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एक दिन तुम्हें सड़कों पर खदेड़ा जाएगा

एक दिन तुम्हें सड़कों पर खदेड़ा जाएगा
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संजीव खुदशाहतुम वही हो नजो उना में दलितों को पीट रहे थे और भारत मां की जय बोल रहे थे.मैं जानता हूं तुम्हेंआरक्षण के विरोध में तुम ही सड़कों पर उतरते हो.महाराष्ट्र में यूपी बिहारियों को भी तुम्हीं पीटते हो और*गर्व से कहो हम हिंदू हैं* कहते हो.तुम ही तो हो न वह व्यक्तिजिसने आसिफा के बलात्कारियों को बचाने के लिए थाने का घेराव किया थाऔर भारत मां की जय के नारे लगाए थे.तुम ही तो होजिसने अखलाक और सुबोध सिंह को मारा थाऔर गौ हत्या बंद हो के नारे लगाए थे.फिर तुमने जंतर मंतर में जाकर संविधान भी जलायाऔर मनुस्मृति को लागू करने की कसमें खाई थी.तुम वही होजिसे सिर्फ लालू और मायावती में ही सारे खोट नजर आते हैं.पाकिस्तान की ओर से जासूसी करते तुम्हें पकड़ा गया था.अभी अभी तुमने राफेल की खुफिया दस्तावेज पाकिस्तान को बेच दिए.तुम ही तो हो नाजिसने पुलवामा फिदायीन हमले पर भारत माता की जय के नारे लगाए थेसैनिकों के पेंशन और पतली दाल के सवाल पर सांप सूंघ गया था.तुम ही तो हो नजिसे कश्मीर तो पसंद है लेकिन कश्मीरियों से नफरत है.हत्यारे शंभू भवानी को तुमने ही हीरो बनाया थाउसके अकाउंट में लाखों रुपए जमा करवाए थे.लोग पहचान गए हैं तुम्हारी जाति कोवंदे मातरम की आड़ में बैठे हुए घाती को.वह दिन दूर नहीं जबलोग तुम्हें सड़कों पर खदेड़ेंगेऔर तुम्हारे मुंह पर ओढ़ा गया नकाब नोचकरदोगलों तुम्हे चौराहों पर बेनकाब करेंगे.(चर्चित दलित लेखक, प्रगतिशील विचारक, कवि-कथाकार व समीक्षक. ‘सफ़ाई कामगार समुदाय’ एवं ‘आधुनिक भारत में पिछड़ा वर्ग’ चर्चित कृतियां )

Updated : 20 Feb 2019 5:56 AM GMT
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