परीक्षा पे चर्चा 2.0 : तनाव दूर करने के ‘मोदी सर’ के 10 गुरु मंत्र

नई दिल्ली (उदय सर्वोदय रिपोर्ट) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘परीक्षा पे चर्चा 2.0’ कार्यक्रम के माध्यम से मंगलवार को यानी आज देशभर के विद्यार्थियों के साथ-साथ इस बार अभिभावकों और शिक्षकों से भी बातचीत कर रहे हैं. इस बार अन्य देशों के छात्र भी कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मेरे लिए ये कार्यक्रम किसी को उपदेश देने के लिए नहीं है. मैं यहां आपके बीच खुद को अपने जैसा, आपके जैसा और आपके स्थिति जैसा जीना चाहता हूं, जैसा आप जीते है.’

आइये एक नजर डालते हैं उन 10 गुरुमंत्रों पर, जो उन्होंने आज अभिभावकों और शिक्षकों को दिए…

1. अभिभावकों का सकारात्मक रवैया, बच्चों की जिंदगी की बहुत बड़ी ताकत बन जाता है. तुलना कर बच्चों को नीचा न दिखाएं. बच्चों को प्रोत्साहित करना जरूरी.
2. पैशन और रूचि क्या है ये पता होना चाहिए. दबाव में आकर मत सोचिए। अपनी क्षमता के हिसाब से सोचिए, इसमें किसी की मदद भी लीजिए.
3. जो सफल लोग होते हैं, उन पर समय का दबाव नहीं होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने अपने समय की कीमत समझी होती है.
4. हम परीक्षा के लिए नहीं, खुद की जिंदगी के लिए जिएं. कसौटी कोसने के लिए नहीं होती, ये एक अवसर है. मेरा तो सिद्धांत है कि कसौटी कसती है, कसौटी कोसने के लिए नहीं होती है.
5. मां अपने परिवार के लिए करती है. मैं सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों को अपना समझता हूं. इससे ऊर्जा आती है. जो किया उसे भूलकर, अगली सुबह की सोचकर बिस्तर पर जाता हूं.
6. एक बार जब लक्ष्य पकड़ में आ जाएगा तो उसी से नए लक्ष्य की प्राप्ति होगी.
7. बच्चों के साथ तकनीक पर चर्चा करनी चाहिए. तकनीक का उपयोग विस्तार के लिए होनी चाहिए. तकनीक को प्रोत्साहित करना चाहिए. ऑनलाइन गेम्स समस्या भी है, समाधान भी है.
8. रिपोर्ट कार्ड सबसे बड़ी समस्या का जड़ है. बच्चे के रिपोर्ट कार्ड को विजिटिंग कार्ड न समझें.
9. निराशा में डूबा समाज, परिवार या व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता है, आशा और अपेक्षा उर्ध्व गति के लिए अनिवार्य होती है.
10. किसी को भी अपेक्षाओं के बोझ में नहीं दबना चाहिए. इसी से तो देश चलता है. सवा सौ करोड़ देशवासियों की सवा सौ करोड़ अपेक्षाएं होनी चाहिए.

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