अब दुर्गम क्षेत्रों में भी अधिक उंचाई से कूद सकेंगे सेना के जवान

अब दुर्गम क्षेत्रों में भी अधिक उंचाई से कूद सकेंगे सेना के जवान

नई दिल्ली, एजेंसी |  दुर्गम क्षेत्रों में ऊँचाइयों से कूदना पहले भारतीय सेना के लिए असंभव सा प्रतीत होता था, लेकिन अब नहीं । अब सेनाओं के लिए तैयार किये गये तीसरी पीढी के पैराशूट की सहायता से सेना के जवान दुर्गम स्थानों पर भी अधिकतम उंचाई से छलांग लगा सकेंगे ।  HRDE लगभग 6 साल से इस पैराशूट के ऊपर कार्यरत था । लम्बे समय के इन्तजार के बाद HRDE ने हाल ही में तीसरी पीढी का पैराशूट विकसित कर लिया है । इस नये पीटीए-जीटू पैराशूट से सामान्य तौर पर 1250 फीट ऊंचाई से आसानी से छलांग लगाई जा सकती है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर यह 4000 फीट ऊंचाई से भी कूद सकते हैं।

इसकी खासियत ये है कि इसका अधिकतम उपयोग दुर्गम स्थानों पर किया जाएगा जो कि सेना के कार्य को और  भी आसान बना देगा। जानकारी देने से पहले HRDE ने इस पैराशूट की हर प्रकार से जांच की है। जांच के लिए इस पैराशूट के मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में एक साल तक कई  सारे डमी ट्रायल किए गए हैं। डमी ट्राइल के बाद से सेना ने इसके यूजर ट्राइल शुरू कर दिए हैं। सफल होने के बाद से HRDE को इसकी डिमांड भेज दी गयी है। इस पैराशूट को तैयार करने में उन्नत किस्म के नायलॉन सहित कई अन्य मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। जानकारी के अनुसार पैराशूट की उम्र 20 साल तक निर्धारित की गयी है।

Uday Sarvodaya Team

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