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दोस्त की जान बचाने 1400 किमी का सफर तय कर ऑक्सीजन लाया देवेंद्र

38 साल के स्कूल टीचर देवेंद्र, अपने दोस्त राजन अग्रवाल के लिए एक ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर झारखंड के बोकारो से नोएडा पहुंचे। लगभग 24 घंटों तक 1400 किलोमीटर गाड़ी चलाकर वह दोस्त की मदद को पहुंचे।

दोस्त की जान बचाने 1400 किमी का सफर तय कर ऑक्सीजन लाया देवेंद्र
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उदय सर्वोदय

नई दिल्ली / रांची : देश में कोरोना की दूसरी लहर बेहद जानलेवा हो चुकी है। एक तरफ कोरोना महामारी ने जहां देश के तमाम राज्यों को बेहाल कर रखा है, वहीं संकट के इस दौर में एक-दूसरे की मदद के किस्से भी कम नहीं हैं। अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की भारी कमी देखी जा रही है। वहीं कई अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों को भर्ती करने से भी मना कर दिया है। इसके चलते लोग मर रहे हैं। इस बीच दोस्ती और इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एक शख्स ने जो किया वह सराहनीय है। इन्होंने अपने दोस्त की जान बचाने के लिए जो कुछ भी किया, वैसी कहानियां फिल्मों में ही देखने को मिलती हैं।

दरअसल 38 साल के स्कूल टीचर देवेंद्र, अपने दोस्त राजन अग्रवाल के लिए एक ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर झारखंड के बोकारो से नोएडा पहुंचे। लगभग 24 घंटों तक 1400 किलोमीटर गाड़ी चलाकर वह दोस्त की मदद को पहुंचे। खबर के अनुसार देवेंद्र को रास्ते में एक बार बिहार और एक बार यूपी पुलिस ने रोका लेकिन मामला समझने के बाद उन्हें जाने दिया गया।

देवेंद्र को 24 अप्रैल रात को रांची में वैशाली गाजियाबाद में रहने वाले संजय सक्सेना का फोन आया कि कोविड-19 पॉजिटिव राजन के लिए ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है। बस एक दिन की ही ऑक्सीजन बची है और आगे कहीं से भी कुछ इंतजाम नहीं हो पा रहा है। संजय सक्सेना के घर पर ही राजन का इलाज चल रहा है।

दरअसल, देवेंद्र और राजन के एक और कॉमन फ्रेंड संजीव सुमन की कुछ ही दिन पहले 19 अप्रैल को नोएडा में कोविड-19 से ही मौत हो गई थी। राजन भी अपनी पत्नी के साथ नोएडा में उसी सोसाइटी के फ्लैट में रहते थे जहां संजीव सुमन का भी फ्लैट था। संजीव सुमन को बचाए न जाने से राजन बहुत घबरा गए थे। उन्होंने नोएडा और दिल्ली में अस्पताल बेड के लिए बहुत कोशिश की, लेकिन कहीं बेड नहीं मिला। इसके बाद राजन ने पुराने परिचित संजय सक्सेना को सब बताया। संजय सक्सेना ही फिर उन्हें अपने घर वैशाली ले गए और वहीं उनका इलाज होने लगा।

संजय सक्सेना का 24 अप्रैल को घबराई आवाज में फोन आने के बाद देवेंद्र इसी उधेड़बुन में जुट गए कि कैसे बचपन के जिगरी दोस्त राजन के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम किया जाए। वो रांची से रात में ही बाइक से 150 किलोमीटर दूर बोकारो के लिए निकल पड़े। हालांकि बोकारो में भी ऑक्सीजन सिलेंडर मिलना आसान नहीं था। देवेंद्र ने शहर में कई ऑक्सीजन प्लांट और सप्लायर से पता किया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें फिर से खाली सिलेंडर ही मिल सकेगा। आखिर में वह बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में झारखंड स्टील ऑक्सीजन प्लांट के संचालक तक पहुंचे। तकनीशियन ने उन्हें पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट लेकर सिलेंडर देने पर सहमति जताई। उन्हें 10000 का सिलेंडर और 400 की ऑक्सीजन मिली।

अब ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम तो हो गया, लेकिन उसे करीब 1300 किलोमीटर दूर वैशाली, गाजियाबाद समय पर पहुंचाना भी पहाड़ जैसा था। इसके लिए देवेंद्र ने अपने एक परिचित से कार मांगी और रविवार दोपहर को खुद ही ड्राइव करते हुए वैशाली गाजियाबाद के लिए निकल पड़े। लगभग 24 घंटे उन्हें इस सफर में लगे। रास्ते में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर चेकिंग के दौरान उनसे सवाल भी किए गए। इस पर उन्हें बताना पड़ा कि उनकी दोस्त की जिंदगी का सवाल है। सोमवार दोपहर को देवेंद्र वैशाली गाजियाबाद पहुंचे। ऐन वक्त पर राजन को ऑक्सीजन मिल गई। अब राजन की हालत पहले से बेहतर है। अपने दोस्त के इस तरह बोकारो से सिलेंडर लेकर पहुंचने ने भी राजन के लिए ट़ॉनिक का काम किया। ऐसा दोस्ताना और इंसानियत की मिसाल आज के परिवेश में बहुत मुश्किल से देखने को मिलती है ।

Updated : 28 April 2021 10:13 AM GMT
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Shivani

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