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लोकसभा 2019: सहयोगियों को साधने में BJP ने मारी बाजी

लोकसभा 2019: सहयोगियों को साधने में BJP ने मारी बाजी
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नई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) : पिछले साल कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण में जब सभी विपक्षी दलों के नेता एक साथ शामिल हुए थे तब लगा था कि मोदी-शाह की जोड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. उसके बाद से अब तक विपक्षी दलों ने कई मौकों पर शक्ति प्रदर्शन किया. लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले अपने सहयोगियों को संभालकर रखने में कांग्रेस की तुलना में बीजेपी आगे नजर आ रही है.एक तरफ कांग्रेस जहां सीट शेयरिंग को लेकर क्षेत्रीय पार्टियों के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही है, वहीं दूसरी तरफ रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बावजूद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सहयोगी पार्टियों से हाथ मिलाने में सफलता हासिल कर ली है. एनडीए को एकजुट बनाए रखने के लिए शाह ने सहयोगी दलों को खुले हाथ से सीटें ऑफर की हैं.कांग्रेस में अभी तक असमंजस की स्थिति है कि वह उत्तर प्रदेश या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गठबंधन करेगी या अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में अभी तक छोटी पार्टी रही बीजेपी ने एआईएडीएमके और अन्य छोटी पार्टियों को एनडीए में शामिल करने में सफलता हासिल कर ली है. जबकि डीएमके के साथ गठबंधन कर चुकी कांग्रेस को DMDK और PMK जैसी पार्टियों का साथ नहीं मिल सका है.बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में सहयोगियों का गणित काफी महत्वपूर्ण है. तीनों ही राज्यों में गठबंधन को देखें तो बीजेपी का पाला मजबूत नजर आ रहा है जबकि कांग्रेस अभी भी सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग पर चर्चा में उलझी हुई है.सपा-बसपा ने कांग्रेस को यूपी में अपने गठबंधन से बाहर रखा है, देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य में इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है जहां कुछ प्रतिशत वोट पूरी तस्वीर बदलने के लिए काफी हैं. यूपी में बीजेपी के दो सहयोगी दलों- अपना दल और सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता बीजेपी के प्रति लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. लेकिन बीजेपी को विश्वास है कि वे एनडीए नहीं छोड़ेंगे.40 सीटों वाले बिहार में विपक्ष के महागठबंधन में अभी तक लालू के राजद, कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा के आरएलएसपी और जीतन राम मांझी के HAM के बीच सीट शेयरिंग पर अंतिम बात नहीं हो पाई है. दूसरी तरफ बीजेपी, जेडीयू और राम विलास पासवान की एलजेपी ने ऐलान कर दिया है कि वे क्रमशः 17, 17 और 6 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी.2014 में बीजेपी ने बिहार की 31 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 22 में जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार बीजेपी यहां 17 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हो गई है. पिछले लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली का कहना है कि बीजेपी और विपक्ष के महागठबंधन में सबसे बड़ा फर्क यही है कि उन्हें पता ही नहीं है कि उनका नेता कौन है.महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच 25 और 23 सीटों को लेकर समझौता हुआ है. शिवसेना लंबे समय से अकेले चुनाव लड़ने की धमकी दे रही थी. लेकिन बीजेपी ने लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटों का ऑफर देकर शिवसेना को गठबंधन में बनाए रखा है. दूसरी तरफ कांग्रेस अभी तक महाराष्ट्र में एनसीपी और कर्नाटक में अपने पार्टनर जेडीएस के साथ सीटों पर समझौता नहीं कर सकी है.कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इस संबंध में पार्टी मंगलवार को गुजरात में होने वाली सीडब्लूसी की बैठक में फैसला करेगी. लोकसभा की 543 सीटों के लिए सात चरणों में चुनाव होंगे. पहले चरण की वोटिंग 11 अप्रैल को होगी और आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होगा. नतीजों की घोषणा 23 मई को होगी.बीजेपी ने पूर्वोत्तर के राज्यों में भी गैर-कांग्रेसी पार्टियों को अपने साथ जोड़े रखने में सफलता हासिल की है. हालांकि, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी कोई गठबंधन नहीं कर पाई है.

Updated : 12 March 2019 5:30 AM GMT
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