अब शिक्षा अधिकारी अपने दफ्तर में नहीं कर पायेंगे शिक्षकों को तैनात

अब शिक्षा अधिकारी अपने दफ्तर में नहीं कर पायेंगे शिक्षकों को तैनात

उत्तर-प्रदेश, ब्यूरो |  परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों व खंड शिक्षा अधिकारियों के दफ्तरों व किसी अन्य विद्यालय से संबद्ध कर उनसे लिपिकीय/शैक्षणिक कार्य कराने पर शासन ने रोक लगा दी है। शासन को शिकायतें मिल रही थीं कि कई जिलों में शिक्षकों को बीएसए या खंड शिक्षा अधिकारी अपने दफ्तरों में तैनात कर उनसे लिपिकीय काम करा रहे हैं या अन्य विद्यालयों में तैनाती कर उनसे शैक्षणिक कार्य ले रहे हैं। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है। शासन ने कहा है कि परिषदीय शिक्षकों से लिपिकीय या अन्य विद्यालय में शैक्षणिक कार्य लेना निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रविधानों के खिलाफ है। गौरतलब है कि आरटीई एक्ट और उप्र निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली के मुताबिक किसी स्कूल में पदस्थापित शिक्षक को जनगणना, आपदा राहत व निर्वाचन कार्यों के अलावा किसी अन्य विद्यालय या गैर शैक्षणिक उद्देश्य से किसी कार्यालय में तैनात न करने का प्राविधान है।

परिषदीय स्कूलों में वैसे ही शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की बेतरतीब तैनाती भी है। इसलिए शासन ने बीती 17 जून को जारी की गई शिक्षकों की समायोजन नीति में साफ निर्देश दिया था कि जिन विद्यालयों में शिक्षक-छात्र मानक से अधिक अध्यापक तैनात हैं, वहां से उन्हें हटाकर उन स्कूलों में तैनात किया जाए जहां शिक्षकों की जरूरत है। वहीं शिक्षकों को अन्यत्र संबद्ध न करने के बारे में पहले भी शासनादेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लिया जा रहा था जिस पर शासन को फिर से आदेश जारी करना पड़ा।

Uday Sarvodaya Team

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