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इंसान के 'कुकर्म' की ईश्वर से शिकायत

इंसान के कुकर्म की ईश्वर से शिकायत
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कवि दशरथ प्रजापत

खून से लथपथ तीनसाल के बच्चे ने मरने से ठीक पहले ऐसी बात कही कि सुनकर किसी का भी दिल कांप जाए।इस बच्चे ने डॉक्टरों से कहा, 'मैं भगवान से तुमसबकी शिकायत करूंगा। मैं उसे सब कुछ बताऊंगा।'

सीरिया बम हमले में घायल बच्चे को काफी चोटें आई थीं और अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण उसकी मौत हो गई। मरने से पहले दर्द से कहराते हुए उसने कहा कि अब वह भगवान से सबकी शिकायत करेगा।

कुछ वर्ष पहले येघटना घटित हुई, हालांकि इसको लेकर वाद-विवादभी चला। किसी ने इस घटना कोग़लत भी बताया। लेकिन सोचने काविषय यह है कि आज भी जब किसी निर्दोष पर अत्याचार होता होगा तो भगवान से शिकायतनहीं करता होगा क्या? क्या ऐसेव्यक्तियों की शिकायतें भगवान के पास नहीं पहुंचती होगी? यदि नहीं तो ज़रा सोचो इस पृथ्वी पर अनेक प्रकार के जीव-जंतु,कीट-पतंग, कीटाणुओं की लाखों प्रजातियां हैं पर वैश्विक महामारी नेकेवल इंसान को ही क्यों चुना? क्योंकि ये सब उननिर्दोषों की शिकायतों का परिणाम हैं, जिनको मनुष्य नेबेमौत मार दिया।

आज दुनिया कीपरिस्थिति को देखकर लगता है उस बच्चे की शिकायत भगवान ने सुन ली है और उसकी सजा भीइंसानों को मिल रही है। हालांकि यह सजा इंसानों के लिए बिल्कुल नगण्य है।

इंसानों कीनिर्दयता को देखकर लगता है कि ऐसी शिकायतें अनगिनत संख्या में भगवान के पास पहुंचीहोंगी। चीन में हाल ही में लाखोंजीव-जंतुओं को मौत के घाट उतार दिया गया। उनकी चीख भगवान तक नहीं पहुंची होगी क्या?

आज अपने देश मेंभी कुछ आदमखोर दरिंदों के द्वारा छोटी-छोटी बच्चियों के साथ कुकृत्य करना भगवान तकनहीं पहुंचता होगा क्या?

आज भी अपने देश में धर्म अथवा मजहब के नाम पर लड़ाई होती रहती है, कभी बेटियां बचाने अथवा पर्यावरण बचाने के लिए ऐसी लड़ाई लड़ी है क्या? हाँ जरूर सोशल मीडिया पर अनेक पोस्ट की हैं, जिनका आज की स्थिति में कोई औचित्य नहीं रहा! आज केवल पर्यावरण दिवस पर ही पर्यावरण की बातें होती हैं। उस दिन एक गमले में पौधा लगा दिया जाता है और उसके साथ फोटो लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया जाता है। बाद में वो फोटो ही जीवित रहते हैं पौधा नहीं!

निर्भया जैसीबेटी के साथ दरिंदगी करने वालों को सात साल बाद सज़ा मिलना देश की न्याय प्रणालीपर सवाल उठाता है! ज़रा सोचो, यदि निर्भया कीमां ने दिन-रात संघर्ष नहीं किया होता तो उन जालिमों को सज़ा मिलती?

ऐसी कितनी हीनिर्भया हैं, जिनको आज तक न्याय नहींमिल पाया है। उन सबकी शिकायत अवश्यऊपर पहुंचती होगी!

आज के समय कीसबसे बड़ी बात कोरोना महामारी की वैक्सीन बनाने के लिए निर्दोष जीव-जंतुओं काप्रयोग किया जा रहा है जबकि इसका प्रयोग बेटियों के साथ दरिंदगी करने वालों परकरना चाहिए।

आज अमूमन हर व्यक्ति गुटखा खाते हुए कैंसर का ज्ञान देरहा है। यही बात पर्यावरण के बारे में भी है जो सोशल मीडिया तक ही सीमित है। यदियही हाल पर्यावरण का रहा तो दुनिया में वह दिन दूर नहीं जब व्यक्तियों को अपनी पीठ पर ऑक्सीजन का सिलेंडर बाँधना पड़ेगा!

आज प्रत्येकपरिस्थिति का कारण लोगों के द्वारा सिर्फ राजनीति को ठहराना कहाँ तक उचित है?हालांकि लोग खुद अपने दम पर कुछ कार्य नहींकरते हैं केवल सोशल मीडिया के द्वारा प्रत्येक प्रकार का आरोप राजनीति पर थोप देतेहैं।

शर्म की बात तोतब होती है जब बलात्कार, दुष्कर्म इत्यादिपर भी राजनीति शुरू कर दी जाती है। अब वो बच्चा तो अपने अंतिम शब्द बोलकर चला गयालेकिन सोचो जब किसी बहन, बेटी पर तेजाब फेंक दिया जाता अथवा कुकृत्य कियाजाता है और अपनी जिंदगी घुट-घुट कर जीती हैं तब वह भगवान से पल-पल की शिकायत नहींकरती होगी क्या?

(ये लेखक के निजी विचार हैं।उदय सर्वोदय का इससे सहमत अथवा असहमत होना आवश्यक नहीं है।)

Updated : 13 Jun 2020 10:12 AM GMT
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