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वापसी के लिए जोर

वापसी के लिए जोर
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रायपुर से ¦ रमेश कुमार ‘रिपु’ छत्तीसगढ़ में सत्ता बचाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अमित शाह के फार्मूले पर काम कर रहे हैं, लेकिन सत्ता की डोर छीनने के विपक्ष के फार्मूले ने सत्ता पक्ष को पशोपेश में डाल दिया है.


भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से दिल्ली में सत्ता बचाने का फार्मूला मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सीख कर लौटे तो रायपुर के कलेक्टर ओ.पी. चौधरी कलेक्टरी छोड़कर भाजपा में शामिल में हो गए. उनकी नौकरी अभी 13 साल की हुई है. वे मुख्य सचिव नहीं तो अतिरिक्त सचिव भी बन सकते थे. उनके अचानक भाजपा में शामिल होने पर सबसे अधिक सवाल कांग्रेस ने उठाए. पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल का आरोप है कि कुछ चिह्नांकित कलेक्टर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं. यह चौंकाने वाली बात है कि स्टेट इलेक्शन कमीशन को कलेक्टरों को लिखना पड़ता है कि हमारा फोन उठा लिया करो.यह तय है कि ओ.पी. चौधरी ने कलेक्टर पद छोड़ने का निर्णय कोई एक दिन में नहीं लिया होगा. इसके लिए बहुत पहले से स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी. अमित शाह से उन्होंने दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली और रायपुर में एक बड़ी रैली भी की. हालांकि अभी यह निश्चित नहीं है कि उनकी राजनीति की पाठशाला किस विधानसभा से शुरू होगी. संभावना है कि वह खरसिया से उमेश पटेल के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. यह भी हो सकता है कि वे रायपुर में कलेक्टर थे तो उन्हें रायपुर में ही किसी विधानसभा से चुनाव लड़ाया जाए अथवा रायगढ़ या चंद्रपुर विधानसभा से भी उन्हें मैदान में उतारा जा सकता है. बता दें कि खरसिया में 1977 के बाद कभी कांग्रेस हारी नहीं है. यहां से लखीराम अग्रवाल और दिलीप सिंह जूदेव भी चुनाव हार चुके हैं. अमर अग्रवाल कभी यहां से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके हंै. स्व. अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बनने के बाद 1988 में यहां से चुनाव लड़कर विजयी हुए थे. स्व. नंद कुमार पटेल इसी विधानसभा से लगातार 7 बार चुनाव जीते और छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री भी बने थे.फिलहाल ओ.पी. चौधरी अभी भाजपा की तारीफ और उसके प्रचार में लगे हैं ताकि इसी बहाने वे अपने आप को मंझा हुआ भाजपाई बना सकें. चूंकि ओ.पी. चौधरी के पास अब नौकरशाही की शक्ति नहीं है इसलिए आगे यह देखना है कि वह चुनावी साल में भाजपा को क्या कामयाबी दिला सकते हैं. दूसरी ओर चुनाव अ•िायान समिति के अध्यक्ष चरणदास महंत ओ.पी. पर तंज कसते हुए कहते हैं, ‘भाजपा की 15 साल की सरकार में अराजकता इतनी बढ़ गई है कि उन्हें अपने संगठन के नेताओं पर ही विश्वास नहीं रहा और मजबूरन अधिकारियों से इस्तीफा दिलवा कर चुनाव लड़ने के लिए बाध्य किया जा रहा है.’भाजपा का प्रेशर कुकरसत्ता में बने रहने के लिए सबसे अधिक हाथ पैर भाजपा मार रही है. स्काई योजना के तहत 26 जुलाई को राष्ट्रपति राम कोंविद मोबाइल बांटने की योजना की शुरुआत बस्तर में कर चुके थे, फिर भी रायपुर में मात्र सात लोगों को मोबाइल बांटने के लिए लाखों रुपये खर्च करके फिल्म अ•िानेत्री कंगना रावत को बुलाया गया. जाहिर है मुख्यमंत्री मोबाइल के जरिए भाजपा की टीआरपी के सौंदर्य को निखारना चाहते हैं. योजना के तहत 45 लाख महिलाओं और 5 लाख युवाओं को मोबाइल बांटा जाएगा. प्रदेश सरकार को लगता है कि इस मोबाइल वितरण से भाजपा के पक्ष में घंटी बजेगी. जबकि कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी कहते हैं, ‘मोबाइल लेकर भी लोग भाजपा के खिलाफ ही बटन दाबेंगे. अबकी बार भाजपा की घंटी बजेगी.’ रमन सरकार सत्ता में बने रहने के लिए अब आदिवासियों को प्रेशर कुकर भी बांटने जा रही है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक कहते हैं, ‘ये काम वोट हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि आदिवासियों के विकास और कल्याण के लिए किया जाएगा. इसके पहले छत्तीसगढ़ सरकार हितग्राहियों को चप्पल और टिफिन भी मुफ्त बांट चुकी है.’फर्जी वोटरों का दमसियासी गलियारों में एक सनसनी यह भी है कि डॉ. रमन सिंह ने फर्जी वोटरों के दम पर पिछली बार सरकार बनाई थी और इस बार भी इन्हीं के दम पर ही सरकार बनाने की जुगत में हैं. जैसा कि प्रदेश पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल का आरोप है कि 2013 का चुनाव भाजपा ने फर्जी मतदाताओं के बूते जीता था. कांग्रेस ने फर्जी मतदाताओं की जानकारी जुटाने के लिए एक वेब एजेंसी ‘द पॉलिटिक्स डॉट इन’ की मदद ली है. ‘द पॉलिटिक्स डॉट इन’ के सीईओ विकास जैन का तर्क है कि छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ 80 लाख मतदाता हैं. हर साल एक से डेढ़ लाख की संख्या में मतदाता बढ़ते हैं, लेकिन 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में 7 से 8 लाख मतदाता बढ़ गए. मतलब हर महीने एक लाख से ज्यादा मतदाताओं की संख्या बढ़ी है. वर्तमान में 1 करोड़ 81 लाख मतदाता हैं. इनमें से 91 लाख 46 हजार पुरुष है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 90 लाख 32 हजार है. चौंकाने वाली बात ये है कि इन 1 करोड 81 लाख वोटर में से 2 लाख 12 हजार 424 मतदाता डुप्लीकेट हैं. टूट रही जोगी की पार्टीचुनाव से पहले जोगी की पार्टी जछका का जितना शोर था, अब उसके टूटने का भी उतना ही शोर है. दरअसल कांग्रेस इस वक्त जोगी को कमजोर करने के अभियान में जुटी है ताकि उससे होने वाले नुकसान को रोका जा सके. जोगी कांग्रेस के बस्तर प्रभारी डोमेंद्र भेड़िया और युवा विंग के अध्यक्ष विनोद तिवारी का कांग्रेस में शामिल होना इसी अभियान का हिस्सा है. इसके पहले बिलासपुर की पूर्व मेयर वाणी राव भी जोगी की पार्टी से इस्तीफा देकर वापस कांग्रेस में जा चुकी थीं. वाणी जोगी की पार्टी में महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष थीं. उनकी पार्टी के संस्थापक सदस्य कोर कमेटी के मेंबर और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे डॉ. चंद्रिका साहू एवं एवज देवांगन ने भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हाथ कांग्रेस की सदस्यता ली. पार्टी में मची भगदड़ पर जोगी ने यही कहा है, ‘मेरी पार्टी छोड़कर जाने वाले पछताएंगे.’दूसरी ओर बसपा और गोंगपा तके हुए हैं कांग्रेस से गठबंधन के लिए ताकि सरकार बने तो उनकी भी भागेदारी रहे. बसपा 5-6 फीसदी वोट पाती है और गोंगपा करीब दो लाख वोट पाकर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के जीतने पर रोड़ा बन जाती है. वहीं ‘आप’ पहली बार चुनाव लड़ने जा रही है 90 विधान सभा में. यह पहली बार है जब डॉ. रमन सिंह को एक नहीं, पांच पार्टियों से सामना करना पड़ेगा.

Updated : 1 Oct 2018 3:15 PM GMT
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