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चारों तरफ से घिर जाने के बाद अमित शाह ने बदला अपना बयान

चारों तरफ से घिर जाने के बाद अमित शाह ने बदला अपना बयान
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दिल्ली, ब्यूरो | गृहमंत्री अमित शाह ने बीते हफ्ते हिंदी दिवस पर एक बयान दिया। अपील कर दी थी कि हिंदी पूरे देश में एक आम भाषा हो। इसके बाद बवाल मचा और हिंदी क्यों पूरे देश की एक भाषा हो और क्यों न हो? इस पर बहसें हुई। चारों तरफ से घिर जाने के बाद अमित शाह के पास कोई चारा नहीं बचा फिर अमित शाह ने बयान दिया और कहा कि मैंने तो ऐसा कहा ही नहीं मैंने कभी नहीं कहा कि हिंदी को दूसरी आंचलिक भाषाओं पर थोपा जाना चाहिए। मैंने बस इतना निवेदन किया था कि लोग अपनी मातृभाषा से अलग हिंदी को दूसरी भाषा के तौर पर सीखें। मैं खुद गैर-हिंदीभाषी प्रदेश गुजरात से आता हूं। अगर कुछ लोग इस पर राजनीति ही करना चाहते हैं, तो ये उनका चुनाव है।

साथ ही अमित शाह ने यह भी कहा कि भारत की अनेक भाषाएं और बोलियां हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन देश की एक भाषा ऐसी हो, जिससे विदेशी भाषाएँ हमारे देश पर हावी ना हों इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने एकमत से हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। बीते हफ्ते अमित शाह के हिंदी वाले बयान के बाद दक्षिण भारत के राज्यों में ख़ासा विरोध देखने को मिला था। यही नहीं, भाजपाशासित कर्नाटक में भी इस बयान का विरोध देखने को मिला था। केरल समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी कहा था कि हिंदी देश की सबसे बड़ी भाषा तो है, लेकिन इसे इस तरह किसी के ऊपर थोपा जाना गलत है।

Updated : 19 Sep 2019 6:21 AM GMT
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