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केजरीवाल सरकार नहीं करती है केंद्र सरकार को सहयोग: भाजपा

केजरीवाल सरकार नहीं करती है केंद्र सरकार को सहयोग: भाजपा
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नई दिल्‍ली, ब्यूरो | हर साल डेढ़ लाख से अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में हो जाती है। इनकी व्यथा किसी उस परिवार से समझी जा सकती है जिसने अपने चिराग को इनमें खोया हो। उसका सामाजिक, आर्थिक और मानसिक संतुलन का तानाबाना छिन्न-भिन्न हो जाता है। उस परिवार के जीवन में आई इस शून्यता को कोई भी मुआवजा नहीं भर सकता है। आखिर हमारी सड़कों पर चल रहे इस खूनी खेल की गंभीरता के प्रति सरकार और समाज कब संजीदा होंगे। सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय के ट्रांसपोर्ट रिसर्च विंग के 2016 के आंकड़े भयावह दृश्य पेश करते हैं। वर्ष 2016 में सड़क हादसों में 1,50,785 लोगों की मौत हुई जबकि 4,94,624 घायल हुए थे। आंकड़ों के मुताबिक, करीब एक लाख लोगों पर 12 मौतें सड़क हादसों में होती हैं। साल 2007 से सड़क हादसों में होने वाली मौतों में अब 32 फीसद इजाफा देखा गया है। साल 1970 से इसमें दस गुना वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि दोपहिया वाहन सड़क हादसों की चपेट में ज्‍यादा आए। हिस्‍सेदारी के हिसाब से देखें तो दोपहिया वाहन 33.8 फीसद, कार जीप व टैक्‍सी 23.6 फीसद, ट्रक टेंपो व ट्रैक्‍टर 21 फीसद सड़क हादसों की चपेट में आए।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के साथ हुए सड़क हादसों में लोगों ने सबसे ज्‍यादा जान गंवाई। दोपहिया वाहनों के साथ दुर्घटनाओं में 34.8 फीसद, ट्रक के साथ 11.2 फीसद जबकि कार टैक्‍सी जैसे हल्‍के वाहनों के साथ हुए हादसों में 17.9 फीसद मौतें दर्ज की गईं। चौंकाने वाली बात यह कि सड़क के किनारे चलने वाले लोगों के साथ हुए हादसों में भी मौतों के मामले ज्‍यादा देखे गए। आंकड़ों की मानें तो पैदल यात्रियों के साथ हुए हादसों में 10.6 फीसद मौतें दर्ज की गईं। यहां तक कि साइकिल से चलने वाले भी महफूज नहीं रहे। साइकिल सवारों के साथ हुए हादसों में 1.7 फीसद मौतें दर्ज की गईं। पांच लाख बसों से 2.7 करोड़ से अधिक बच्चे रोजाना स्कूल जाते-आते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराना स्कूल प्रशासन से लेकर बस मालिक तक की जिम्मेदारी है। इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन के रोहित बालूजा ने अपने अध्ययन में पाया कि कहीं भी 160 किमी की परिधि में 500 से अधिक ब्लैक स्पॉट होते हैं। खराब डिजायनिंग के चलते जा रही इन जानों के लिए किसी पर कार्रवाई नहीं होती। संशोधित कानून में इसका प्रावधान है।

Updated : 22 Sep 2019 10:56 AM GMT
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