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जिस पार्टी के सिर पर होगा किसानों का हाथ, उसी के सिर पर सजेगा सत्ता का ताज

इन चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि देश के मतदाताओं ने अन्य मुद्दों के साथ ही देश के किसानों के मुद्दों पर किसानों के पक्ष में विशेष रूप से मुहर लगाई है।

जिस पार्टी के सिर पर होगा किसानों का हाथ, उसी के सिर पर सजेगा सत्ता का ताज
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डॉ राजाराम त्रिपाठी

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु के चुनाव परिणामों का किसान आंदोलन की दशा-दिशा पर निश्चित रूप से निर्णायक प्रभाव पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि हालिया हुए पांच राज्यों के चुनाव में से इन दो प्रदेशों में कुछ किसान प्रतिनिधियों ने प्रतीकात्मक रूप से जाकर वहां की जनता से किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार के किसान विरोधी अड़ियल रुख को देखते हुए केन्द्र की वर्तमान सत्तारूढ़ सरकार की पार्टी के खिलाफ मतदान हेतु अपील की थी। इन चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि देश के मतदाताओं ने अन्य मुद्दों के साथ ही देश के किसानों के मुद्दों पर किसानों के पक्ष में विशेष रूप से मुहर लगाई है। इसने यह साबित कर दिया कि केंद्र सरकार का किसानों के जरूरी मुद्दों पर अड़ियल, अहंकारी तथा अधिनायकवादी रूख सरासर गलत है और देश की जनता को देश के अन्नदाता किसानों के साथ यह निर्मम व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं है।

इन चुनाव परिणामों के बाद अब देश के विपक्ष में ममता बनर्जी की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण होगी तथा वर्तमान बिखरा हुआ विपक्ष एकजुट और शक्तिशाली हो सकता है और यह विपक्ष अब किसानों के पक्ष में और मजबूती के साथ खड़ा हो पाएगा।

इन चुनाव परिणामों की रोशनी में यह देखते हुए कि देश की जनता कोरोना के वर्तमान भयावह हालातों के लिए तथा किसानों की नाराजगी के लिए पूरी तरह से मोदी सरकार को दोष दे रही है। ऐसे में मोदी सरकार अपने अड़ियल तथा अहंकारी रुख को छोड़कर अपनी गलती मानते हुए तथा किसानों की मांगे शीघ्र पूरी कर देश के सबसे बड़े मतदाता वर्ग यानी किसानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है।

देश के सकल मतदाताओं का सबसे बड़ा लगभग 61% प्रतिशत किसान परिवारों का वर्ग है। यह किसान वर्ग अब अपनी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित कर देश की सभी समस्याओं के बेहतर निराकरण हेतु आगामी चुनावों में अपनी आनुपातिक राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने हेतु बड़े कदम उठा सकते हैं। इसके लिए किसानों के सामने कई विकल्प खुले हुए हैं।

(लेखक अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक हैं )

(ये लेखक के अपने विचार हैं, इनसे 'उदय सर्वोदय' का सहमत होना या न होना आवश्यक नहीं है )

Updated : 3 May 2021 5:13 PM GMT
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Shivani

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