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#मीटू से उतरते नकाब

#मीटू से उतरते नकाब
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एक आधी आबादी का दूसरी आधी आबादी के लिए जो सवाल कब्र में दफ्न थे, वो आज बाहर आ रहे हैं. जो आवाजें वक्त की गर्द के नीचे दब गई थीं या दबा दी गई थीं, वो अब मुखर हो रही हैं एक अभियान के जरिए...मी टू के जरिए. पूरी दुनिया में हंगामा मचाने के बाद यह अभियान अब भारत में भी जोर-शोर से चल रहा है. आए दिन महिलाएं आगे आकर अपने उत्पीड़न के अनुभव साझा कर रही हैं. हर दिन नए आरोप, नए चेहरे. इसकी जद में फिल्म इंडस्ट्री के लोग तो आ ही रहे थे, पत्रकार और राजनेता भी आ गए. जाने अभी और कितने चेहरे सामने आएंगे. इसके जवाब में पुरुषों ने भी अभियान छेड़ दिया है. देश में अजब माहौल है. इसी माहौल की पड़ताल करती इस बार की आवरण कथा.सम सामयिक ¦ विनायक राजहंसजो काम सड़क पर बड़े-बड़े आंदोलन नहीं कर पाते, उसे सोशल मीडिया पर छिड़े मी टू अभियान ने कर दिखाया है. स्त्री अस्मिता को लेकर शायद ही कभी ऐसा आंदोलन देश में छिड़ा हो और शायद ही कभी महिलाओं ने अपने उत्पीड़न को लेकर अपनी आवाज इतनी बुलंद की हो. स्त्री अस्मिता पर जो प्रहार कल हुए थे या आज हो रहे हैं, उसके जख्म अब दिखाई दे रहे हैं. नासूर बन चुके ये जख्म फिर से हरे हो रहे हैं और पितृसत्तात्मक समाज को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, साथ ही यह अपील भी कर रहे हैं कि हमारा दर्द तुम भी महसूस करो. आखिर यह तुम्हारे दिए ही तो हैं.कुछ समय पहले पूरी दुनिया में शुरू हुआ मी टू अभियान इन दिनों भारत में भी छाया हुआ है. इस अभियान के जरिये एक के बाद एक नए आरोप सामने आ रहे हैं. विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं. आए दिन महिलाएं आगे आकर अपने साथ हुए उत्पीड़न का अनुभव साझा कर रही हैं और बेझिझक बोल रही हैं. इस अभियान के लपेटे में न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के लोग बल्कि पत्रकार और राजनेता भी आ रहे हैं. पूर्व पत्रकार और केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे एमजे अकबर का नाम सबसे ऊपर है. उनके खिलाफ दर्जन भर महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. यही नहीं, एक विदेशी महिला पत्रकार ने भी उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है. अपने ऊपर लगे आरोपों के चलते अकबर को मंत्रिमंडल से इस्तीफा तक देना पड़ा. इस्तीफे से पहले उन्होंने अपने ऊपर आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों के खिलाफ केस भी दर्ज कराया. राफेल मुद्दे पर घिरी सरकार इस नए और अजब मामले को लेकर असहज स्थिति में दिखी. सरकार के मंत्रियों में दो फाड़ हो गया. कोई मी टू के पक्ष में है तो कोई इसे नजरअंदाज कर रहा है. बहरहाल देखना यह है कि यह अभियान अभी कहां तक चलता है और कितने लोग इसकी गिरफ्त में आते हैं.तनुश्री ने किया श्री गणेशसियासत, मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल ला देने वाला मी टू अभियान दरअसल विदेश से आया है, जिसका जिक्र आगे आएगा. फिलहाल यह बताते चलें कि भारत में इस अभियान की शुरुआत कुछ दिन पहले बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर पर छेड़खानी और गलत व्यवहार का आरोप लगाते हुए की थी. इसके बाद इंडस्ट्री की अन्य कई महिलाएं सामने आने लगीं. वर्क प्लेस पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ बॉलीवुड से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे मीडिया, कला, टीवी, राजनीति और दूसरे कई क्षेत्रों में फैल गया. महिलाएं अपने साथ हुए उत्पीड़न को लेकर खुलकर बोलने लगीं. धीरे-धीरे उनकी आवाज बुलंद होती गई.कई बड़े नाम आए सामनेऐसा नहीं है कि इस अभियान के पहले कभी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले नहीं आते थे, आते थे और महिलाएं अपने अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर भी करती थीं, लेकिन उसका कोई व्यापक असर नहीं दिखा. नाना पर तनुश्री के आरोप लगाने के बाद यह अभियान सामने आया. महिलाएं खुलकर बोलने लगीं. फिल्म और टीवी इंडस्ट्री की तमाम महिलाओं ने बड़े-बड़े दिग्गज कलाकारों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया. नाना पाटेकर के अलावा इस अभियान की जद में आलोक नाथ का नाम आना चौंकाने वाला रहा. इनके अलावा सुभाष घई, विकास बहल, साजिद खान, विवेक अग्निहोत्री, उत्सव चक्रवर्ती, कैलाश खेर अभिजीत, तोशी, वरुण ग्रोवर और चेतन भगत भी लपेटे में आए. संगीतकार अनु मलिक पर भी आरोप लगे और उन्हें इंडियन आइडल के जज पद से हटना पड़ा. साजिद खान का नाम आने से उनके निर्देशन में बन रही फिल्म ‘हाउसफुल 4’ की शूटिंग तक रोक देनी पड़ी. फिल्म के अभिनेता अक्षय कुमार ने काम करने से ही मना कर दिया. साजिद इस प्रोजक्ट से हटे और कोई दूसरा निर्देशक आया तभी इसकी शूटिंग शूरू हो सकी.यह अभियान यहीं नहीं रुका. इसके बाद जा पहुंचा पत्रकारिता के क्षेत्र में, जहां एमजे अकबर और विनोद दुआ जैसे पत्रकार पर आरोप लगे. फिर तो कई क्षेत्रों में महिलाएं मुखर होने लगीं और मी टू हैशटैग के साथ अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर साझा करने लगीं. यह सिलसिला अभी जारी है. इसका असर यह रहा कि नाम आने के बाद कई संस्थानों ने अपने कर्मचारियों के खिलाफ जांच की बात कही. कई को तो नौकरी तक गंवानी पड़ी.ऐसे हुई मी टू अभियान की शुरुआतमी टू अभियान की शुरुआत कैसे और कब हुई, इसको लेकर थोड़ा संशय है. कहा जा रहा है कि यह अभियान पिछले साल अक्टूबर में तब शुरू हुआ, जब हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन पर कई मशहूर अभिनेत्रियों ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे. इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा चला और उन्हें गिरफ्तार तक किया गया. देखते-देखते इस अभियान के तहत अन्य अभिनेत्रियां जुड़ती गईं और वाइंस्टीन का करियर खत्म हो गया. दूसरी तरफ, यह कहा जा रहा है कि इस अभियान की शुरुआत की दास्तान कुछ और ही है. इसके मुताबिक, अक्टूबर 2017 में सोशल मीडिया पर मी टू हैशटैग के साथ लोगों ने वर्क प्लेस पर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न या यौन हमलों की कहानियां शेयर करना शुरू किया. इससे पहले 2006 में टैराना बर्क नाम की एक अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता ने ‘मी टू’ शब्द को इस्तेमाल किया था. लेकिन यह शब्द युग्म 2017 में तब चर्चा में आया, जब अमेरिकी अभिनेत्री अलिसा मिलानो ने ट्विटर पर इसका इस्तेमाल किया. उन्होंने लोगों को अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में ट्वीट करने के लिए कहा ताकि लोग समझ सकें कि यह कितनी बड़ी समस्या है. मिलानो की यह कोशिश कामयाब हुई और मी टू हैशटैग इस्तेमाल करते हुए बहुत से लोगों ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर साझा की. तभी से हैशटैग के रूप में मी टू पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जाने लगा. आज यह अभियान न सिर्फ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहा है बल्कि वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन बन चुका है.कानून में यह है प्रावधानहर अपराध की तरह इसके लिए भी देश में कानून है. यौन उत्पीड़न के मामले में अगर आरोप सही साबित होता है तो कानून में तैयार किए गए कई एक्ट और अपराध के मुताबिक, दोषी को 3 साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है. अगर आपके साथ भी किसी तरह का यौन अपराध हुआ है तो आप मीटू अभियान का इस्तेमाल तो कर ही सकते हैं, कानून का भी सहारा ले सकते हैं. हां, बस इस बात का ध्यान रखना होगा कि इसका गलत इस्तेमाल न हो. क्योंकि मी टू अभियान पर ऐसे आरोप भी लग रहे हैं कि कुछ महिलाएं किसी पुरु ष के साथ संबंध विच्छेद या अन्य किसी लोभ या द्वेषवश यौन शोषण के आरोप लगा रही हैं.उधर, राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन सभी महिलाओं से शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, जिन्होंने मी टू के तहत अपने साथ हुए उत्पीड़न को सार्वजनिक किया है या फिर किन्हीं कारणों से चुप हैं. आयोग का कहना है कि वो महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. आयोग ने अब तक ऐसी कई महिलाओं से संपर्कभी किया है.

Updated : 17 Nov 2018 8:13 AM GMT
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