Top
Home > राष्ट्रीय > सुप्रीम कोर्ट का फैसला: जब नहीं खुल रहे स्कूल तो इतनी होनी चाहिए फीस...

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: जब नहीं खुल रहे स्कूल तो इतनी होनी चाहिए फीस...

कोरोना की पहली लहर में साल भर स्कूल बंद रहने के बाद मार्च में जैसे ही खुले उन्हें फिर बंद करने की नौबत आ गई। फीस का मामला देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया और अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: जब नहीं खुल रहे स्कूल तो इतनी होनी चाहिए फीस...
X

उदय सर्वोदय

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के इस दौर में हर कोई परेशान है। स्कूल लंबे समय से बंद हैं और पढ़ाई और फीस को लेकर अभिभावक परेशान हैं। पिछले साल कई राज्यों में फीस का मामला कोर्ट में पहुंचा। अलग - अलग राज्य सरकारों की ओर से फीस को लेकर आदेश दिए गए, जिसको लेकर कहीं स्कूल प्रशासन तो कहीं अभिभाभवक ही कोर्ट पहुंचे। फीस का मामला देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया और अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश भी जारी कर दिए हैं। पैरेंट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राहत वाला फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि स्कूल बंद हैं। उन्हें कैंपस में दी जाने वाली कई सुविधाओं का खर्च नहीं उठाना पड़ रहा है। इसलिए संचालन का खर्च कम हो गया है। इसलिए उन्हें ऑनलाइन क्लासेस की फीस जरूर घटानी चाहिए।

कोरोना की पहली लहर में साल भर स्कूल बंद रहने के बाद मार्च में एक फिर खुले ही थे कि बंद करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार राजस्थान के शैक्षणिक सत्र 2020-21 स्कूल फीस के मसले पर सुनवाई हुई स्कूल प्रशासन और अभिभावकों को कोर्ट की ओर से कई निर्देश दिए गए। फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो प्रमुख बातें कही गई उसमें -

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के 36,000 गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को सोमवार को निर्देश दिया कि वे शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों से सालाना 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें।

फीस का भुगतान न होने पर किसी भी छात्र को वर्चुअल या भौतिक रूप से कक्षा में शामिल होने से न रोका जाए और न ही उनका परिणाम रोका जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा जिसमें राजस्थान विद्यालय (शुल्क नियमन) कानून 2016 और स्कूलों में फीस तय करने से संबंधित कानून के तहत बनाए गए नियम की वैधता को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया गया था।

शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों या अभिभावकों द्वारा शुल्क का भुगतान छह बराबर किस्तों में किया जाएगा।

महामारी की वजह से लागू पूर्ण लॉकडाउन की वजह से एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका व्यक्तियों, उद्यमों, उपक्रमों और राष्ट्र पर गंभीर असर पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि स्कूल अपने छात्रों को और छूट देना चाहें तो दे सकते हैं।

कोर्ट ने कहा, 'शैक्षणिक संस्थानों के मैनेजमेंट को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। लोग महामारी के चलते परेशानियों का सामना कर रहे हैं। स्कूलों को बच्चों और अभिभावकों को राहत देने वाले कदम उठाने चाहिए।'

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कैंपस में स्टूडेंट्स को जो सुविधाएं दी जाती हैं, वो मौजूदा हालात में उन्हें नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में उसके पेमेंट से स्कूलों को फायदा हो रहा है और स्कूलों को निश्चित तौर पर इस फायदे से बचना चाहिए। कानूनन तो स्कूल ऐसी सुविधाओं के लिए स्कूल फीस नहीं ले सकते, जो इन हालात के चलते छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं।

Updated : 4 May 2021 2:36 PM GMT
Tags:    

Shivani

Magazine | Portal | Channel


Next Story
Share it
Top