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30 नवंबर को किसानों का ऐतिहासिक संसद मार्च

30 नवंबर को किसानों का ऐतिहासिक संसद मार्च
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किसान मुक्ति मार्च के पहले दिन स्वराज इंडिया अध्यक्ष योगेंद्र यादव व जय किसान आन्दोलन के संयोजक अभिक साहा के नेतृत्व में देशभर से आए किसानों ने बिजवासन से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च की। 26 किलोमीटर की यह यात्रा दिल्ली देहात में बिजवासन से शुरू होकर रामलीला मैदान पर समाप्त हुआ। इस किसान मार्च में विभिन्न राज्यों बिहार, झारखंड, उड़ीसा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि राज्यों के किसान शामिल हुए।
इस मौके पर मोदी सरकार को अब तक की सबसे किसान-विरोधी सरकार बताते हुए स्वराज इंडिया अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा कि "किसान मुक्ति मार्च" देश के किसानों की लूट, आत्महत्या, शोषण और अन्याय से मुक्ति की यात्रा है। आज की इस यात्रा में किसान अकेले नहीं है, बल्कि पूरा देश उनके साथ चल रहा है।

दिल्ली में किसानों का जमावड़ा

इससे पहले स्वराज इंडिया की दिल्ली देहात मोर्चा ने देश भर से आये किसानों का स्वागत किया और बिजवासन में कैम्प बनाकर उनके ठहरने का इंतज़ाम किया।
दो दिन की हो रही "किसान मुक्ति मार्च" की मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर किसान संसद द्वारा पारित किए गए दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को पास किया जाए। पहला कानून किसानों की ऋण मुक्ति का है, जबकि दूसरा कृषि उपज का उचित और लाभकारी मूल्य से जुड़ा है।
मार्च का समर्थन करने के लिए अलग-अलग समूह सामने आए हैं। मसलन स्टूडेंट फ़ॉर फार्मर्स, जर्नलिस्ट फ़ॉर फार्मर्स, आर्टिस्ट फ़ॉर फार्मर्स, लॉयर्स फॉर फार्मर्स और डॉक्टर्स फ़ॉर फार्मर्स जैसे समूहों ने किसानों के साथ यात्रा की। रामलीला मैदान पहुंचने के बाद 29 नवम्बर की शाम को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जय किसान आंदोलन के संयोजक अभीक साहा ने बताया कि देशभर का आक्रोशित किसान बार बार दिल्ली आने को मजबूर हो रहा है क्यूंकि उनके साथ बार बार छलावा हो रहा है। एक तरफ देश का पैसा लेकर बड़े बड़े पूंजीपतियों को विदेश भगा दिया जाता है, तो दूसरी तरफ़ किसानों के कर्ज़मुक्ति के वाजिब मांग को लगातार अनसुना किया जा रहा है। हमारी मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर किसानों की बदहाली पर चर्चा हो और किसान संसद में पारित हुए दोनों बिलों को देश की संसद में पास किया जाए।
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने किसान मुक्ति मार्च को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस ज़ोरदार प्रदर्शन का कारण है कि देश का बदहाल किसान अपनी पीड़ा और आवाज़ को सत्ता के शीर्ष में बैठे लोगों तक पहुंचाना चाह रहा है। यही कारण है कि 200 से ज़्यादा किसान संगठन आज विचारधारा की सीमाओं से ऊपर उठकर एक सामूहिक संघर्ष कर रहे हैं। सरकार में बैठे लोग हिन्दू मुसलमान के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, हम किसान नौजवान के नाम पर देश को बनाने के लिए संघर्षरत हैं।

Updated : 29 Nov 2018 11:55 PM GMT
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