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भारत के अग्रणी हेल्थकेयर प्रदाता ने वर्ल्ड हार्ट डे पर शुरू किया भारत को हार्ट स्मार्ट देश बनाने का अभियान

भारत के अग्रणी हेल्थकेयर प्रदाता ने वर्ल्ड हार्ट डे पर शुरू किया भारत को हार्ट स्मार्ट देश बनाने का अभियान
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- देब्दुलाल पहाड़ी -भारत के अग्रणी हेल्थकेयर प्रदाता, मणिपाल हॉस्पीटल्स ने “हार्ट हीरोज” बनाने के इरादे से आज अपना वर्ल्ड हार्ट डे अभियान, “गार्जियन्स ऑफ हार्ट” शुरू करने की घोषणा की। इस कॉरपोरेट अभियान की शुरुआत मणिपाल हॉस्पीटल्स के भिन्न केंद्रों में जैसे द्वारका (नई दिल्ली), जयपुर, बैंगलोर, विजयवाडा, मैंगलोर और गोवा में हुई। इस अभियान की शुरुआत के साथ ही मणिपाल का लक्ष्य आम आदमी को ‘हार्ट स्मार्ट’ बनने के लिए प्रेरित, शिक्षित और मोटिवेट करना है। इस तरह, ऐसे लोग स्वस्थ राष्ट्र के बड़े दर्शन में योगदान कर सकेंगे। मौजूदा अनुमानों से लगता है अभी भी हृदय की बीमारी भारत में और दुनिया भर में सबसे मारक है। दुर्भाग्य से भारत में इस समय हर साल हार्ट अटैक के लगभग 2 मिलियन मामले होते हैं और ज्यादातर पीड़ित युवा होते हैं।अभियान,गार्जियन्स ऑफ हार्ट के तहत चिकित्सक हार्ट फेलियर के दौरान पहली प्रतिक्रिया तकनीक पर प्रशिक्षण मुहैया कराएंगे यानी मेडिकल इमरजेंसी के लिए कार्डियो पलमोनरी रीससकिटेशन (सीपीआर) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस)। कार्डियो पलमोनरी रीससकिटेशन (सीपीआर) से हृदय और मस्तिष्क में रक्त का अहम प्रवाह बना रहता है। यह आगे के उपाय होने तक मस्तिष्क के काम काज को मैनुअली बनाए रखने की कोशिश है और जाना-माना प्रभावी तकनीक है जो बचे रहने की संभावना बढ़ा देता है। आधिकारिक तौर पर इस अभियान की शुरुआत शनिवार, 28 सितंबर 2019 को मणिपाल हॉस्पीटल द्वारका में होगी और जनता की भागीदारी के लिए खुली रहेगी। प्रशिक्षण पाने वाले सभी लोगों को चिकित्सकों द्वारा “हार्ट स्मार्ट” प्रमाणित किया जाएगा। बीएलएस और सीपीआर प्रशिक्षण के अलावा कार्डियोलॉजी विभाग स्ट्रेस मैनेजमेंट, डायट कंट्रोल, व्यायाम की दिनचर्या और हार्ट अटैक के भिन्न लक्षणों पर चर्चा करेगा जिनपर नजर रखना चाहिए। यूनिट प्रमुख मणिपाल हॉस्पीटल द्वारका रमण भास्कर का कहना है कि - जन स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने की बात हो तो मणिपाल हॉस्पीटल द्वारका हमेशा अग्रणी रहा है। हमलोग सीपीआर ट्रेनिंग देते रहे हैं ताकि लोगों को लाइफ सपोर्ट की बुनियादी तकनीक जानने की महत्ता समझने में सहायता कर सकें। हमारी योजना इसे दिल्ली के आस-पास के बाजारों में भी आगे बढ़ाने की है। हमारे पास कार्डियोलॉजी की एक एक्सपर्ट टीम है और इसके पास नवीनतम इनोवेटिव टेक्नालॉजी है जो हर तरह की आवश्यकताओं को हैंडल कर सकता है। अपने संरक्षकों के लिए हम विश्व स्तर की हेल्थकेयर सेवाओं तक पहुंच और आसान बनाएंगे।मणिपाल हॉस्पीटल ने गए साल एक देशव्यापी अभियान का आयोजन किया था ताकि शिक्षकों को हार्ट स्मार्ट तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा सके। इसके तहत 25,000 शिक्षकों को प्रमाणित किए जाने की भारी कामयाबी मिली। इस मौके पर अपने विचार रखते हुए मणिपाल हॉस्पीटल द्वारका में कार्डियैक साइंस के प्रमुख और मुख्य कार्डियो वस्कुलर सर्जन युगल मिश्रा कहते हैं कि –कार्डियैक अरेस्ट और हार्ट फेलियर के मामले निश्चित रूप से बढ़ रहे हैं। अध्ययन से पता चला है कि सडन कार्डियैक अरेस्ट के करीब 95 प्रतिशत शिकार अस्पताल पहुंचने से पहले मर जाते हैं और करीब 75% हार्ट अटैक घर में होता है। इसलिए कार्डियोपलमोनरी रीससकीटेशन (सीपीआर) में प्रशिक्षित होने से काफी काम हो सकता है और जानें बच सकती हैं। कार्डियैक फेलियर के मुख्य कारण हैं मोटापा, तनाव, धूम्रपान, शराब और जंक फूड। स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखना और दैनिक जीवन में स्वास्थ्यकर खाने की आदतें शामिल करना महत्वपूर्ण है। सावधानी बरत कर बीमार न होना बीमारी ठीक करने से बेहतर है और मैं लोगों से अपील करता है कि वे स्वस्थ जीवन को प्राथमिकता दें ताकि हृदय की बीमारियां दूर रहें।हृदय की बीमारियों और स्ट्रोक समेत कार्डियो वस्कुलर डिजीज से हर साल 17.9 मिलियन लोगों की मौत होती है। भारत में 20 प्रतिशत मौतें कॉरोनरी हार्ट डिजीज से होती हैं। वर्ष 2020 तक एक तिहाई मौतें इससे होंगी। दुख की बात यह है कि इनमें से कई भारतीय कम उम्र में ही मर जाएंगे। भारत में हृदय की बीमारी पश्चिम के मुकाबले 10 से 15 साल पहले होती है।

Updated : 27 Sep 2019 4:32 PM GMT
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