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स्कूलों में हो रहे घोटालों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम

स्कूलों में हो रहे घोटालों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम
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नई दिल्ली, ब्यूरो | स्कूलों में प्रशिक्षकों की संख्या से लेकर अध्यापकों के समय को लेकर हो रहे फर्जीवाड़े वर्तमान में पूरी तरह से बंद होने को हैं। स्कूलों के साथ सभी लोगो का, बच्चों का, अध्यापकों का प्रत्येक डेटा वेब पर होगा। इसके अतिरिक्त, कौन सा स्कूल वहां उपलब्ध है, इसी तरह इसे जियो टैगिंग के माध्यम से देखा जा सकता है। इस पर काम शुरू हो गया है। दिलचस्प बात ये है कि इसमें निजी और सरकारी दोनों स्कूलों को शामिल किया जायेगा तथा यह कार्य अगले 6 महीनों के भीतर संपन्न हो जायेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों पर इस पूरी कवायद की शुरुआत तब की है जब स्कूलों से गलत डेटा देकर धन संबंधी सहायता की आपत्तियों का विस्तार हुआ है। इसी तरह सरकार द्वारा समर्थित स्कूलों की एक बड़ी संख्या है। स्कूलों की कुल संख्या में ऐसे स्कूलों की संख्या सिर्फ पांच प्रतिशत है।इतना सब होने के बावजूद मंत्रालय को जो रिपोर्ट सौंपी गयी है, उसमें विद्यालयों में सामान तथा शिक्षकों की व्यवस्था में कमी दिखाई गयी है। ये स्थिति केवल सरकारी ही नहीं बल्कि निजी विद्यालयों की भी है। देश में बहुत सारे विद्यालय ऐसे हैं जो कि केवल दो या फिर केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। वहां सामान और अन्य व्यवस्थाओं में कमी होना तो जाहिर सी बात है। अगर आंकड़ों के हिसाब से अनुमान लगाया जाये तो प्रत्येक 24 छात्रों के ऊपर एक शिक्षक है। ऐसे में देश का भविष्य बनना मुश्किल ही नही बल्कि लगभग नामुमकिन ही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्कूली शिक्षा सचिव रीना रे के मुताबिक स्कूलों से जुड़ी गड़बडि़यों को पूरी तरह से रोकने के लिए वह देश भर के स्कूलों का जियोग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम सर्वे करा रही है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल की जियो टैगिंग होगी। जिसके साथ स्कूलों से जुड़ी प्रत्येक जानकारी भी देखी जा सकेगी।

Updated : 7 Oct 2019 8:52 AM GMT
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