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पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल की उम्र में निधन

पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल की उम्र में निधन
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नई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) : समता पार्टी के संस्थापक व वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार सुबह 7 बजे निधन हो गया. वह 88 साल के थे. फर्नांडिस अल्जाइमर नामक बीमारी से पीड़ित थे और हाल ही में उन्हें स्वाइन फ्लू हो गया था.फिलहाल स्वास्थ्यगत कारणों के चलते जॉर्ज फर्नांडिस लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से बाहर थे. वह अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में रक्षा मंत्री रहे. वह 1998-2004 तक देश के रक्षा मंत्री रहे, 2004 में ताबूत घोटाला सामने आने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. हालांकि बाद में दो अलग-अलग कमिशन ऑफ इन्क्वायरी में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया था. वहीं राज्यसभा सांसद के तौर पर संसद में उनका आखिरी कार्यकाल अगस्त 2009 से जुलाई 2010 तक था.मूलतः मंगलुरु के रहने वाले जॉर्ज फर्नांडिस ने समता पार्टी की स्थापना की थी. वह आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाने वाले योद्धा और सिविल राइट्स एक्टिविस्ट के तौर पर चर्चित हुए थे. वह 1977 से 1980 के बीच मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रहे. 3 जून, 1930 को जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थे- हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन. उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बड़ी प्रशंसक थीं. उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था.1975 की इमरजेंसी में फर्नांडिस ने मांगी 'सीआईए' और फ्रांस सरकार से मददआपातकाल के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस एक ऐसे चेहरे के रूप में उभरे, पीड़ितों का मसीहा बना. 1967 से 2004 तक 9 लोकसभा चुनाव लड़ने वाले फर्नांडिस ने कई सरकार विरोधी आंदोलन चलाए थे.विकिलीक्स के खुलासा के मुताबिक, जॉर्ज फर्नांडिज ने आपातकाल के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी 'सीआईए' और फ्रांस सरकार से आर्थिक मदद मांगी थी. फर्नांडिज उस समय भूमिगत थे और सरकार विरोधी आंदोलन चला रहे थे. 1975 में तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लगाया था, जिसके विरोधी में विपक्ष के सभी पार्टियों ने देशभर में आंदोलन छेड़ दिया था. फर्नांडिज उस समय मजदूर नेता के रूप में उभरे थे. वे अमेरिकी सम्राज्यवाद और विदेशी पूंजी के घोर विरोधी रहे.विकिलीक्स के दस्तावेजों के मुताबिक, आपातकालीन विरोधी आंदोलन के तहत, जॉर्ज फर्नांडिज सरकारी संस्थानों को डायनामाइट से उड़ाना चाहते थे. अमेरिका विरोध के बाद भी 1975 में फर्नांडिज ने कहा था कि वे इसके लिए सीआई से भी धन लेने के लिए तैयार हैं. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी दैनिक ‘द हिन्दू’ ने यह खबर प्रकाशित की थी.द हिन्दू के मुताबिक, आपातकाल के विरोध में जॉर्ज तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार को गिराने के लिए आंदोलन चला रहे थे. विकिलीक्स के दस्तावेजों के मुताबिक, इस सिलसिले में उन्होंने फ्रांस सरकार के लेबर अटैशे मैनफ्रेड तरलाक से मुलाकात की थी और उनसे आर्थिक मदद मांगी थी. फर्नांडिज ने शुरुआत में तरलाक के जरिए फ्रांस सरकार से मदद मांगी थी.हालांकि फ्रांस ने मना कर दिया, इसके बाद उन्होंने तरलाक से कहा था कि वे सीआईए से इस बारे में बात करें. तब तरलाक ने उन्हें कहा था कि वे सीआईए में किसी को नहीं जानते.इन नेताओं ने ट्विटर पर व्यक्त किया शोकगरीबों, मजदूरों व शोषितों के पक्ष में आवाज़ उठाने वाले महान जननेता श्री जॉर्ज फर्नांडिस साहब जी का निधन अत्यंत दु:खद है. जॉर्ज साहब का हमारे बीच से जाना भारतीय राजनीति के एक युग का अंत है. लोकतंत्र बचाने में आपका योगदान अविस्मरणीय है. अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि.- डॉ. हर्षवर्धनपूर्व रक्षा मंत्री व वरिष्ठ राजनेता जॉर्ज फर्नांडिस के निधन की खबर से दुखी हूं. जॉर्ज फर्नांडिस सदैव मजदूर वर्ग के लिए संघर्ष करते रहे. उनके जाने से समाजवादी चिंतन का एक अध्याय समाप्त हुआ है. दुःख की घड़ी में ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की कामना करता हूं.-त्रिवेंद्र सिंह रावतजॉर्ज फर्नांडिस लोकतंत्र की मजबूत आवाज थे. वे हम सबको प्रेरणा देते रहेंगे. जॉर्ज साहब का जाना हिन्दुस्तान के लिए एक अपूरणीय क्षति है. प्रभु उनकी आत्मा को शांति दे.-गिरिराज सिंह

Updated : 29 Jan 2019 5:28 AM GMT
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