एक दिन तुम्हें सड़कों पर खदेड़ा जाएगा

एक दिन तुम्हें सड़कों पर खदेड़ा जाएगा

संजीव खुदशाह

तुम वही हो न
जो उना में दलितों को पीट रहे थे और भारत मां की जय बोल रहे थे.

मैं जानता हूं तुम्हें
आरक्षण के विरोध में तुम ही सड़कों पर उतरते हो.

महाराष्ट्र में यूपी बिहारियों को भी तुम्हीं पीटते हो और
*गर्व से कहो हम हिंदू हैं* कहते हो.

तुम ही तो हो न वह व्यक्ति
जिसने आसिफा के बलात्कारियों को बचाने के लिए थाने का घेराव किया था
और भारत मां की जय के नारे लगाए थे.

तुम ही तो हो
जिसने अखलाक और सुबोध सिंह को मारा था
और गौ हत्या बंद हो के नारे लगाए थे.

फिर तुमने जंतर मंतर में जाकर संविधान भी जलाया
और मनुस्मृति को लागू करने की कसमें खाई थी.

तुम वही हो
जिसे सिर्फ लालू और मायावती में ही सारे खोट नजर आते हैं.

पाकिस्तान की ओर से जासूसी करते तुम्हें पकड़ा गया था.
अभी अभी तुमने राफेल की खुफिया दस्तावेज पाकिस्तान को बेच दिए.

तुम ही तो हो ना
जिसने पुलवामा फिदायीन हमले पर भारत माता की जय के नारे लगाए थे
सैनिकों के पेंशन और पतली दाल के सवाल पर सांप सूंघ गया था.

तुम ही तो हो न
जिसे कश्मीर तो पसंद है लेकिन कश्मीरियों से नफरत है.

हत्यारे शंभू भवानी को तुमने ही हीरो बनाया था
उसके अकाउंट में लाखों रुपए जमा करवाए थे.

लोग पहचान गए हैं तुम्हारी जाति को
वंदे मातरम की आड़ में बैठे हुए घाती को.

वह दिन दूर नहीं जब
लोग तुम्हें सड़कों पर खदेड़ेंगे
और तुम्हारे मुंह पर ओढ़ा गया नकाब नोचकर
दोगलों तुम्हे चौराहों पर बेनकाब करेंगे.

(चर्चित दलित लेखक, प्रगतिशील विचारक, कवि-कथाकार व समीक्षक. ‘सफ़ाई कामगार समुदाय’ एवं ‘आधुनिक भारत में पिछड़ा वर्ग’ चर्चित कृतियां )

Ravi Prakash

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