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रोड रोलर और मजदूर का पेट !

सरकार का एक भतीजा बड़ा ठेकेदार है। उसी ने निर्णय लिया कि सड़क के ऊपर एक और सड़क बना दी जाए। इसलिए सड़क के ऊपर लंबे से पिलर खड़े कर दिए हैं। सड़क की छाती पर! पिछले 3 सालों से ये सड़क की छाती पर मूंग दल रहे हैं। इन्हीं पिलरों से ठेकेदार सरकार के पेट पल रहे हैं।

रोड रोलर और मजदूर का पेट !
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रामविलास जांगिड़

व्यंग्य

शहर की पुरानी सड़क। सड़क घुट-घुट कर मर रही है। दोनों तरफ के दुकानदार फुटपाथ पार कर बीच सड़क तक पसर चुके हैं। या यूं कहिए सरकार ने इनको सड़क पार तक पसार दिया है। सड़क का विधिपूर्वक गला घोंट दिया गया है। सरकार का एक भतीजा बड़ा ठेकेदार है। उसी ने निर्णय लिया कि सड़क के ऊपर एक और सड़क बना दी जाए। इसलिए सड़क के ऊपर लंबे से पिलर खड़े कर दिए हैं। सड़क की छाती पर! पिछले 3 सालों से ये सड़क की छाती पर मूंग दल रहे हैं। इन्हीं पिलरों से ठेकेदार सरकार के पेट पल रहे हैं। मिट्टी को सीमेंट और लकड़ी को इस्पात बनाने का जादुई चमत्कार यहां दिखाया जा रहा है। कोई पिलर कार को, तो कोई पिलर कोठी को जन्म दे रहा है। रोड रोलर, क्रेन, ट्रैक्टर, मजदूर, सरकार आदि का घालमेल मचा है। पिलर के पास एक मजदूर पीठ टिकाए अध-बैठा है। बिखरे बाल चिपके गाल। जैसे नेताजी की ईमानदारी हो बेहाल। पेट ढूंढ़ने के लिए जाने कितने कोलंबस मर चुके हैं। मजदूर का पेट ढूंढ़ने के लिए सीबीआई को काम दे रखा है। सीबीआई ने कोर्ट में केस दायर किया हुआ है। न्यायालय भी पेट ढूंढ़ने की नौकरी में लगा हुआ है। तारीखें पड़ रही है। सीबीआई, ठेकेदार, मजदूर आदि अपने ढंग से अलग-अलग तारीख लिए जा रहे हैं। लेकिन मजदूर का पेट नहीं मिल पा रहा है।

फिलहाल मजदूर पिलर के पीठ टिकाए बीड़ी फूंकने में लगा है। उसने बीड़ी का एक गहरा जहर अपने पेट में उतारा ही था कि सीन पर पुलिस प्रकट हो गई। पुलिस जिसकी मूछें गाल पर साम्राज्य करती हुई आंखों की ओर निकल गई है। गाल गुलगुले होकर जमीन में मिलने के लिए लालायित हो रहे हैं। तोंद का विस्तार राजधानी तक हो गया है। जितनी तोंद उतने ही विस्तार मग्न कूल्हे! दोनों विपरीत ध्रुव! बेल्ट ने हाथ जोड़कर तोंद बांधने के लिए सख्त मना कर दिया है। कमर नाम की चीज ढूंढ़ना नामुमकिन! वैसे पुलिस महकमें में कमर नाम की चीज होती भी नहीं है। इसी के साथ ही रीढ़ की हड्डी जाने कौनसे मांस लोथड़े में विलीन हो गई है। पुलिस ने गरीब मजदूर को डंडा फटकारा और मूंछों के बीच कहीं से भोंपू बजा- तुम्हें पता है? अब तुम्हें चालान भरना पड़ेगा। बीड़ी का एक कश फेंफड़े में दबाते हुए मजदूर फड़फड़ाया- किसका चालान हुजूर! अबे बकवास करता है क्या? नहीं तो हुजूर! देख नहीं रहा है! सरकारी पिलर पर पीठ लगा कर बैठा है। मालूम नहीं तुम्हें! सरकारी पिलर पर पीठ लगाकर असरकारी किलर बन रहा है! जी हुजूर हमें ये सब मालूम नहीं है! तो तुम्हें मालूम करना चाहिए! आज तुमने सरकारी पिलर पर पीठ टिकाई है। कल तुम इस सरकारी सड़क पर पीठ मार दोगे। परसों सरकारी सचिवालय पर पीठ टिका दोगे। निकालो चालान के 2,400 रुपए! हुजूर इतने पैसे मेरे पास कहां? व्यापार चल रहा था कि दूर गाड़ी के पास खड़ा थानेदार गुर्रा उठा- अबे क्या बकवास लगा रहा है? अभी तक तूने चालान नहीं बनाया? हुजूर! यह अपने आप को गरीब बता रहा है। स्साला हमसे ज्यादा गरीब बनता है! कपड़े खुलवाकर ले आओ। जल्दी! मजदूर के कपड़े खुलवाए जा रहे हैं। सड़क पर कायदे से सरकारी बुलडोजर चल रहा है!

Updated : 11 Jun 2021 7:26 AM GMT
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Shivani

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