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लड़के तुम कितने निर्लज्ज होते जा रहे हो!

हम उन तमाम कुंवारे नौजवानों से अपील करते हैं कि वो आगे आकर इस कुरीति के खिलाफ खड़े हों। बिना दहेज़ और कैश के शादी करने का प्रण लें।

लड़के तुम कितने निर्लज्ज होते जा रहे हो!
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हुसैन ताबिश

कल से सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक दुल्हन को ठेले पर अपने दहेज़ का सामान खींचते दिखाया गया है। इसे दहेज़ के विरोध की एक प्रतीकात्मक तस्वीर बताई जा रही है।

भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में देखे तो यह एक साझी समस्या है।

फिलहाल यहां हम चर्चा एक लड़का देखा-देखी की करेंगे। बात यही कोई दीवाली के आसपास की है। मेरे एक मित्र हैं, राकेश रंजन। बिहार सरकार के क्लास वन के मुलाजिम हैं।

एक दिन उनका फोन आया कि समस्तीपुर में एक लड़का देखने उनको आना है। मैं घर पर ही था, तो उनका आग्रह था कि मैं भी उनके साथ लड़का देखने चलूं। मैंने हामी भर दी। तीन भाइयों में उनकी इकलौती बहन कंचन का लड़का देखा जाना था।

तयशुदा दिन मैं अपने घर से 40 किमी दूर लड़के वाले के घर के पास पहुंच गया था। चूंकि मैं उन लोगों के आने के घंटा-डेढ़ घंटा भर पहले ही वहां पहुंच चुका था, इसलिए लड़के वाले के घर जाने के बजाए हम आस-पास के लोगों से सीबीआई सीरियल के एसीपी प्रदुम्न की तरह लड़के वाले का टोह लेने लगे!

घंटे भर में अलग-अलग ठीहे से एक पान, दो सिगरेट, एक खजूर खाकर और वहीं पास के दो बाइक के एजेंसियों में बाइक खरीदने की फर्जी इच्छा जताकर हम लड़के और उसके परिवार के बारे में काफी जानकारी हासिल कर चुके थे! ये सारी दुकानें और एजेंसी लड़के के घर के आस पास ही थी।

घंटे भर बाद लड़की वाले को आता देखकर मैं भी लड़के वाले के घर पहुंच गया।

लड़के वाले का घर एक कस्बा में था। प्रखंड मुख्यालयों के पास छोटे-मोटे बाज़ार जैसे इलाक़े को गांव में चौक कहा जाता है। हमने इसे कस्बा मान लिया था।

लड़के वाले का घर यही कोई 15 फीट चौड़ा और 40 फीट लंबे स्पेस में बना होगा। मकान दो मंजिला था और दिखने में किसी खटारा बस जैसा था।

राकेश रंजन कुल तीन लोग थे। इधर से एक मैं था। मेहमानों के आने के बाद लड़के के बड़े भाई सुमित ने सभी का स्वागत किया। फिर एक बच्ची ने आकर सभी को पानी दिया।

कुछ देर बाद हम सभी को नाश्ता कराया गया। नाश्ते का स्वरूप देखकर हमें लड़के वाले के सामाजिक और आर्थिक हैसियत का अंदाज़ा लग चुका था!

बात-चीत करते हुए भोजन का समय भी हो गया था लेकिन सीतामढ़ी यानी 150 किमी दूर से आने वाले मेहमानों को खाने के लिए मेज़बान ने नहीं पूछा!

फिर लड़के बलवंत को बुलाया गया। वह यही कोई 35 साल का जवान था! सर के बाल उजड़ चुके थे लेकिन चेहरे पर तेज बरकरार था! सर के बालों की भरपाई चेहरों को चमका कर करने की सफल कोशिश की गई थी!

कद 5.6", रंग गेहुंआ, वजन 70 किग्रा रहा होगा। उसने इंजीनियरिंग की किसी शाखा में पीएचडी कर रखी थी। पड़ोसियों के मुताबिक कोरोना में लड़के की नौकरी जा चुकी थी, लेकिन लड़के के अनुसार वो वर्क फ्रॉम होम में चल रहा था।

मार्केट में अच्छे लड़कों की घोर कमी को देखते हुए हमें बलवंत पसंद था।

अब लड़की देखने के लिए लड़के वाले को आमन्त्रित किया जा रहा था।

" हमारी लड़की बीएड है और अभी जियोग्राफी में पीएचडी कर रही है। बहुत ही संस्कारी, सुशील और घरेलू लड़की है। आपके घर में बिल्कुल फिट हो जाएगी। रंग-रूप तो हम लोगों का देख ही रहे हैं। बाकी आप खुद आकर देखिएगा। कहीं से कोई काटने वाली बात नहीं है।" हर लड़की के बाप की तरह कंचन के पिता मास्टर साहेब ने भी उम्मीद भरे और आजजी के भाव से अपनी बेटी के गुण बता दिए थे।

हालांकि लड़की देखने का न्योता स्वीकार करने से पहले ही लड़के के भाई ने इस प्रश्न को बार-बार दोहराया के पहले ये तय कर लें कि शादी कैसे करेंगे?

" जैसे आप कहेंगे हम सब में तैयार हैं"। हमारी तरफ से ये तीर छोड़ा गया।

माहौल में कुछ देर के लिए सन्नाटा था।

फिर लड़के के भाई ने अपनी उंगली में उंगली फंसाते और निगाह नीची किए हुए कहा, "हमारी 50 लाख मांग है।"

माहौल में एक बार फिर लंबी खामोशी छा गई थी।

इधर ये रकम सुनते ही हमारी आँखें फटी रह गईं! हमारी ऐसी हालत हुई कि लड़की पक्ष के चेहरे का हाव - भाव भी मैं नहीं पढ़ पाया!

बहुत हील-हुज्जत के बाद हम लोगों ने 15 लाख तक अपनी अंतिम बोली लगा दी थी। इस पर तमतमाए लड़के वाले ने कहा, " लगता है आप लोग बर्तुहार करने नहीं मस्करी करने आए हैं। इतना पैसा तो हम डीजे वाले को दे देते हैं। और 10-20 लाख तो भोज-भात में खर्च कर देते हैं।"

"अभिए हमरे पाटीदार में एक लड़के का लगन हुआ है, उसे 50 लाख कैश मिला है। अगर हम उससे एक रुपया भी कम लेंगे तो अपने गोतिये में हमरा नाक कट जाएगा।" लड़के वाले ने पैसे कम न करने का एक ठोस कारण बताया।

लेकिन हमारा दिमाग तो अभी भी 15 लाख के डीजे पर अटका हुआ था! हमारे खानदान में किसी भी शादी में आजतक डीजे नहीं बजा था, सो हम इसके रेट से परिचित नहीं थे। फिर भी मैंने सोचा 15 लाख का डीजे तो सिर्फ लालू प्रसाद ही अपनी बेटी की शादी में बजवाते होंगे! कोई आम आदमी इतना पैसा डीजे पर खर्च क्यूं करेगा?

रंजन एक ईमानदार लोक सेवक हैं। पिता जी पेंशनभोगी हैं। कमाई और पेंशन से बस परिवार चल जाता है। निम्न मध्यवर्ग से मध्यमवर्ग में ट्रांसफार्म होने में ही कमाई का अधिकतर हिस्सा खर्च हो जाता है।

इधर बात न बनता देख रंजन ने कहा, " चला मर्दे इतना पैसा में हम नहीं सकेंगे, आऊर अगर 50 लाख जब आदमी देबे करेगा तो कोई रोजगार वाला या पीसीएस लैका मिल जाएगा।"

मास्टर साहब ने भी अपनी खुन्नस निकालते हुए कहा, " ई बुढ़वा ऐसने कुंवारे मरेगा। के देगा हो एकरा 50 लाख?"

हम लोग रिश्ता जोड़ने गए थे, लेकिन लड़का बाज़ार के सामान की तरह बिकने को तैयार था। माल महंगा होने के कारण हम सभी वापस लौट गए!

लेकिन ये समस्या सिर्फ राकेश रंजन की अकेले की नहीं है। पूरा बिहार इस समस्या से पीड़ित है। हिन्दू, मुसलमान, अमीर, गरीब सब दहेज़ की चक्की में पिस रहे हैं। बिहार सरकार ने दहेज़ के खिलाफ सख्त कानून बनाया है, लेकिन कानून बनाने वाले और इसे लागू करने वाले सभी धड़ल्ले से खुलेआम दहेज़ ले और दे रहे हैं। कोई किसी का घंटा नहीं कुछ बिगाड़ पाता है! जब पूरा समाज ही नैतिक रूप से भ्रष्ट हो तो कोई कानून किसी का क्या उखाड़ लेगा!

अपनी शादी में रंजन ने भी कैश लिया था। कितना लिया मुझे नहीं पता।

मैंने जब से होश संभाला है, दहेज़ लेने वाले लोगों की शादी में नहीं जाता हूं। रंजन की शादी का भी मैंने बहिष्कार किया था। वो भी न आने का कारण बताकर।

लड़कों और लड़के वालों से मेरा वो वर्षों पुराना सवाल आज भी बरकरार और अनुत्तरित है।

1. क्या शादी सिर्फ अकेले लड़की की हो रही है, तुम्हारी नहीं हो रही है। अगर तुम्हारी भी हो रही है तो फिर लड़की वाले तुम्हे पैसा किस बात का दें?

2. क्या लड़की वाले के पास कोई गड़ा हुआ खज़ाना है, जो वो लड़की की शादी का भी खर्च वहन करेगा और लड़के वाले को कैश और दहेज़ भी देगा?

3. क्या तुम्हें शर्म नहीं आती है। लड़की वाले का दिया पैसा, उसका पहना हुआ कपड़ा और उसकी दी हुई गाड़ी से सेठ बनकर उसके घर जाते हो। लड़की वाले तुम्हे देने और खरीद लेने के बाद भी सेवकों जैसा व्यवहार करते हैं, तुम्हारी खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

4. क्या किसी ने लड़की पैदा करके कोई गलती की है। कोई अपराध किया है। अगर मान लो ये गलती ही है और तुम्हारे नाना ये गलती न की होती तो सोचो फिर तुम जैसा लालची और गिरा हुआ आदमी इस धरती पर कैसे आता। इस संसार का सिस्टम कैसे चलता?

5. सोचो ये हाल तब है जब इस देश में 1000 पुरुषों पर सिर्फ 928 लड़कियां यां हैं। यानी विवाह की इच्छा रखने वाले 73 पुरुषों की शादी इसलिए नहीं हो पाती है क्यूंकि उसके हिस्से की कोई लड़की ही नहीं बचती है। जब तुम इस तरह से नरक मचाओगे तो आने वाले दस-बीस सालों में और क्या होगा। लोग दहेज़ के डर से गर्भ में ही लड़कियों को मार देंगे। आज भी मार रहे हैं। कल और मारेंगे।

6. और ये तुम्हारी बड़ी-बड़ी डिग्रियां, ऊंचे ओहदे, रुपया, पैसा, शोहरत, रुतबा, ठाठ और सबसे ज़्यादा वो तुम्हारे संस्कार जिसकी तुम दुहाई देते कभी नहीं थकते हो, ये सब लड़की वालों से पैसे की भीख मांगते समय कहां चला जाता है? तुम्हारा वो तथाकथित आत्मसम्मान कहां गुम हो जाता है?

हम उन तमाम कुंवारे नौजवानों से अपील करते हैं कि वो आगे आकर इस कुरीति के खिलाफ खड़े हों। बिना दहेज़ और कैश के शादी करने का प्रण लें। यार, दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोस की ऐसी शादियों का बहिष्कार करें। ये दुनिया जितना लड़कों और पुरुषों का है उतना ही लड़कियों और महिलाओं का भी है। आइए इस समाज को सभी के रहने लायक बनाने का हम सभी प्रण लेते हैं।

(नोट - निजता की रक्षा के कारण घटना के पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं।)

Updated : 10 Feb 2021 4:25 PM GMT
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Uday Sarvodaya

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