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17 फरवरी: जब महात्मा गांधी पहुंचे शांतिनिकेतन, टैगोर के न मिलने पर कही दिल को छू लेने वाली बात

गांधी अपनी पत्नी कस्तूरबा के साथ शांतिनिकेतन में पहुंचे थे, लेकिन उस समय रवीन्द्रनाथ टैगोर कलकत्ता में थे, इसलिए उनसे मुलाक़ात नहीं हो पाई।

17 फरवरी: जब महात्मा गांधी पहुंचे शांतिनिकेतन, टैगोर के न मिलने पर कही दिल को छू लेने वाली बात
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उदय सर्वोदय

17 फरवरी, 1915... यही वह दिन था जब महात्मा गांधी ने पहली बार शांतिनिकेतन का दौरा किया। भारतीयों के लिए यह दिन बेहद खास है। गांधी अपनी पत्नी कस्तूरबा के साथ शांतिनिकेतन में पहुंचे थे, लेकिन उस समय रवीन्द्रनाथ टैगोर कलकत्ता में थे, इसलिए उनसे मुलाक़ात नहीं हो पाई। शांतिनिकेतन में पहली बार पहुंचने के बाद गांधी ने कहा, 'आज मुझे जो ख़ुशी हो रही है, वह मैंने पहले कभी महसूस नहीं की। हालांकि रवींद्रनाथ यहां मौजूद नहीं हैं, फिर भी हम उनकी उपस्थिति को अपने दिल में महसूस कर रहे हैं। मुझे यह जानकर ख़ुशी हुई कि आपने भारतीय तरीके से स्वागत की व्यवस्था की है।'

'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की पहली मुलाकात 6 मार्च, 1915 को हुई थी, जब महात्मा गांधी दूसरी बार शांतिनिकेतन में पहुंचे। महात्मा गांधी इसी दिन पहली बार शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर से मिले थे।

इस मुलाक़ात के दौरान टैगोर और गांधी की एकसाथ बैठे हुए कई तस्वीरें ली गईं। इन दुर्लभ तस्वीरों के साथ साथ और गांधी-टैगोर द्वारा एक दूसरे को लिखे गए पत्र 100 साल के बाद विश्व-भारती द्वारा लगाई गई एक प्रदर्शनी में पहली बार दुनिया को देखने को मिले।

टैगोर के साथ हुई पहली मुलाकात के दौरान गांधीजी को शांतिनिकेतन के कुछ तौर तरीके पसंद नहीं आये। वह चाहते थे कि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अपना काम भी खुद करें, उन्हें ऐसा लगा कि बहुत सारे छोटे-छोटे कामों के लिए शांतिनिकेतन में अलग से नौकर रखने की जरुरत नहीं है। इसके बाद ही 10 मार्च, 1915 को टैगोर की सहमति से गांधीजी ने शांतिनिकेतन में सेल्फ-हेल्प (अपना काम अपने हाथ) मूवमेंट की शुरूआत की, जिसके तहत उस दिन, सभी छात्र और शिक्षक ने परिसर की सफाई खुद की और इस दिन को शांतिनिकेतन में ' गांधी पुण्याह' का नाम दिया गया।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से लेकर उनके चरखा-प्रेम तक की तीखी आलोचना की थी। ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचार के खिलाफ जिस समय गांधी ने 'असहयोग आंदोलन' शुरू किया, उस दौरान टैगोर यूरोप के दौरे पर थे और पूरब तथा पश्चिम की आध्यात्मिक एकता के सूत्र तलाश रहे थे।

शांतिनिकेतन में हर साल 10 मार्च का दिन 'गांधी दिवस' के रूप में मनाया जाता था। दक्षिण अफ्रीका में अपने आश्रम जीवन के अभ्यस्त हो चुके गांधी अपना सारा काम खुद अपने ही हाथों से करते थे। जाते- जाते यह भी बता दें कि गांधी 1915 और 1945 के बीच आठ बार शांतिनिकेतन में गए।

Updated : 17 Feb 2021 7:14 AM GMT
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