दलित प्रोफेसर ने BJP के खिलाफ किया पोस्ट, अब नहीं मिलेगा ये अवॉर्ड

लखनऊ  (ब्यूरो रिपोर्ट) : फेसबुक पर बीजेपी का मज़ाक उड़ना अनुसूचित जाति/ जनजाति के एक प्रोफेसर को महंगा पड़ गया. लखनऊ यूनिवर्सिटी में हिंदी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर को रामराल अग्रवाल अवार्ड दिया जाना था, लेकिन अब उन्हें ये अवॉर्ड नहीं दिया जाएगा. प्रोफेसर रविकांत को इसी महीने राज्य कर्मचारी साहित्य संघ की तरफ से ये अवॉर्ड मिलना था. 6 मार्च को उन्हें एक चिट्ठी मिली, जिसमें कहा गया कि विवादित फेसबुक पोस्ट के चलते उन्हें अब अवॉर्ड नहीं दिया जाएगा.

प्रोफेसर रविकांत ने फेसबुक पर लिखा था, ‘इस वक्त भक्तों की हालत इस तरह की है कि वो डोनाल्ड ट्रंप का जन्म दिन मनाते हैं और उनकी तस्वीर को केक खिलाते हैं. उनके देवता (मोदी) बिना आमंत्रण के पाकिस्तान चले जाते हैं और वो देशभक्त हैं. अगर मैं विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई को लेकर इमरान खान की तारीफ करता हूं तो मैं देशद्रोही हो जाता हूं. मुझे उनकी गाली खानी पड़ती है.” प्रोफेसर रविकांत ने एक अन्य फेसबुक पोस्ट में पिछले दिनों बीजेपी के सांसद और विधायक के बीच हुई मारपीट पर तंज कसा है. प्रोफेसर को जो चिट्ठी लिखी गई है उसमें कहा गया है, ‘आपको रामराल अग्रवाल अवॉर्ड दिया जाना था, लेकिन आपके खिलाफ हमें कुछ शिकायत मिली है, जिसमें आपके फेसबुक पोस्ट की कॉपी भी मिली है. ऐसे में कमेटी ने फैसला किया है कि अब ये अवार्ड आपको नहीं दिया जाएगा”.

प्रोफेसर ने कहा है कि फेसबुक पर उनकी राय निजी थी. लिहाजा वो इसे डीलीट नहीं करेंगे. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अवॉर्ड न दिए जाने को लेकर सरकार की आलोचना की है. इसको लेकर उन्होंने एक ट्वीट किया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *