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अक्खड़ मिजाज और संघर्ष की गाथा हैं रघुबर

रघुवर दास को बचपन में मजदूरी करनी पड़ी। उन्होंने जमशेदपुर की टाटा स्टील रोलिंग मिल में मजदूर के रूप में अपना सफर शुरू किया और तमाम उतार-चढ़ाव के बीच मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे।

अक्खड़ मिजाज और संघर्ष की गाथा हैं रघुबर
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राजीव रंजन

वे मुझ में कोई दोष नहीं पा सकते थे, इसलिए उन्होंने यह कहते हुए एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया कि मैं घमंडी और छोटा स्वभाव वाला था। वे कहते हैं कि मैं छत्तीसगढ़ी हूं। यह सच है कि मेरी जड़ें वहां हैं, लेकिन मैं झारखंड में पैदा हुआ था। मेरा परिवार लक्षित है। मेरे परिवार का इससे क्या लेना-देना है? चुनाव मुद्दों पर लड़ा जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमले करने से। जयचंद हर जगह मौजूद हैं। कुछ जयचंदों के कारण पार्टी हार गयी। कई बार साजिशें सफल हो जाती हैं लेकिन साजिश के माध्यम से सफलता लंबे समय तक नहीं रहती है। मैंने रैंकों से ऊपर उठकर यहां तक पहुंचने के लिए संघर्ष किया है। स्ट्रगल आपको शक्ति प्रदान करता है। शक्ति आती है और चली जाती है। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। यही अटल जी ने हमें सिखाया है। हम देश, पार्टी और राज्य के लिए काम करना जारी रखेंगे।

2019 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद रघुवर दास द्वारा दिया गया यह बयान काफी कुछ स्पष्ट कर देता है। झारखंड की राजनीति में रघुवर दास तत्काल एक स्पष्ट कोण हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास 26 सितम्बर, 2020 को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किये गये। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जमशेदपुर पूर्व सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा तथा 70,157 वोटों के अंतर से निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली।

रघुवर ने अपनी नेतृत्व क्षमता के बल पर बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किया। इसके पूर्व 14 वर्षों के दौरान ऐसा संभव नहीं हो पाया था। हालांकि उनके कई विधायी और प्रशासनिक निर्णय का राज्य में जमकर विरोध हुआ लेकिन विकास के लिए कड़े निर्णय लेने की क्षमता के मामले में रघुवर दास का हर कोई कायल हुए बिना नहीं रह पाया।

3 मई 1955 को जमशेदपुर में जन्मे रघुवर दास वर्ष 1977 में जनता पार्टी के सदस्य बने तथा वर्ष 1980 में भाजपा की स्थापना के साथ ही वह सक्रिय राजनीति में आ गये। वर्ष 1995 में वे पहली बार जमशेदपुर पूर्व से विधायक चुने गये। तब से लगातार 5 बार उन्होंने इस क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया।



रघुवर दास की प्रशंसा इसलिए भी होनी चाहिए कि उन्होंने लोकतंत्र की सुंदरता, भव्यता से लोगों का परिचय कराया। दास अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) परिवार से हैं। उन्होंने अपना बचपन बहुत अभावों में गुजारा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां बचपन में रेलवे स्टेशन पर चाय बेची, वहीं रघुवर दास को बचपन में मजदूरी करनी पड़ी। उन्होंने जमशेदपुर की टाटा स्टील रोलिंग मिल में मजदूर के रूप में अपना सफर शुरू किया और तमाम उतार-चढ़ाव के बीच मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे। रघुवर दास ने रोलिंग मिल में मजदूर के रूप में काम शुरू किया था लेकिन उनकी छंटनी कर दी गयी थी। इसके बाद ही वह राजनीति से जुड़े। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भालूबासा विद्यालय में हुई। यहीं से मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद जमशेदपुर को-आपरेटिव कॉलेज से बीएससी और विधि स्नातक की परीक्षा पास की।

रघुवर दास के परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं, हालांकि उनकी पुत्री की शादी हो चुकी है। रघुवर दास झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री बने। तत्कालीन बिहार के जमशेदपुर पूर्व से वर्ष 1995 में उनका टिकट भाजपा के प्रसिद्ध विचारक गोविंदाचार्य ने तय किया था। वे 15 नवंबर 2000 से 17 मार्च 2003 तक राज्य के श्रम मंत्री रहे, फिर मार्च 2003 से 14 जुलाई 2004 तक वह भवन निर्माण और 12 मार्च 2005 से 14 सितंबर 2006 तक झारखंड के वित्त, वाणिज्य और नगर विकास मंत्री रहे। इसके अलावा रघुवर 2009 से 30 मई 2010 तक झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ बनी भाजपा की गंठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री, वित्त, वाणिज्य, कर, ऊर्जा, नगर विकास, आवास और संसदीय कार्य मंत्री भी रहे।

तथ्य है कि झारखंड में अब तक जितने भी चुनाव हुए, उसमें मौजूदा मुख्यमंत्रियों को अपनी सीट गंवानी पड़ी है। यही वजह है कि 20 वर्षों में यह राज्य अब तक 6 मुख्यममंत्री देख चुका है। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पूर्व सीट से भाजपा के बागी नेता सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को हरा दिया। इसके साथ ही रघुवर दास राज्य में मुख्यमंत्रियों की अपनी सीट गंवाने का मिथक तोड़ने में सफल नहीं हो पाये। हालांकि इसके पूर्व 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री के तौर पर रघुवर दास इतिहास जरूर रच चुके थे। इसी का परिणाम था कि उन्हें पार्टी ने वर्ष 2019 के चुनावों की अगुवाई करने की जिम्मेदारी दी क्योंकि भाजपा ने हर घर में 'घर, घर रघुबर' या रघुवर के नारे का इस्तेमाल किया।

रघुवर दास ने कई अवसरों पर कहा है कि उन्होंने पूरे 5 वर्ष 'तन-मन' से राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की सेवा की लेकिन जनता ने जो जनादेश दिया है, वह भी शिरोधार्य है, उसका मलाल नहीं है। उन्होंने कहा, 'झारखड के निर्माण के बाद 14 वर्षों से निराश और हताश जनता के मन में मैंने सरकार के प्रति विश्वास पैदा किया। मैंने तन-मन से राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की सेवा की। फिर भी हार का कोई मलाल नहीं है।' दास ने बतौर मुख्यमंत्री अपने अंतिम साक्षात्कार में कहा था, 'पांच वर्ष के मेरे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है शासन और जनता में विश्वास का रिश्ता कायम करना।' उन्होंने कहा, 'वर्ष 2014 में जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर भाजपा को बहुमत दिया। प्रधानमंत्री ने वादा किया था, 'आप हमें पूर्ण बहुमत दें और हम आपको संपूर्ण विकास देंगे और जनता ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर विश्वास किया।'

रघुवर का वर्तमान में भी यही मत है, 'अलग राज्य बनने के बाद से जो जनता हताश और निराश थी, उसमें सरकार और शासन के प्रति विश्वास वापस लाना मेरी पहली जिम्मेदारी थी और पांच वर्ष में मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि शासन के प्रति जनता के मन में हम विश्वास वापस लाने में सफल रहे।' घमंडी और अड़ियल होने के अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर दास वे कहते हैं, 'मैं घमंडी और अड़ियल कत्तई नहीं हूं। हां मैं स्पष्टवादी अवश्य हूं क्योंकि मेरे मां-बाप ने हमें बचपन से यही सिखाया है। यह मेरे खून में है।' दास ने कहा, 'जब मैं विकास की बात करता हूं, जब राज्य को आगे ले जाने की बात कहता हूं तो मुझे अहंकारी बोला जाता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'भ्रष्ट अंदर से ध्वस्त रहता है। मैं अंदर-बाहर एक जैसा हूं। हर तरह से साफ-सुथरा हूं। यही कारण है कि पांच वर्ष के शासन के दौरान मेरे कार्यालय अथवा आवास पर किसी दलाल को कभी प्रवेश नहीं मिला। इससे भी सत्ता के तमाम दलाल हमसे दुखी थे।'

दास ने कहा,'मैं अपने काम से संतुष्ट हूं क्योंकि हमने हर सेक्टर में काम किया। मेरा उद्देश्य ही था, विकास और योजनाओं के सम्यक क्रियान्वयन से लोगों का भरोसा जीतना और मेरी सरकार इसमें कामयाब हुई।'



अपने ही मंत्रिमंडल के सहयोगी रहे सरयू राय से चुनाव हारने के संबंध में पूछे जाने पर दास भारी मन से अपनी बात रखते हैं, 'मैं व्यक्तिगत लांछनों से बेहद दुखी हूं और जिस प्रकार हमें घमंडी कहा गया, मेरे उपर व्यसन के भी आरोप लगाये गये, वह पूरी तरह बेबुनियाद और शुचिता की राजनीति के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ थे। आम जनता में भ्रम फैला कर और झूठ की बातें फैला कर मतदान से ठीक दो-तीन दिनों पूर्व यह अफवाह फैला दी गयी कि मैं चुनाव हार रहा हूं, जिससे शायद लोग भ्रम में आ गये।' राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार से उनके रिश्तों के बारे में पूछे गये सवाल पर रघुवर दास कहते हैं, 'वर्तमान सरकार को वह जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक सहयोग देंगे लेकिन जनता के हित के मुद्दों से कोई समझौता कत्तई नहीं किया जायेगा।'

राजनीति की बात अपनी जगह है। विचारधाराओं की इस तंग गलियों में कौन सही और कौन गलत है, इस पर आने वाला कल ही सही निर्णय कर पायेगा। बावजूद इसके, इतना तो स्पष्ट है कि रघुवर दास के कार्यकाल के दौरान उद्योग जगत का झारखंड के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था। संपदाओं-संसाधनों से भरपूर झारखंड अब भी अपने अपेक्षित विकास से कोसों दूर है। इसके कई कारण हैं। इनमें से एक राजनीतिक स्थिरता का अभाव भी था। रघुवर दास ने राज्य को स्थिर सरकार देकर उद्योग जगत को संदेश दिया कि नीतिगत फैसले को लेकर कोई असमंजस की स्थिति नहीं है। उद्यमी शासन-प्रशासन से सहयोग और साथ की पूरी उम्मीद कर सकते हैं। इसी का परिणाम रहा कि टाटानगर इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक उषा रानी ने कहा था कि 25 साल से झारखंड में काम कर रही हूं।

बतौर मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में पहली बार इतना बेहतर माहौल मिला है। आगे भी निवेश करेंगे। कौशल त्रिवेणी फूड पार्क के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर कल्याण कुमार मुखर्जी ने भी झारखंड को उद्योग लगाने के लिए बेहतर बताया। उन्होंने कहा, अब उद्योगपतियों को आसानी से जमीन मिल जाती है। सिंगल विंडो से काफी सुविधा मिल रही है। गैलेक्सी एलीगेंट फैशन के निदेशक मनीष कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार लोगों को रोजगार से जोड़ना चाहती है, हम उनके सपने साकार करने में योगदान देंगे।

Updated : 23 Jan 2021 6:58 AM GMT
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