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बेटियों को समाज में आगे बढ़ने के लिए अपना मनोबल मजबूत बनाए रखना होगा: प्रतिभा

बेटियों को समाज में आगे बढ़ने के लिए अपना मनोबल मजबूत बनाए रखना होगा: प्रतिभा
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  • महिला वर्ग में देश की टॉपर आईएएस ने साझा किए अपने अनुभव
  • कहा- देश की बेटियों को आगे बढ़ने में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
  • तैयारियों में लगे छात्रों के लिए दिए अनेक महत्वपूर्ण टिप्स
  • हिंदी और संस्कृत वालों को निराश होने की जरूरत नहीं

सत्य प्रकाश गुप्ता

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जैसे छोटे शहर मेंप्राथमिक और इंटर तक की पढ़ाई पूर्ण कर बचपन से आईएएस बनने के सपने को लेकर देश कीराजधानी दिल्ली को निकल पड़ी प्रतिभा ने 2010 में सुलतानपुर शहर को छोड़ दिया। एक दशक घर परिवार से दूरअपने लक्ष्य के लिए किताबों और शिक्षा के मंदिरों में साधनारत रहीं। वर्ष 2018 में आईएएस की परीक्षा देने से पहले अनुभव के लिए प्रतिभाने वोडाफोन की कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्य किया। 2018 में आईआरएस के नाते सहायक आयुक्त इनकम टैक्स बनीं। इस पद पर कार्य करते हुए 2019 में दृढ़ निश्चयी प्रतिभा ने फिर आईएएस कीपरीक्षा दी और इस बार देश की समग्र मेरिट में तीसरे स्थान और महिला वर्ग में पहलेस्थान पर रहीं।

आईएएस के परीक्षाफल के बाद अपने गृह जनपद सुलतानपुर केबघराजपुर गांव में माता-पिता के साथ रह रही प्रतिभा वर्मा ने इस उपलब्धि पूर्णऊंचाइयों के खट्टे मीठे अनुभव और साधनारत तैयारियों की लंबी यात्रा का वृत्तांत इस लेखकके साथ साझा किये।प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतरीन अनुभवी इनकम टैक्स की सहायक आयुक्त से आईएएस बनीं प्रतिभा वर्मा ने कहा कि किसी बड़े पद पर पहुंचनेके लिए बेटियों के लिए बहुत समस्याएं हैं समाज में, जो बेटों को नहीं झेलनी पड़ती हैं। बेटा और बेटियों मेंशिक्षा का अधिकार बराबर नहीं है। यह अधिकार हमें इसलिए मिला कि हमारा परिवार आगेकी सोच रखने वाला और खुले विचार का है।

दूसरा सबसे बड़ामुद्दा बेटियों के लिए सुरक्षा का है, जो मैंने खुद भीफेस किया था। 'बाहर निकल रही हूं मेरे साथ कुछ भी गलत ना हो।'यह बेटियों को हर दिन फेस करना पड़ता है। हमने पढ़ा भी है, हर सफल बेटी नेयह जरूर फेस किया होता है, गलत हरकतों काशिकार हुई होती हैं। आगे बढ़ने मेंसुरक्षा बेटियों के लिए बहुत ही बड़ा ही मुद्दा है। इस सब के बावजूद बेटियों कोअपना मनोबल आगे रखना है कि मैं समाज में आगे बढूंगी।

बड़ी ही बेबाकीसे अपनी बात रखते हुए प्रतिभा वर्मा ने सभी बेटियों को संदेश दिया है कि इन सबपरिस्थितियों का भी सामना करके अगर आप आगे बढ़ती हैं और अपने स्वतंत्र बनने के स्तर तक पहुंचती हैं। आपके अंदर इतनी शक्ति आ जाए कि आप सामने वालेको रोक सको। यह हिम्मत तभी आती है जब आप खुद पढ़ती हो, अपने अधिकार को समझ पाती हो और आपके पास बोलने की क्षमताहो। इन तमाम परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा तभी ऐसा मनोबल अपने आप में आता है।सारी कठिनाइयों का सामना करने के बाद ही लोग ऊंचाईयों तक पहुँचते हैं।

माता-पिता और बेटियों में विश्वसनीयता

प्रतिभा वर्मा नेएक और महत्वपूर्ण बात कही कि जिस तरह से अभिभावक आप पर विश्वास रखता है, उसके प्रति बेटियों को भी मेहनत करनी पड़ेगी। उस विश्वासको अपनी तरफ से सच्चा रखना होगा। मेरे साथ भी यही हुआ। जब मेरे माता-पिता मुझ परविश्वास करते हैं तो उसी तरह मैं भी उन्हें प्रतिदिन की गतिविधियों को बताती थी किआज मेरे साथ ऐसा हुआ और मैंने उसे ऐसे हैंडल किया। इससे मेरे माता पिता का भीविश्वास बढ़ता था कि उनकी बेटी अनेक परिस्थितियों के प्रति मजबूत हो रही है।सामान्य तौर पर माता-पिता के साथ अपनी व्यक्तिगत बातें रखने में कुछ दूरियां होतीहैं। इससे माता-पिता और बेटियों में विश्वास कम होता है। इस विश्वास को बनाए रखनेके लिए तरीका यह है कि अपनी व्यक्तिगत बातों को भी माता-पिता से जरूर शेयर करतेरहना चाहिए।

लक्ष्य कैसे प्राप्त करें?

इस सवाल पर प्रतिभावर्मा ने कहा कि सबको अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। मेरा तो शुरू से हीलक्ष्य आईएएस बनने का था, वह मुझे हमेशाध्यान रहता था। लेकिन उसके लिए मुझे कुछ और क्षेत्रों के अनुभव भी चाहिए थे।प्रतियोगी परीक्षाओं में जाने की इच्छा रखने वाले छात्र को मेरा सुझाव है किहाईस्कूल, इंटरमीडिएट की शिक्षा केदौरान ही अपने रुचि के विषय को तयकरें, जिसके अनुसार वह आगे की पढ़ाई करेंगे। कोई भीविषय गलत नहीं है। सभी विषय आगे को ले जाते हैं। जब आप अपनी रुचि के अनुसार विषय तय कर लें तब आप अपना लक्ष्य तय करें। फिर आप इस क्षेत्रके सफल तमाम लोगों के बारे में पढ़े, मैं स्वयं भी यही करती थी। मैंने कई 'सिविल सर्वेंट' की बायोग्राफीपढ़ी है। इससे अनुभव होता था कि उन लोगों ने बहुत अच्छे-अच्छे कार्य किए हैं औरमुझे भी यही करना है।

आप जिस भीक्षेत्र में जाना चाहते हैं उस क्षेत्र के दिग्गज लोगों के बारे में पढ़िए कि उनकीजिंदगी कितनी कठिनाइयों से गुजरी है और उन्होंने उसका सामना कैसे किया है। उन्हींसे प्रेरणा ली जा सकती है। जब आप ऐसे लोगोंसे प्रेरणा लेने लगते हैं तो आपको खुद भी अच्छा लगने लगता है। अगर कठिनाइयां आतीभी हैं तो आपको यह पता भी है किलक्ष्य प्राप्ति यानी सफलता के बाद कितना मजा आता है। जब आप इसे अनुभव करते हैं तोयह कठिनाइयां आप के अनुभव का हिस्सा बनती जाती हैं और जब आप इसका आनंद लेने लगते हैं तो आपको सारीचीजें आसान लगने लगती हैं।

आईएएस की परीक्षा में अंग्रेजी भाषा के प्रभाव

प्रतिभा वर्माबताती हैं कि अंग्रेजी भाषा का इसपरीक्षा में बहुत बड़ा प्रभाव नहीं है। ऐसा नहीं हैकि जिन्होंने अंग्रेजी नहीं पढ़ी वह परीक्षा नहीं पास कर सकते हैं। हिंदी में भीबहुत सारे लोगों ने इस परीक्षा को अच्छे से पास किया है। संस्कृत और उर्दू की बातकरें तो मेंस की परीक्षा में यह वैकल्पिक विषय होता है, अगर आपने संस्कृत और उर्दू में महारत हासिल की है और आपकोइस पर पूरा कमांड है तो आप इस विषय का भरपूर उपयोग कर अच्छे अंक हासिल कर सकतेहैं। अंग्रेजी परीक्षा का माध्यम है और पाठ्य सामाग्रियां अंग्रेजी में कुछ ज्यादाउपलब्ध हैं। इससे थोड़ा सा ज्यादाफायदा हो सकता है किंतु अगर हिंदी के स्टूडेंट अपना ज्ञान बढ़ाने पर ध्यान देते हैंऔर ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस और रिवाइज करते हैं तो इस परीक्षा को अच्छे ढंग से पास कर सकतेहैं।

सिविल सर्विसेज में पाठ सामग्रियां

इस बारे मेंप्रतिभा वर्मा ने बताया कि एनसीईआरटी की अधिकांश किताबें इस परीक्षा के लिए अत्यंतउपयोगी हैं, जिसमें इतिहास, भूगोल और इकोनॉमी करेंट अफेयर और 9th की बेसिक क्वालिटी की किताब जो आंसर राइटिंगमें बहुत हेल्पफुल होती हैं। इसके अलावाकक्षा 11 व 12 की सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण और विज्ञान से संबंधित किताबें पढ़ें। साइंस एंडटेक्नोलॉजी और एनवायरमेंट आता है, जिसके लिए आप पूरीदुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में हो रही गतिविधियों के लिए करंट अफेयर पढ़ें। इसके अलावा प्रतिदिन अखबारों कापढ़ना और सरकार की योजनाओं की पुस्तकें अत्यंत उपयोगी साबित होती हैं। मैं रोजाना दो घंटे अखबार और पत्रिका पढ़ती थी। सरकार की ओर से प्रकाशित ‘योजना’ नाम की पत्रिका का नियमित अध्ययन कर काफी लाभ लिया है।

एक आईएएस अधिकारीके तौर पर आने वाली भ्रष्टाचार सहित अनेक चुनौतियों के सवाल पर प्रतिभा वर्मा कहतीहैं कि वास्तव में भ्रष्टाचारएक बड़ी समस्या है, किंतु इस गतिविधि मेंकुछ ही पब्लिक सर्वेंट शामिल होते हैं।पब्लिक के साथ संवाद स्थापित कर उनकीसमस्याओं का समाधान करना भी एक बड़ी चुनौती है। दूसरा यह है कि एक महिला नेतृत्वको लोग आसानी से स्वीकार नहीं करते हैं। ऐसे में अपनी काबिलियत साबित करना भी एकबड़ी चुनौती है, पर इसके लिए हमनेपहले ही तमाम दिग्गजो को पढ़ा है, उन्होंने जिस तरह से चुनौतियों को स्वीकार कर अपने कोसाबित किया है, वही हमारे लिएसबसे बड़ी प्रेरणा है। पावर और अधिकार सहित अनेक तरीके के टूल्स का उपयोग करकाबिलियत साबित करने का हर संभव प्रयास किया जायेगा। मुझे लगता है ट्रेनिंग मेंमुझे यही सब सीखने को मिलेगा। काम करते समय साथ के लोग और सरकार सकारात्मक हो तोसमाज में काम करना और भी आसान हो जाता है, जिससे जनता का भला हो।

अंत मेंसाक्षात्कार में पूछे गए सवालों के सवालपर प्रतिभा ने बताया कि उनके साक्षात्कार में करीब 25 सवाल पूछे गए थे। इस दौरान कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चाहुई और सवालों पर क्रास सवाल भी हुए। इसमें सबसे यादगार एक प्रश्न पूछा गया था किकोरोना काल में देश में पॉजिटिव क्या हुआ है? यह प्रश्न लोगों के लिए अजीब था कि इसमें तो सब कुछ बंद होगया है, किंतु मेरा जवाब था कि अभी तक स्वास्थ्य सेवाओं पर इतना ध्याननहीं दिया जा रहा था, जितना इन दिनों दिया जारहा है। इससे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है और लोग हर जगह पर बेहतरस्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षा करने लगे हैं। इसने सभी को यह एहसास करा दिया है कियदि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ गांव स्तर तक न पहुंचीं तो लोगों का जीना कितना मुश्किल होगा। यह इसका सकारात्मकपहलू है।

दूसरा प्रदूषण कमहो गया है। देश की राजधानी दिल्ली शहर में सांस लेना भी मुश्किल था। पहली बारदिल्ली में हवा की गुणवत्ता का मानक अच्छा बताया गया है। डिजिटल एजुकेशन पर भीबहुत जोर दिया जाने लगा है। अब इस पर इतना ध्यान दिया जा रहा है कि यह व्यवस्था हरगांव व हर बच्चे तक पहुंचे। अभी तक यह सम्पन्न परिवारों तक ही सीमित था, किंतु अब इसे सरकार गरीबों तक भी पहुंचाने का प्रयास कररही है। अब इस पर बहुत तेजी से काम होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Updated : 23 Sep 2020 2:42 PM GMT
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