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LIVE : कुंभ में विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद शुरू, मुख्य मुद्दा- राम मंदिर

LIVE : कुंभ में विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद शुरू, मुख्य मुद्दा- राम मंदिर
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प्रयागराज (ब्यूरो रिपोर्ट) : कुंभ में विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद गुरुवार की दोपहर एक बजे शुरू हो गई है, जिसमें राम मंदिर निर्माण का मुद्दा ही छाया हुआ है. माना जा रहा है कि दो दिन तक चलने वाली इस धर्म संसद में 1 फरवरी को राम मंदिर को लेकर कोई न कोई फैसला अवश्य ले लिया जाएगा.बता दें कि धर्म संसद से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच सुबह ही मुलाकात हुई. विहिप ने धर्म संसद के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की हैं, इसमें देशभर के तकरीबन 5,000 साधु-संत जुट रहे हैं. विहिप के इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े पदाधिकारी भी पहुंच रहे हैं. विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार और अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे समेत वीएचपी की पूरी कार्यकारिणी कुंभ में हो रहे इस आयोजन में मौजूद है.जानकारी मिली है कि आरएसएस प्रमुख के अलावा भैयाजी जोशी और दत्तात्रेय होसबोले भी धर्म संसद में शिरकत कर रहे हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ मोहन भागवत से तो मिले ही, वह कुंभ क्षेत्र के सेक्टर-15 में पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से भी मिलने के लिए पहुंचे. हालांकि सेक्टर-15 में ही जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी और राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से मुलाकात करने के बाद सीएम योगी गोरखपुर के लिए रवाना हो गए.राम मंदिर पर 1 फरवरी को प्रस्ताव संभव कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के तकरीबन हर जिले से संतों के प्रतिनिधित्व पर विहिप ने ताकत झोंकी है. शाम पांच बजे तक धर्म संसद के पहले दिन की कार्यवाही चलेगी. बताया जा रहा है कि विहिप की धर्म संसद के पहले दिन केरल के सबरीमाला मंदिर विवाद, धर्मांतरण का मुद्दा और हिंदुओं की संस्कृति पर हो रहे हमले जैसे मसलों पर मंथन होगा, वहीं दूसरे दिन यानी 1 फरवरी को राम मंदिर का मुद्दा रखा जाएगा. इस दौरान मंदिर मुद्दे पर एक प्रस्ताव भी पास किया जा सकता है.बुलाया गया है विदेशों में रह रहे संतों को भी विहिप की अब तक की सबसे बड़ी धर्म संसद कुंभ में विदेश में रह रहे संतों को भी आमंत्रित किया गया है. वनवासी क्षेत्रों से लेकर कश्मीर, उत्तराखंड और केरल-तमिलनाडु के संतों को भी इसमें बुलाया गया है. वीएचपी की कोशिश राम मंदिर के मुद्दे पर पूरे देश के संतों को एक मंच पर लाना है ताकि उनसे ऐसा मार्गदर्शन मिले जो आगामी आंदोलन का रास्ता तय कर सके.'परमधर्म संसद' ने 21 फरवरी तय की है मंदिर निर्माण की तारीख बता दें कि विहिप की धर्म संसद से इतर प्रयागराज में संतों की धर्म संसद के दौरान ऐलान किया गया है कि संत समाज के लोग अगले महीने प्रयाग से अयोध्या के लिए कूच करेंगे. ‘परमधर्म संसद’ की अगुआई कर रहे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, 'हम अयोध्या में 21 फरवरी 2019 को राम मंदिर की नींव रखेंगे. हम कोर्ट के किसी भी आदेश का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं. जब तक सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के आदेश को खारिज नहीं कर देता, तब तक यह लागू है. वहां रामलला विराजमान हैं, वह जन्मभूमि है.'

Updated : 31 Jan 2019 9:26 AM GMT
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