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राष्ट्रीय समस्या देश में बढ़ते प्लास्टिक को ख़त्म करने का लिया गया संकल्प

राष्ट्रीय समस्या देश में बढ़ते प्लास्टिक को ख़त्म करने का लिया गया संकल्प
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नई दिल्ली, ब्यूरो | बापू के दौर में प्लास्टिक कचरे की समस्या कम थी। फिर भी वे गंदगी को खत्म करने और साफ-सफाई, स्वच्छता को बढ़ाने के लेकर बहुत सक्रिय रहते थे। वे कहते थे- राजनीतिक स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी स्वच्छता है। यदि कोई व्यक्ति स्वच्छ नहीं है तो वह स्वस्थ नहीं रह सकता है। बेहतर साफ-सफाई से ही भारत के गांवों को आदर्श बनाया जा सकता है। नदियों को साफ रखकर हम अपनी सभ्यता को जिंदा रख सकते हैं। स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह अपना लो कि वह आपकी आदत बन जाए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भले ही आज हमारे बीच सशरीर नहीं हैं लेकिन उनके विचार आज भी हमारे लिए प्रेरणास्नोत हैं। उन पर अमल करके हम आज भी दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्याओं का आसान समाधान खोज सकते हैं। वे खुद के काते सूत से कपड़े पहनते थे और दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करते थे।

आज भी किसी गांधीवादी को देखिए तो कपड़े का झोला कंधे पर जरूर लटका होता है। प्रकृति को संरक्षित कर अपनी अधिकांश जरूरतें उसी से पूरी करने पर उन्होंने हमेशा जोर दिया। जरूरतों को भी संयमित और नियंत्रित करने पर हमेशा बल रहा। कृत्रिम और रासायनिक उत्पादों के इस्तेमाल से बचने की सलाह प्रमुखता में रही। उनके इन विचारों को आत्मसात करते तो शायद प्लास्टिक का आज अंबार नहीं लगता। कहते हैं जब से जागो तभी सवेरा। अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है। महात्मा की 150वीं जयंती से बड़ा पवित्र मौका और क्या हो सकता है जब हम उनके बताए रास्ते पर चलकर प्लास्टिक कचरे समेत देश की तमाम बड़ी समस्याओं का समाधान तलाशने का संकल्प लें।

Updated : 29 Sep 2019 9:17 AM GMT
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