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विषय संबंधित ही नहीं हर प्रकार का ज्ञान है नई शिक्षा नीति में

केंद्र सरकार ने नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। अब आर्ट्स, कॉमर्स और विज्ञान विषय को समान रूप से महत्व दिया जाएगा।

विषय संबंधित ही नहीं हर प्रकार का ज्ञान है नई शिक्षा नीति में
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अलंकार रस्तोगी

नेल्सन मंडेला ने कहा था कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसे आप दुनिया को बदलने के लिए उपयोग कर सकते हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमी को बदलने की कोशिश कई वर्षों से नहीं हुई। इसी उद्देश्य से भारत में कई वर्षो से चली आ रही शिक्षा नीति को हाल ही में सम्पूर्ण रूप से बदल दिया गया।

सबसे पहले शिक्षा नीति इंदिरा गाँधी जी ने सन 1968 में शुरू किया था। उसके बाद राजीव गाँधी ने भी इसमें ज़रूरी बदलाव किये थे। 1992 में प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव ने भी इसमें ज़रूरी बदलाव किये थे। कहते हैं जब पानी बहुत समय तक एक ही जगह पर जमा रहता है तो उसमें काई जम जाती है।

पुरानी शिक्षा नीति से शिक्षा और देश की उन्नति कहीं न कहीं रुक सी गयी थी। केंद्र सरकार ने नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। विद्यालय में आर्ट्स, कॉमर्स और विज्ञान विषय को समान रूप से महत्व दिया जाएगा। विद्यार्थी अब अपने हिसाब से सिलेबस का चुनाव कर सकते हैं। मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय का नाम परिवर्तन करके अब 'शिक्षा मंत्रालय' कर दिया गया है।

स्कूल में 10 +2 के फॉर्मेट को समाप्त कर उसके जगह पर 5+ 3+ 3 +4 फॉर्मेट को आरम्भ किया जाएगा। फाउंडेशन स्टेज पांच साल का होगा। प्रिपरेटरी स्टेज के अंतर्गत अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा। नयी शिक्षा नीति के अनुसार एक्टिविटी आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यह स्टेज तीन साल का होगा। मिडिल स्टेज में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई होगी। इन कक्षाओं में विभिन्न विषयो की शिक्षा होगी और कक्षा छह से वोकेशनल कोर्स का आरम्भ होगा। सेकेंडरी स्टेज में कक्षा नौ से बारह तक की पढ़ाई होगी और यहाँ पर बच्चे अपने योग्यता और पसंद के अनुसार विषयो का चयन कर सकते हैं।

नयी शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा पांच तक बच्चे अपनी मातृभाषा, स्थानीय भाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई कर सकते है। कक्षा पांचवी के बाद अगर बच्चे मातृभाषा में पढ़ना चाहते हैं, तो उसे भी स्वीकार किया गया है। अंग्रेजी भाषा में पढ़ने का विकल्प भी साथ में रहेगा। ऐसा माना जाता है कि बच्चे अगर मातृभाषा में पढ़ेंगे तो वे और बेहतर तरीके से सीख और समझ पाएँगे। संगीत, चित्रकारी जैसे पाठ्यक्रम को भी स्कूल सिलेबस में शामिल किया गया है।

बच्चे सिर्फ विषय संबंधित ही नहीं बल्कि हर प्रकार का ज्ञान नयी शिक्षा नीति द्वारा प्राप्त करेंगे। दसवीं और बारहवीं के पढ़ाई में काफी बदलाव किये गए है। स्टूडेंट्स अपने पसंद के मुताबिक कोई भी विकल्प का चयन कर सकते है। पहले की तुलना में बोर्ड परीक्षाओ को काफी आसान बना दिया गया। इस प्रकार की परीक्षाएँ वर्ष में दो बार आयोजित की जायेगी। विद्यार्थी इनमे से किसी एक का चुनाव कर सकते है। बोर्ड परीक्षाओ के लिए एक विशेष प्रैक्टिकल माड्यूल तैयार किये जाएँगे।

उच्च शिक्षा में भी काफी परिवर्तन किये गए है। स्नातक की डिग्री अब चार वर्ष निर्धारित की गयी है। डिग्री कोर्स को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट में बदला गया है। अगर एक वर्ष के बाद विद्यार्थी अपनी पढ़ाई छोड़ता है, तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा। अगर दो वर्ष के बाद एडवांस्ड डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। तीन और चार वर्ष के पश्चात उसे डिग्री सर्टिफिकेट प्राप्त होगा। पूर्व शिक्षा नीति के अनुसार विद्यार्थी अगर बीच में कोर्स छोड़ देता था, तब वह ड्राप आउट कहलाता था। इस हालत में विद्यार्थी को कोई डिग्री प्राप्त नहीं होती थी।

मगर अब ऐसा नहीं होगा। विद्यार्थी तीन साल के बाद बैचलर डिग्री प्राप्त करेंगे ओर चार साल के पश्चात शोध के साथ बैचलर डिग्री का सम्पूर्ण कोर्स पूरा करेंगे। नयी शिक्षा नीति के अनुसार राष्ट्र भाषा, कला और संस्कृति को पहले से अधिक विद्यार्थियों में प्रोत्साहित किया जाएगा। एमफिल की डिग्री समाप्त कर दी गयी है। अगर ग्रेजुएशन का कोर्स करते समय, किसी भी वजह से विद्यार्थी को बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़े तो क्रेडिट ट्रांसफर के तहत फिर से डिग्री कोर्स पूरा करने का अवसर मिलेगा।

पहले सारी यूनिवर्सिटी के अलग-अलग नियम होते थे, लेकिन अभी नयी शिक्षा नीति के मुताबिक सभी के नियम एक जैसे होंगे। नयी शिक्षा नीति में लचीलापन है और विद्यार्थी, अभिभावकों देश की उन्नति को ध्यान में रखकर बनाई गयी है। भारत में शोध और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन ( NRF ) की स्थापना की जायेगी। नयी शिक्षा नीति के मुताबिक डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। एकेडमी बैंक ऑफ़ क्रेडिट का निर्माण होगा जिसमे विद्यार्थियों का प्रदर्शन को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में रखा जाएगा।

नयी शिक्षा नीति निश्चित रूप से विद्यार्थियों का बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक तौर पर विकास करेगी और बच्चों तथा युवाओं को उस मार्ग की ओर ले जाएगी जहाँ न सिर्फ उन्हें ज्ञान प्राप्त होगा बल्कि वे रोजगार कौशल से युक्त भी हो जायेंगे।

(लेखक शिक्षक और मोटिवेटर हैं)

Updated : 2020-10-12T16:11:37+05:30
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