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आधी दुनिया के प्यार की बातें

आधी दुनिया के प्यार की बातें
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नया मिजाज ¦ रमेश कुमार ‘रिपु’आधी दुनिया के मन में प्यार और सेक्स की चाहत का कैनवास कैसा है, वो विजयश्री तनवीर की ‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ की कहानियों में देखने को मिलता है. हर कहानी में देह की प्यारी गंध है. इसमें नए मिजाज की नौ कहानियां हैं. इस किताब का नाम- पहले प्रेम की दूसरी पारी- भी रखा जा सकता था, इसलिए कि हर कहानी में प्यार की दूसरी पारी का अक्स है.प्यार कभी भी और किसी भी उम्र में हो सकता है. ‘पहले प्रेम की दूसरी पारी’ यही कहती है ...और प्यार दिल के अनुकूल हो तो फिर क्या कहना. लेकिन समझदार लोग भी इश्क के समंदर में तैरने से अपने को नहीं रोकते, पर जब डूबने की स्थिति आ जाती है तो संभल जाना चाहिए. यह कहानी बहुत दिलकश अंदाज से सचेत करती है. युवा मन को ‘समंदर से लौटती नदी’ कहानी लुभाती है. इस कहानी में पति, पत्नी और वो का तिकोन है. शैफाली गायिका है, जिसे सुकेश की पत्नी रेणू ब्लैक मैजिक कहती है. शैफाली नाटकीय ढंग से सुकेश के जीवन में हवा की तरह दाखिल होती है और अपने हिस्से का अंश लेकर चली जाती है. शैफाली की उम्र सुकेश से कम है, फिर भी वह सुकेश को उत्तेजित करने के लिए कहती है- उम्र कोई मसला नहीं है. मैं सब जानती हूं. जितना आपकी उम्र की कोई औरत जानती है. एक नाजायज रिश्ते का अलाव तापने का मन किसे नहीं करता. लेकिन शैफाली जैसी महिलाएं अपने आशिक को डरा, सहमा, पत्नी के आगे नहीं देख सकतीं और अपने हिस्से का प्यार लेकर चली जाती हैं.‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ शीर्षक की कहानी में पाठक को अपने जेहन पर जोर लगाना पड़ता है कि आखिर अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार है क्या! कौन है उसका चौथा प्यार? एक सामान्य वर्ग की महिला के दिलों में प्यार के उठने वाले ज्वार-भाटे का चित्रण कौतुहल पैदा करता है. दैहिक संवाद और मन में उठने वाली इच्छाओं की तरंगों को लेखिका ने लफ्जों के जरिये बाहर निकाला है. मसलन -दौड़ती लोकल पकड़ना उसके लिए बिलकुल सरल सा काम था. ठीक इतना ही सरल जितना आजकल उसके लिए किसी औरत को देखने भर से उसकी ब्रेसियर का साइज जान लेना है. बाप बनते ही मर्द आखिर बौरा क्यों जाते हैं... लोकल ट्रेन में सफर का चित्रण बहुत ही उम्दा है. पाठकों को भी लगेगा कि वे स्वयं लोकल ट्रेन में हैं और गांगुली की तरह सफर करते-करते उन्हें भी किसी से प्यार हो जाए. मंटों की कहानियों में देह की भाषा जिस तरह है, विजयश्री तनवीर की कहानियों में वैसा नहीं है. देह की भाषा में नग्नता नहीं है, पर नग्नता से कम भी नहीं है. इस कहानी में एक खामी है, कई जगह संवाद बंगाली भाषा में है, लेकिन उसका क्या अर्थ होता है, लेखिका ने नहीं बताया.‘एक उदास शाम के अंत में’ कल्पनाओं में जिस्म की चाहत की कहानी है. ‘खजुराओ’ कहानी का मतलब ही है कि किसी को छुए बिना प्रेम कैसे किया जा सकता है. ‘चिड़िया उड़’ की कहानी बताती है कि बिना रिश्ते का प्यार एक बंजारापन है. हर प्यार में रिश्ता होना चाहिए. विस्तृत रिश्तों की संक्षिप्त कहानियां बहुत कुछ कहती हैं, बस दिल से पढ़ें और प्यार की गहराइयों में डूब जाएं. कुल नौ कहानियां हैं, सभी में मेट्रो सिटी के मुहब्बत की कहानियां हैं. इसलिए शहरी पाठक हर कहानी में खुद को पाएगा.

Updated : 11 Oct 2018 3:03 PM GMT
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