पार्टी अध्यक्ष के चक्रव्यूह में घिरी कांग्रेस का नया चेहरा गैर गांधी बनेगा ?

नई दिल्ली,उदय सर्वोदय डेस्क। कांग्रेस अपना नया अध्यक्ष चुनेगी या राहुल गांधी की जगह लेने की तलाश और लंबी होगी? कल शनिवार को इसकी तस्वीर साफ हो जाएगी। पिछले ढाई महीने से नेतृत्व का पनया चेहरा तय करने की चुनौती को अनुच्छेद 370 के बाद मचे घमासान ने और भी बढ़ा दिया है। कांग्रेस के सबसे संकटपूर्ण दौर में गांधी परिवार का नेतृत्व होते हुए भी पार्टी नेता खुलेआम पार्टी लाइन से असहमति जताने लगे हैं। अब चुनौतियों के इस चक्रव्यूह से बाहर आने का रास्ता निकालने की पहली कोशिश में उम्मीद है कि कांग्रेस अपना नया अंतरिम अध्यक्ष तो चुनेगी।

पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक अंतरिम अध्यक्ष की रेस के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, वरिष्ठ नेताओं में मल्लिकार्जुन खड़गे की दावेदारी भी भारी है। इनके अलावा पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के नाम भी लिस्ट में हैं। इसमें खास बात यह है कि ये सभी नेता दलित समुदाय से हैं। युवा दावेदारों में सचिन पायलट का नाम है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 370 पर पार्टी लाइन से अलग बोल कर खुद को दौड़ से बाहर कर लिया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक पार्टी के नये अध्यक्ष का फैसला करने के लिए विशेष बुलाई गई है। इसीलिए पार्टी कार्यसमिति पहले राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार करेगी और इसके बाद नये अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार पार्टी में अंदरूनी राय यही है कि नये पूर्णकालिक अध्यक्ष पर कोई फैसला नहीं हो पाता है तो कार्यसमिति को अस्थायी या अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त कर देना चाहिए।

गांधी परिवार से बाहर के चेहरे पर पार्टी कार्यसमिति फिलहाल अंतरिम अध्यक्ष का ही चुनाव करेगी। संकेत यह भी हैं कि चार से छह नेताओं का एक विशेष पैनल बनाने का भी फैसला लिया जा सकता है और इस पैनल को अंतरिम अध्यक्ष का चयन करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। शनिवार को कार्यसमिति में अंतरिम अध्यक्ष का चयन हो जाता है तो फिर पैनल को अगले छह-आठ महीने में संगठन चुनाव कराने का जिम्मा भी सौंपा जा सकता है।

पूर्णकालिक अध्यक्ष का चयन चुनाव से करा कर गांधी परिवार से बाहर से चुनना मौजूदा हालातों में पार्टी के लिए ही ज्यादा ठीक होगा। लेकिन गांधी परिवार से बाहर के नेतृत्व को कबूल करने पर नेताओं में सहजता नहीं दिख रही। कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रियंका गांधी वाड्रा को अध्यक्ष बनाने की शुरूवात की लेकिन अध्यक्ष बनाने के राहुल गांधी के रुख को देखते हुए प्रियंका फिलहाल दौड़ में नहीं हैं।

ऐसे में यह तय है कि दो दशक बाद एक बार फिर गांधी परिवार से बाहर का कोई नेता कांग्रेस का अध्यक्ष होगा। सीताराम केसरी के बाद मार्च 1998 से सोनिया गांधी ने दिसंबर 2017 तक यानि कि 20 वर्षों तक पार्टी की कमान उनके हाथ थी लेकिन राहुल गांधी का कार्यकाल सिर्फ 20 महीने का ही रहा।

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