Top
Home > नजरिया > भगवान राम हिन्दुओं की आस्था हैं या भाजपा का चुनावी हथियार !

भगवान राम हिन्दुओं की आस्था हैं या भाजपा का चुनावी हथियार !

बीजेपी ने राम के चरित्र को विकृत करने का काम किया। राम मंदिर आंदोलन के बहाने इसने पोस्टरों में राम का एक गुस्सैल रूप पेश किया, जिसमें वे धनुष बाण ताने हुए दिखते हैं। यह छवि बीजेपी की अपनी उन्मादी कल्पना का उत्पाद है।

भगवान राम हिन्दुओं की आस्था हैं या भाजपा का चुनावी हथियार !
X

कृष्ण कांत

बीजेपी वालों के अलावा दुनिया में कोई हिंदू नहीं है, जो भगवान राम का नाम किसी को चिढ़ाने के लिए के इस्तेमाल करता हो! मैंने तो अपने जीवन में अब तक न सुना, न देखा कि कोई ऐसा करता हो। क्या आपने देखा है? चुनाव के दौरान ये लिखने पर मुझे टीएमसी समर्थक समझा जाता। खैर, अब चुनाव बीत चुका है। मेरी पहुंच या कद बड़े नेताओं जैसी नहीं है लेकिन आप दोस्तों के सामने तो अपनी बात रख ही सकता हूं।

हमारा घर अयोध्या के पास में है। बचपन में घर से बाहर अगर कहीं निकले तो अयोध्या गए। कभी तेरस पर, कभी शिवरात्रि पर। अयोध्या ऐसी जगह है, जहां हर घर को मंदिर कहते हैं। इन मंदिरों में दिन-रात शांत और कर्णप्रिय स्वर में रामाधुन और कीर्तन होता रहता है।

हमने देखा है कि इस देश की जनता, हमारे पुरखे जिंदगी भर राम राम जपते हुए उम्र काट देते हैं। हमने नहीं देखा कि कभी कोई व्यक्ति किसी को देखते ही जय श्रीराम कहकर उसे चिढ़ाने लगे। जनमानस में तो राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। आदर्श चरित्र हैं। अकादमिक जगत में भले ही राम के चरित्र को लेकर कुछ गंभीर सवाल हैं लेकिन उस बहस में भी कोई किसी को चिढ़ाता नहीं है।

बीजेपी ने राम के चरित्र को विकृत करने का काम किया। राम मंदिर आंदोलन के बहाने इसने पोस्टरों में राम का एक गुस्सैल रूप पेश किया, जिसमें वे धनुष बाण ताने हुए दिखते हैं। यह छवि बीजेपी की अपनी उन्मादी कल्पना का उत्पाद है।

अवध सहित भारत के बड़े हिस्से में अभिवादन स्वरूप बोला जाने वाला 'राम राम', 'जय सीता राम', 'जय राम जी की' और 'जय सियाराम' बीजेपी रैलियों में 'जय श्रीराम' हो गया, जो लोगों में उन्माद भरने के काम आता है। बंगाल में बीजेपी एक कदम और आगे गई और इसके कार्यकर्ता ममता बनर्जी को देखते ही जय श्रीराम का नारा लगाकर चिढ़ाने लगे।

उन्हें इस उन्मादी उद्घोष के सहारे बंगाल चुनाव जीतने की उम्मीद थी। वह तो हुआ नहीं, लेकिन बीजेपी कमोबेश ये हरकत पूरे देश में करती है। हिंदुओं को अपनी आस्था बीजेपी के हाथ गिरवी रखने की जगह ये सोचना चाहिए कि भगवान राम उनकी पवित्र आस्था हैं या बीजेपी का चुनावी हथियार हैं?

क्या हिंदुओं को इस बात से कोई फर्क पड़ता है कि उनके भगवान का नाम किसी को चिढ़ाने के काम आए? क्या इससे हिंदुओं का या हिंदू धर्म का कोई भला होने वाला है? जिस पार्टी की खुद की छवि पूरी दुनिया में हिंदू कट्टरपंथी पार्टी की है, वह हिंदुओं को बदनाम करने के अलावा और कौन सा भला कर कर सकती है?

ईश्वर किसी के बुरे उसके बुरे कर्म का दंड देता है या नहीं, इस बारे में दावे से मैं कुछ नहीं कह सकता। लेकिन बंगाल के हिंदुओं ने बीजेपी को इस धतकरम का दंड दे दिया है। बाकी भारत के हिंदुओं को भी इससे सीख लेनी चाहिए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं, इनसे 'उदय सर्वोदय' का सहमत होना या न होना आवश्यक नहीं है )

Updated : 3 May 2021 2:31 PM GMT
Tags:    

Shivani

Magazine | Portal | Channel


Next Story
Share it
Top