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प्रकृति से छेड़छाड़ रुकी तो शुद्ध हुआ पर्यावरण

प्रकृति से छेड़छाड़ रुकी तो शुद्ध हुआ पर्यावरण
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विराज रंजन

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष : कोरोना महामारी जैसी आपदा ने इंसान को जीना सिखा दिया। प्रकृति के साथ अच्छा बर्ताव करना और पर्यावरण का महत्व समझा दिया। इस महामारी से लोगों के लॉकडाउन में रहने के दौरान प्रदूषण कम हुआ, नदियां साफ़ हुई, ओजोन लेयर की परत ठीक हुई। इस कोरोना के डर से मानव शुद्ध हुआ है। मानव शुद्ध हुआ तो पर्यावरण शुद्ध हुआ। यही चीजें महामारी के ना आने पर भी की जा सकती थीं। पर मानव अपनी आदत से मजबूर है।

यदि मनुष्य पहले से ही पर्यावरण के प्रति सजग रहे तो कोईभी आपदा विकराल रूप धारण नहीं करेगी। कहने का तात्पर्य यह है कि आपदा कैसी भी होवो मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

आज पर्यावरण का संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। पर्यावरण के जानकार चेता रहे हैं, सजग कर रहे हैं लेकिन हमारी नींद नहीं टूट रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए अकेले सरकार को कटघरे में खड़ा करना या उसकी जवाबदारी तय करना अनुचित है। पर्यावरण संरक्षण में समाज की भागीदारी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

आज 5 जून है, पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है।भारत मे भी। मगर अफसोस कि ऐसे आयोजन मात्र औपचारिकता भर रह गए है। केवलमात्र एक दिन पर्यावरण के सरंक्षण के लिए संकल्प लिए जाते है। स्कूलों-कालेजों वस्वयंसेवी सस्थाओं द्वारा रैलियां निकाली जाती है। सेमीनार आयोजित किए जाते हैं। सरकारी विभागोंव सरकारी संस्थाओं में अधिकारीयों व स्कूली बच्चों को शपथ दिलाई जाती है। फिरपर्यावरण को प्रदूषित करके धज्जियां उड़ाई जाती हैं।

पर्यावरण कासंरक्षण हमारा नैतिक कर्तव्य है। आज पर्यावरण असन्तुलन एक विश्वव्यापी गंभीरसमस्या बनती जा रही है। सरकारों द्वारा करोड़ों रुपया खर्च किया जाता है। लेकिन केवल खानापूर्ति करने से कुछ नहीं होगा।

जब तक मानव सच्चे दिल से पर्यावरण का सरंक्षण नहीं करेगा तब तक ऐसे आयोजन व्यर्थ हैं। एक दिन पर्यावरण को बचाने के लिए नारे लगाए जाते है फिर पूरी साल पर्यावरण की याद नहीं रहती। सभी की सहभागिता ही पर्यावरण को सुरक्षित कर सकती है।

आज आपदाएं आ रही हैं, पहाड़ दरक रहे हैं, महामारीफैल रही है। बादल फट रहे हैं। पेड़-पौधों का अंधाधुंध कटान किया जा रहा है। जंगलों में आग लगाई जारही है। नदियों का जलस्तर गिर रहा है। आजअधिकांश नदियों का पानी प्रदूषित हो चुका है। सरकारों व समाज के बुद्धिजीवियों को पर्यावरण के संरक्षण हेतु मंथन करना होगा। पर्यावरण के सरक्षंण के लिए ईमानदारी से अभियान चलाने होंगे।

भाषणवाजी करने सेकुछ नहीं होगा धरातल पर काम करना होगा। एक दिन चोचलेबाजी की जाती है फिर पूरी साल 365 दिन लोग पर्यावरण को प्रदूषित करते है। कहनेका तात्पर्य यह है कि अगर सही मायनों में पर्यावरण को बचाना है तो सभी को एकजुट होना होगा। तभी हम इसका संरक्षण कर सकते है।

पर्यावरण कोबचाना हमारा नैतिक कर्तव्य है। इस कर्तव्य से हमें विमुख नहीं होना चाहिए। अगर सब एकजुट होकर काम करेगें तो हमपर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। सरकारी व गैर सरकारी सस्थाओं को इसमें अपना योगदान देनाहोगा मिलजुल कर काम करने होंगे। संचार के माध्यमों से पर्यावरण को बचाने के लिए अलख जगानी होगी।

पर्यावरण बचेगातभी मानव जीवन भी बचेगा। आज पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण को बचाने का एक संकल्प लेनाहोगा। तभी ऐसे पर्यावरण दिवसों की सार्थकता होगी। आज कोरोना महामारी के चलते प्रकृति से छेड़छाड़ रुकी तो पर्यावरण शुद्ध हुआ है। इसे हमें आदत बनानीहोगी।

Updated : 5 Jun 2020 8:20 AM GMT
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