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नई इबारतों की सियासत

नई इबारतों की सियासत
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छत्तीसगढ़ में इस बार ज्यादातर विधानसभाओं में त्रिकोणीय संघर्ष है. ऐसे में सवाल यह है कि सियासी मिथक टूटेंगे या फिर दोहराये जाएंगे. जोगी बिन कांग्रेस और कांग्रेस बिन जोगी की स्थिति से क्या जोगी किंग मेकर बनेंगे?रायपुर से ¦ रमेश कुमार ‘रिपु’छत्तीसगढ़ के चुनावी समर में पहली बार जोगी बिन कांग्रेस और कांग्रेस बिन जोगी की स्थिति है. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बसपा सुप्रीमो मायावती और सीपीआई से गठबंधन कर सभी सियासी दलों को चौंका दिया है. इस वजह से अब अमूमन हर विधानसभा में त्रिकोणीय संघर्ष माना जा रहा है. पहली बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी सपा से गठबंधन किया है. समझौते के तहत वह स्वयं 70 व सपा 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कड़े मुकाबले की आंशका में ही भाजपा ने 78 उम्मीदवारों की पहली सूची में 14 वर्तमान विधायकों सहित एक मंत्री का टिकट काट कर 11 महिलाओं को टिकट दिया है. सियासी हालातों से साफ है कि 2018 के चुनाव में कई मिथक टूट सकते हैं. अभी तक कहा जाता रहा है कि बस्तर से सत्ता का रास्ता निकलता है, लेकिन इस बार लगता है बिलासपुर से सत्ता का रास्ता निकलेगा. दरअसल बिलासपुर संभाग में 24 सीटें हैं. इनमें 15 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं. फिलहाल इन 24 सीटों में कांग्रेस के पास 11, भाजपा के पास 12 और बसपा के पास एक सीट है. वहीं प्रदेश की दस अनुसूचित जाति की सीट में 7 पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का कब्जा है. देखा जाए तो अनुसूचित जन जाति की कुल 34 सीटें हैं. मायावती-जोगी में हुए समझौते के अनुसार बसपा 35 और जोगी की पार्टी 55 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दो सीट सीपीआई को बस्तर की बसपा के कोटे से दी गई है, कोंटा और दंतेवाड़ा विधानसभा की.बसपा, जोगी गठबंधन के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच और निर्दलीय त्रिकोणीय संघर्ष के बीच वोट काटने का काम करेंगे. बस्तर की 12 सीटों में 8 कांग्रेस और 4 भाजपा के पास है. राजनांदगांव में खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी और मोहलामानपुर कुल 6 सीटें हैं, जिसमें भाजपा और कांग्रेस के पास तीन-तीन सीटें है. राजनांदगांव से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला कांग्रेस से चुनाव लड़ रही हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि विधानसभा में हर प्रत्याशी को 28 लाख रुपये खर्च करने की छूट है, लेकिन करुणा शुक्ला के पास न तो सोना है और न ही चांदी. उनके पास बैंक बैंलेस के नाम पर मात्र 12 सौ रुपये हैं.धारणा बदलने के आसारऐसा माना जाता है कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 29 सीटों में जो विजय पाता है, वह राज्य की सत्ता संभालता है, किंतु यह धारणा 2013 में बदल गई जब भाजपा ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में से मात्र 9 सीटें जीतकर राज्य में सत्ता संभाली. अनुसूचित जाति और जनजाति को छोड़कर सामान्य सीटों पर कभी-कभार ही कुछ सीटों पर जातिगत धु्रवीकरण होता दिखाई दिया था, किंतु चुनाव के आंकड़ों ने यह सिद्ध कर दिया कि राज्य के पूरे चुनाव परिणाम को वह धु्रवीकरण प्रभावित नहीं कर सका था.गोंगपा और बसपा की स्थितिगोंगपा का 14 सीट वाले सरगुजा संभाग में बसपा से ज्यादा प्रभाव है, वहीं 24 सीट वाले बिलासपुर संभाग में बसपा कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है. रायपुर संभाग की 5, दुर्ग और बस्तर संभाग की एक-एक सीट पर भी बसपा का अच्छा प्रभाव है. इस दृष्टि से गोंगपा से बसपा का फैलाव अधिक है. 2003 में बसपा के 54 प्रत्याशी चुनावी समर में थे. बसपा को 4 लाख 29 हजार 334 वोट मिले थे. सरगुजा में दोनों के पास सात-सात सीटें हैं. प्रदेश की 6 सीटें ऐसी हैं, जिन पर बसपा कभी न कभी चुनाव जीत चुकी है. कुछ सीटों पर वो रनर अप भी रही है.एक घर में तीन दलअजीत जोगी, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके थे लेकिन पार्टी ने तय किया कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़कर सभी 90 प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करेंगे. मारवाही विधानसभा की जनता के दबाव में वे अब यहां से चुनाव लड़ेंगे. अमित जोगी मनेन्द्रगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं. रेणू जोगी के टिकट पर सस्पेंस है. संभवत: कांग्रेस उन्हें टिकट नहीं देगी. ऐसे में वो जोगी की पार्टी से चुनाव लड़ सकती हैं लेकिन चर्चा है कि भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाना चाहती है. दूसरी ओर जोगी की बहू ऋचा जोगी बसपा के टिकट पर अकलतरा से चुनाव लड़ रही हैं. वो पहली बार चुनाव में उतर रही हैं यानी जोगी के घर में तीन पार्टी के लोग रहते हैं.किस दल में कितने डॉनप्रदेश के कुल 14 विधायकों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें 8 कांग्रेस और 6 भाजपा के विधायक हैं. गंभीर अपराधों की श्रेणी में 8 पर कांग्रेस के और 2 पर भाजपा के विधायकों के मामले दर्ज हैं. ये भाजपा विधायक हैं वन मंत्री महेश गागड़ा और विधायक संतोष उपाध्याय. इन दोनों पर एक एक गंभीर प्रकरण दर्ज हैं, वहीं जोगी की पार्टी में अमित जोगी पर दो प्रकरण दर्ज हैं. विक्रम उसेंडी इकलौते सांसद हैं, जिन्हें संगठन ने अंतागढ़ से टिकट दिया है. आईएएस की नौकरी छोड़ बीजेपी का दामन थामने वाले ओम प्रकाश चौधरी को खरसिया से और हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने वाले रामदयाल उइके को भी टिकट दिया गया है.इन विधायकों का कटा टिकटबीजेपी ने मंत्री रमशीला साहू, चंद्रपुर विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव, लैलूंगा से सुनीति राठिया, वैशालीनगर से विद्यारतन भसीन, तखतपुर से राजू क्षत्रीय, अंतागढ़ से भोजराज नाग और आरंग से नवीन मारकंडेय का टिकट भाजपा ने काट दिया है. संगठन की दलील है कि सर्वे में इन विधायकों का परफारमेंस बेहतर नहीं आंका गया है.छत्तीसगढ़ के चर्चित मिथकछत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ ऐसे मिथक हैं, जो सुर्खियों में हैं. यहां जो भी विधानसभा अध्यक्ष बनता है, वो दोबारा चुनाव नहीं जीतता. पहले विस अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला बने. 2003 के चुनाव में वे तो जीत गए, पर कांग्रेस की सरकार नहीं बनी. उसके बाद से वह लगातार चुनाव हारते आ रहे हैं. भाजपा की पहली सरकार बनी तो प्रेम प्रकाश पांडे विस अध्यक्ष बने, पर 2008 का चुनाव हार गए. 2008 में धरमलाल कौशिक विस अध्यक्ष बने, पर 2013 में हार गए. 2013 में गौरीशंकर अग्रवाल विस अध्यक्ष बने हैं, अब 2018 का चुनाव उनके लिए चुनौती है.नया राज्य बना तो नंदकुमार साय पहले नेता प्रतिपक्ष बने, पर 2003 का चुनाव वे अजीत जोगी से हार गए. 2003 में महेन्द्र कर्मा नेता प्रतिपक्ष बने और वे 2008 का चुनाव हार गए. 2008 में रविंद्र चौबे नेता प्रतिपक्ष बने, पर 2013 का चुनाव हार गए. 2013 में टी.एस. सिंहदेव नेता प्रतिपक्ष बने, अब देखना है कि वे इस मिथक को तोड़ते हैं या नहीं.अजीत जोगी के कार्यकाल में अमितेष शुक्ला पंचायत मंत्री बने, पर वह अगला चुनाव हार गए. भाजपा की पहली सरकार बनी और अजय चंद्राकर पंचायत मंत्री बने, पर उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद रामविचार नेताम पंचायत मंत्री बने, बाद में हेमचंद यादव को पंचायत मंत्री बनाया गया, पर 2013 में दोनों चुनाव हार गए. वर्तमान में अजय चंद्राकर पंचायत मंत्री हैं. अजीत जोगी की सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री गीता देवी थीं, 2003 के चुनाव और 2004 के विस उपचुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा. भाजपा की पहली सरकार में रेणुका सिंह तथा दूसरी सरकार में लता उसेंडी इस पद पर रहीं, अगले चुनाव में उन्हें भी पराजित होना पड़ा. वर्तमान महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू हैं, पर उन्हें इस बार टिकट ही नहीं दिया गया. तानाखार विधानसभा से तीन बार विजयी होने वाले रामदयाल उइके कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए हैं. मरवाही में भाजपा से विजयी होने के बाद अजीत जोगी के लिए अपनी सीट छोड़ने वाले रामदयाल उइके बाद में तानाखार से कांग्रेस के टिकट पर तीन बार विधायक बने और हर बार भाजपा की सरकार बनी यानी वे जिस पार्टी के विधायक बनते हैं, उस पार्टी की सरकार नहीं बनती है.

Updated : 17 Nov 2018 8:04 AM GMT
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