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भारत को ‘पहले किसान’ की नीति पर चलना होगा

भारत को ‘पहले किसान’ की नीति पर चलना होगा
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विनायक राजहंस

किसान भारत कीअर्थव्यवस्था में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं, इसके बावजूद सबसे ज्यादा गरीब किसान ही हैं। देशमें ज्यादातर किसानों की अपनी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कोरोना महामारी ने किसानोंकी कमर तोड़कर रख दी है। उन्हें अपनी फसलों का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।

मौजूदा देशव्यापी लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने तीन ऐसी घोषणाएं की हैं जिनके बारे मेंकहा जा रहा है कि इनसे किसानों की जिंदगी में जबरदस्त बदलाव आएगा। ये बदलावहैं- एग्रीकल्चर मार्केटिंग को मंजूरी, फसल की एडवांस खरीद और एसेंशियक कमोडिटीएक्ट (1955) में बदलाव। इसके अलावा कृषिकी दशा सुधारने को फंड भी जारी किया गया।

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पीएम मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी के बारे मेंजानकारी दी है। इसमें उन्होने कृषिउपज के रखरखाव, परिवहन एवं विपणन सुविधाओं के बुनियादी ढांचेके लिए एक लाख करोड़ रुपए का कृषि ढांचागत सुविधा कोष, डेयरी उद्योग के लिए 15 हजार करोड़, पशुपालन के लिए 15 हजार करोड़, मछुआरों के लिए 20 हजार करोड़, मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ तथा देश में दस लाखहेक्टेयर जमीन पर औषधीय पौधों की खेती यानि हर्बल खेती के लिए 4000 करोड़ की घोषणाकी।

इसी समय देश में किसानों को लेकर दो ऐसी घटनाएँ हो जाती हैं, जिनके बारे में कहीं चर्चा नहीं हुई। हुई भी होगी तो बहुत न्यून स्तर पर। अलबत्ता तमाम न्यूज़ वेबसाइट पर तैरते जरूर दिखे हैं ये समाचार। इनमें से एक है महाराष्ट्र के नागपुर में एक किसान द्वारा आत्महत्या और दूसरी खबर है यूपी के अमेठी में किसान नेता की गोली मारकर हत्या कर देना।

पहले जरा खबर की मुख्तसर पड़ताल कर लेते हैं। पहले पहली खबर कीपड़ताल। खबर के मुताबिक महाराष्ट्र मेंनागपुर जिले के सावनेर तहसील में शनिवार (16 मई) को एक किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचानबोरगांव गांव निवासी कृष्ण उर्फ विलास नामदेव तेकाडे (50) के रूप में हुई। वह चिलचिलाती दोपहर में खेत में बेहोशमिला था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक, कृष्णलॉकडाउन के बाद से बेरोजगारथा।

दूसरी खबर भी 16 मई की ही बताई जाती है। पुलिस के मुताबिक देर शाम बाजार से वापस घर जा रहे भारतीय किसानयूनियन टिकैत गुट के जिला अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा (45) की अज्ञात हमलावरों ने लोनियापुर प्राथमिक स्कूल के पासगोली मार कर हत्या कर दी। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए और लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस हत्याकांड से पूराइलाका दहशत में आ गया। प्रमोद की हत्याक्यों की गई, इस बात का खुलासा फिलहाल तक नहीं हो सका है लेकिन इसके पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है।

हमें, आपको क्या मतलब है इन खबरों से, आए दिन हत्या और आत्महत्या होती रहती हैं। लेकिन नहीं, मतलब होना चाहिए। अन्नदाता की मौत सृष्टि के पालक की मौत है। इस पर रुककरसोचना चाहिए। कारण जाना चाहिए और निवारण खोजना चाहिए।

इंसानी तरक्की के इस चरम काल में जब हम चाँद और मंगल तक पहुँचगए, परमाणु ऊर्जा से सम्पन्न होने पर गर्व कर रहे हैं, खेल की कुछ विधाओं में अग्रणी होने पर इतरा रहे हैं, बुलेट ट्रेन का सपना देख रहे हैं, दुनिया की पाँचवींसबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का जश्न भी मना चुके हैं, दुनियाके तमाम शक्तिशाली देशों के नेता भारत की तरफ बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं..... ऐसे मेंदेश का अन्नदाता कहाँ खड़ा है, ठहरकर देखने की जरूरत है।

आखिर क्यों उसे अत्महत्या करनी पड़ रही है... आज भी? क्यों वह सबका पेट भरने के बाद भूखा रह जाता है... आज भी? क्या इसी तरह 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी हो पाएगी? माना कि अब एक बहाना मिल गया है कोरोना के रूप में, सारी असफलताओं का ठीकरा इसके सिर फोड़ने में कोई गुरेज नहीं होगा।

गांवों में आज किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पारहा है। दो रुपये किलो खीरा, दो रुपये किलो कद्दू और लौकी, पाँच रुपये किलो भिंडी, 10 रुपये किलो करेला, पाँच रुपये किलो टमाटर.... ये कोई भाव हैं? पत्तागोभीखेतों में जानवर चर रहे हैं, कोई पूछने वाला नहीं। किसान अत्महत्यानहीं करे तो आखिर क्या करे? कर्ज लेकर वह फसल बोता है, जिसमें घाटा होने की गुंजाइश ज्यादा होती है।

यह एक तरह से छलावा है और जमीनी हकीकत से बहुत दूर कि अमुक किसानवैज्ञानिक खेती से 3 लाख रुपये महीना कमा रहा है। हाँ होंगे कुछ ऐसे किसान, पर कितने? एक फीसदी भी नहीं होगी इनकी संख्या! करोड़ों किसान छोटे काश्तकार हैं, उन्हें लागत मूल्य ही वापस मिल जाए तो बहुत है। सिर्फ फंड जारीकर देने से किसानों की सूरत नहीं बदलने वाली, जमीनी हकीकत जानकार, भ्रष्टतंत्र को सुधारकर, योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाकर खेती किसानीको मजबूती दी जा सकती है।

सबसे जरूरी बात, सरकार को किसानों को अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखना होगा, क्योंकि पेट भरा रहेगा तभी दूसरे काम सोच पाएंगे। तरक्की की राह पर चलेंगे। भारत को आत्मनिर्भर बना पाएंगे। इस लिहाज से भारत को पहले किसान की नीति पर चलना होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Updated : 18 May 2020 4:52 AM GMT
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