पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी- ‘सेना का राजनीतिकरण हो रहा, प्लीज़ रोकें’

नई दिल्ली (एजेंसी) :  लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर चुनावी फायदे के लिए राजनीतिक दलों के कथित तौर पर सेना के इस्तेमाल का विरोध हो रहा है. सेना के राजनीतिकण के खिलाफ करीब 260 जाने-माने लोगों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी है. इन लोगों ने राष्ट्रपति से गुजारिश की है कि चुनाव में फायदे के लिए सेना के नाम का राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है. इसपर रोक लगाई जानी चाहिए.

राष्ट्रपति को भेजी गई इस चिट्ठी में कुल 156 लोगों ने साइन किए हैं. इसमें उन्होंने सेना के राजनीतिकण पर चिंता जाहिर की है. आने वाले दिनों में इसे खतरे की घंटी भी करार दिया है.’ इस चिट्ठी में भारतीय सेना को ‘मोदी जी की सेना’ कहने पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक रैली में पाकिस्तान पर हुए एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए भारतीय सेना को ‘मोदी जी की सेना’ कहा था. इसके बाद उन्हें चुनाव आयोग में सफाई भी देनी पड़ी थी. वहीं, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी ऐसा ही बयान दिया था. चुनाव आयोग ने उन्हें भी नोटिस थमा दिया था.

राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में लोगों ने आपत्ति जताते हुए लिखा कि बेशक चुनाव आयोग ने सेना को लेकर बयान देने वाले नेताओं को नोटिस देकर उनसे सफाई मांगी है, लेकिन इसके बाद भी ऐसे बयान आ रहे हैं. चुनाव आयोग के कड़े रुख के बाद भी नेताओं के बर्ताव में कोई बदलाव नहीं दिख रहा. चिट्ठी में ये भी कहा गया है कि चुनाव आते ही सेना पर बयानबाजी बढ़ जाती है.

बता दें कि सेना के राजनीतिकरण के आरोप को लेकर इससे पहले 150 पूर्व सैनिकों के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखने की बात मीडिया में चर्चा में थी. लेकिन, बाद में ये झूठी साबित हो गई. दरअसल, राष्ट्रपति भवन ने सेना की ओर से लिखे किसी भी पत्र के मिलने का खंडन कर दिया. वहीं, कुछ पूर्व सैनिक और सैन्य अधिकारी भी ऐसे किसी चिट्ठी में साइन करने की बात से पलट गए.

कांग्रेस ने इस चिट्ठी को आधार बनाते हुए केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया था. कांग्रेस ने कहा था कि केंद्र सरकार सेना का इस्तेमाल अपने चुनाव प्रचार के लिए कर रही है. अंग्रेजी अखबार ‘द टेलिग्राफ’ की खबर के मुताबिक, पहली चिट्ठी अब राष्ट्रपति भवन पहुंच चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, इस चिट्ठी में रिटायर्ड सैन्य अफसरों के दस्तखत नहीं हैं.

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