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दिखावा नहीं करती : अनन्या खरे

दिखावा नहीं करती : अनन्या खरे
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सेलेब टॉक ¦ धरमपालअनन्या खरे, मंच, टेलीविजन और फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री हैं. फिल्म ‘चांदनी बार’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है तो वहीं ‘देवदास’ में अपने दमदार रोल के लिए उन्होंने तारीफें बटोरी. आखिरी बार ‘पुनर्विवाह’ और ‘जुनून’ जैसे कार्यक्र मों में देखा गया. फिलहाल वह सोनी सब के शो ‘बीचवाले-बापू देख रहा है’ में चंचल बीचवाले भूमिका के लिए चर्चा में हैं. एक मुलाकात:


सोनी सब के ‘बीचवाले- बापू देख रहा है’ में चंचल बीचवाले के रूप में अपने किरदार के बारे में बताएं?सोनी सब के नए शो ‘बीचवाले’ में मेरा किरदार बॉबी बीचवाले की पत्नी चंचल बीचवाले का है. वह एक मध्यमवर्गीय परिवार की गृहिणी है. दिल्ली में उसके पति के पास एक गैराज है और एक मोटर मैकेनिक की दुकान भी. चंचल बहुत खुशमिजाज, मिलनसार और देखभाल करने वाली इंसान है. उसे अपने परिवार के साथ रहना पसंद है और वह उन्हें खुश रखना चाहती है. उसका सबसे बड़ा सपना है कि उसे बच्चों को अच्छी शिक्षा और नौकरी मिले. हर किसी को खुश होना चाहिए. उसे अपनी मां, परिवारवालों से बातें करना अच्छा लगता है. उसे इंटरनेट से नई-नई चीजें सीखना भाता है.
पहले की भूमिकाओं से चंचल बीचवाले की भूमिका अलग है, इस रोल के लिए हां कहने की क्या वजह रही?इस रोल के लिए हां कहने की वजह यह रही कि हाल में निभाई गई भूमिकाओं से यह बिलकुल अलग है. मेरी कुछ भूमिकाओं को लोगों द्वारा पसंद किए जाने और लोगों द्वारा मेरे अभिनय की तारीफ किए जाने के कारण, निर्माता- निर्देशकों ने मुझसे संपर्क करना शुरू किया. चंचल बीचवाले उन भूमिकाओं से बिलकुल अलग है. वह उन लोगों में से है, जो अपनी भूमिका और परिवार के साथ खुश है. साथ ही यह सोनी सब है और यह एक कॉमेडी शो है. इसमें कोई नकारात्मकता या ग्रे शेड नहीं है.चंचल प्यारी है और सबको पसंद आती है. यह भूमिका कुछ ऐसी है, जो मैंने पिछले 5-6 साल में नहीं निभाई है, इसलिए यह मेरे लिए बहुत नया है. मैं उम्मीद करती हूं कि यह प्रोजेक्ट और इसमें मेरी कॉमिक भूमिका दोनों को पसंद किया जाएगा, जितना कि मेरी नेगेटिव भूमिकाओं को किया गया है.
‘बीचवाले’ में दर्शकों के लिए क्या है?‘बीचवाले’ एक कॉमेडी शो है, जिसकी पृष्ठभूमि काफी वास्तविक है. आप अतिशयोक्ति या पारंपरिक किरदार नहीं पाएंगे. इसके किरदार विश्वसनीय लगते हैं. यह बहुत ही नई तरह की कहानी है.
एक महिला या बीचवाला/मध्यवर्गीय होने के कारण आपको रोजमर्रा के जीवन में किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा है?एक महिला होने के नाते आज के दौर की महिला जिस तरह की परेशानी का सामना करती है, मैंने भी उनका सामना किया है- भेदभाव से लेकर असुरिक्षत महसूस होने और तानाशाही सहने तक. एक बीचवाले के रूप में समाज, राजनीति, रिश्ते, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, मनोरंजन- ये सभी चीजें बीचवाले के रूप में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं. ये सारी चीजें मुझे भी प्रभावित करती हैं.
आपका किरदार हमेशा दिखावे या फिर महंगी चीजें चाहने वाले का रहा है, व्यक्तिगत रूप से आज तक आपने सबसे लग्जरी चीज क्या खरीदी है?आमतौर पर मैं दिखावा नहीं करती हूं. यह मेरा स्वभाव है. मैं जब भी चीजें खरीदती हूं, वे चीजें मेरी जरूरत की होती हैं, बेवजह कुछ भी नहीं होता. मैं ज्यादातर कॉस्मेटिक्स खरीदती हूं क्योंकि मुझे उनकी जरूरत होती है और शायद यह चीजें मुझे अच्छी लगती हैं. मुझे याद नहीं है कि मैंने कोई सबसे महंगी चीज खरीदी हो... शायद वह सनग्लासेस हो सकते हैं.
आप किस गांधीवादी विचारधारा को मानती हैं?शांति बनाए रखने, खुद की रक्षा और अपने पर्यावरण की सुरक्षा के गांधीवादी सोच को मैं सबसे ज्यादा मानती हूं. डॉ. डेसाकू इकेडा के नेतृत्व में बौद्ध धर्म से भी मैं जुड़ी हूं. इससे मुझे काफी मदद मिली है.

Updated : 11 Oct 2018 1:57 PM GMT
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