकते थे कि आज कौन सी बोतल खुली है.संग्रह की चौथी कहानी ‘नाईटी’ पुस्तक की आत्मा है. यह कहानी सबसे लंबी है और कई भागों में प्रस्तुत है. इसमें आम जीवन की रोज की बातें, पार्टी, चुगली, नौकरी, दिखावा, रिश्ते, पैसा आदि के वास्तविक चेहरे दिखाने की कोशिश की है लेखिका ने. नारी सौंदर्य की चर्चा देखिए- मंहगी साड़ियों और जेवरों से लदी-फदी महिलाएं कुछ तो वाकई खूबसूरत लग रही थीं और कुछ अपने को वाकई खूबसूरत समझ रही थीं. इस पार्टी के एक महीने पहले से ही महिलाओं ने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी. बाजारों के कई चक्कर लगे, ब्यूटी पार्लर के कई चक्कर लगे. हर महिला को अपनी शॉपिंग और मेकअप पर भरोसा था कि ये दोनों उसे रौनक-ए-महफिल बना ही देंगे.’कहानी का एक और संवाद उल्लेखनीय है- घंटी बजते ही अंदर से जोर से कुत्तों के भौंकने की आवाज आई. नीता सहम गई. पहले सुनंदा ने कुत्तों को डांटकर चुप कराया और आदेश देते हुए ‘गो गो’ कहा फिर दरवाजा खोलकर नीता को ‘कम कम’ कहा. दोनों गले मिलीं. उसके बाद ही सुनंदा का रिकॉर्ड चालू हो गया- ‘सर्विस में थे तो इतने सारे सर्वेंट होते थे, सारा काम हाथोंहाथ होता था, पर यहां तो हर काम खुद सामने खड़े होकर कराना होता है, बहुत थक जाती हूं.’ यह कहकर उन्होंने ड्राइंग रूम की एक घंटी दबा दी और हंसकर बोली- ‘ये घंटी तुम्हारे भाई साहब को नीचे बुलाने के लिए है, वे ऊपर के कमरे में अपने कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं. अब वो क्या है कि घंटी इसलिए कि कौन चिल्लाकर अपने गले को कष्ट दे.’ नीता ने देखा कि दोनों कुत्ते उनके अलग-अलग सोफे पर विराजमान हैं. सुनंदा दोनों कुत्तों को बड़े प्यार से सोफे से हटाती हुई बोली- ‘चलो पप्पू राजा और टिंकू राजा सोफे से उतरो. देखो बुआजी आयी हैं, उनके लिए ये जगह खाली करो, चलो चलो ममा का कहना मानो.’ कुत्तों ने तुरंत कहना माना और सोफे से उतर गए. नीता को हंसी आ गई कि वो बुआ भी बनी तो किसकी!पांचवीं कहानी ‘बकरी बाई’ एक गरीब महिला पर आधारित है. कहानी में महिला के बकरी चराने की दास्तान के बहाने लेखिका ने गरीबी, उत्साह, मेहनत एवं संतोष को उकेरा है. कहानी में गरीबी और व्यंग्य से भरा एक वाक्य आपके सामने रखता हूं- उसने टाइट फिट जींस पहनी थी, ऊपर कुर्ती और एक फटी साड़ी का टुकड़ा दुपट्टे की तरह ले रखा था. पहले तो हम सभी खूब हंसे, हंसने में उसने भी खुलकर हमारा साथ दिया. फिर बोली- ‘जंगल में बकरियों के पीछे दौड़ने में झाड़ियों में उलझ के साड़ी फट जाती है. हमारा बेटा बोला ‘अम्मा, हमारी जींस पहन जाओ, साड़ी की बचत होगी और पैर में ठंड भी नहीं लगेगी’ हमको उसकी बात जम गई. हमने जींस पहन ली. आज सब कुछ बहुत आसान लगा.’ ‘तुमको इस ड्रेस में देख के रास्ते के लोग तो हंस रहे होंगे?’ एक जना हम लोग की ओर से पूछ बैठा. वो बोली- ‘हां हां खूब हंस रहे थे, तो हम कौन कम हैं, हम भी उनको देख हंसने लग पड़े थे. हम अपने मन में बोले कि हंस लो बेटा खूब हंस लो. तुम तो न हमारी परेशानी समझ सकते हो, न ही दूर कर सकते हो. बस हंस सकते हो तो हंसो.’‘प्यारा नंदोई’, ‘वर्मा जी की बीवी’, ‘सोच अपनी अपनी’, ‘अल्बम’ एवं ‘मिस्टर मिसेस चतुरानी’ संग्रह की अन्य कहानियां हैं. सभी कहानियां पाठक को मनोरंजित करते हुए गंभीर सामाजिक एवं व्यक्तिगत मुद्दों के बीच यात्रा कराती हैं. पाठक इन छोटी-छोटी कहानियों को पढ़ते समय बोझिल महसूस नहीं करता.लेखिका की यह पहली पुस्तक है. कहीं-कहीं कहानी में भावों की पुनरावृत्ति रोकने में लेखिका सफल नहीं हो सकी है और शब्दों की अधिकता क्षणिक उबाऊ बनाती है परंतु विषय एवं मनोरंजन के पुट अगले ही पल इस उबाऊपन पर विजय प्राप्त कर लेते हैं.पुस्तक : इनकी कार उसका फ्लैट (कहानी संग्रह)लेखिका : कुमकुमप्रकाशक : वी एल मीडिया सोलुशंस, नई दिल्लीमूल्य : 200 रु

Updated : 2 Oct 2018 7:06 AM GMT
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