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राज्यसभा का आखिरी सत्र समाप्त, तीन तलाक और सिटिजनशिप बिल रद

राज्यसभा का आखिरी सत्र समाप्त, तीन तलाक और सिटिजनशिप बिल रद
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नई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) : मोदी सरकार के लिए राज्यसभा का आखिरी सत्र बुधवार को समाप्त हो गया. इसके साथ ही लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र महत्वपूर्ण माने जा रहे तीन तलाक़ और सिटिजनशिप बिल-2016 भी रद हो गए हैं. ये दोनों ही बिल लोकसभा में पास हो चुके थे, लेकिन 13 जनवरी को सत्र के आखिरी दिन भी इन्हें राज्यसभा में पेश नहीं किया गया.बता दें कि लोकसभा में पेश किया गया कोई भी बिल अगर किसी भी सदन में लंबित है, तो वह सरकार के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाता है. अगर कोई बिल राज्यसभा में पेश हुआ है और पास भी हुआ है, लेकिन लोकसभा में लंबित है तो वो भी रद हो जाता है. अब अगर तीन तलाक़ और सिटिजनशिप बिल को लेकर नया कानून बनाना है, तो अगली सरकार के आने के बाद इन्हें दोबारा लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना होगा.सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विवेक तनखा के मुताबिक, ये दोनों ही बिल रद हो चुके हैं और तीन तलाक के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग ही आखिरी दिशा-निर्देश हैं. तनखा के अनुसार सरकार के पास दूसरा रास्ता ऑर्डिनेंस लाकर कानून बनाने का होता है, लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए उसे ये साबित करना होगा कि ये बिल देश के लिए बेहद ज़रूरी हैं और इमरजेंसी के हालात हैं. हालांकि जल्दी ही आचार संहिता लागू हो जाएगी और इसकी संभावना न के बराबर है.बता दें कि नागरिकता विधेयक का नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा था. इस विधेयक पर चर्चा के लिए तीन घंटे आवंटित किए गए थे लेकिन इसे पेश ही नहीं किया जा सका. सरकार को तीन तलाक मुद्दे पर विपक्षी दलों के उग्र प्रतिरोध का सामना करना पड़ा रहा है. हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी इन दोनों बिलों को लेकर काफी गंभीर थे और उन्होंने पहले ही साफ़ कर दिया था कि वो राज्यसभा में इन्हें पास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.क्या है सिटीजनशिप बिल-2016नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के माध्यम से सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा की फिर से व्याख्या करना चाहती है. इसके जरिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. हालांकि इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों (शिया और अहमदिया) को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इसके आलावा, इस विधेयक में 11 साल तक लगातार भारत में रहने की शर्त को कम करते हुए 6 साल करने का भी प्रावधान है. इसके उलट नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक वैध पासपोर्ट के बिना या फर्जी दस्तावेज के जरिए भारत में घुसने वाले लोग अवैध घुसपैठिए की श्रेणी में आते हैं.

Updated : 13 Feb 2019 10:27 AM GMT
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